Adbhut ras ka udaharan वह पंक्ति है जिसे पढ़कर मुँह से निकल पड़े: "अरे, यह कैसे हो सकता है?" जब किसी कविता में किसी अनोखी, असंभव सी लगने वाली, अलौकिक या पहली बार देखी गई वस्तु या घटना का ऐसा वर्णन हो कि पात्र और पाठक दोनों चकित रह जाएँ, तो वहाँ अद्भुत रस होता है। अद्भुत रस रस के नौ मूल भेदों में आठवाँ है।
अद्भुत रस की परिभाषा (Adbhut ras ki paribhasha)
अलौकिक, आश्चर्यजनक या विचित्र वस्तुओं, व्यक्तियों अथवा घटनाओं को देखने, सुनने या उनका वर्णन पढ़ने से हृदय में स्थित विस्मय नामक स्थायी भाव जागता है। यही विस्मय जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो अद्भुत रस कहलाता है।
अद्भुत रस का स्थायी भाव: विस्मय (आश्चर्य)।
अद्भुत रस के अंग
| अंग | अद्भुत रस में |
|---|---|
| स्थायी भाव | विस्मय |
| आलंबन | अलौकिक या अनोखी वस्तु, व्यक्ति, घटना, जादू, प्रकृति का विराट रूप |
| उद्दीपन | उस वस्तु के विचित्र गुण, असंभव लगने वाले कार्य, अचानक परिवर्तन |
| अनुभाव | आँखें फाड़कर देखना, मुँह खुला रह जाना, स्तब्ध होना, रोमांच, गद्गद वाणी, दाँतों तले उँगली दबाना |
| संचारी भाव | वितर्क, आवेग, हर्ष, उत्सुकता, जड़ता, भ्रांति, शंका |
अद्भुत रस की पहचान
- पंक्ति में अचरज, अचंभा, विस्मय, चकित, अनोखा, अद्भुत, अजूबा जैसे शब्द हों।
- कोई ऐसी बात कही जाए जो सामान्य नियम के उलट हो।
- पात्र डरने या हँसने के बजाय ठगा सा, स्तब्ध रह जाए।
- आश्चर्य बताने वाले मुहावरे संकेत देते हैं, जैसे दंग रह जाना, दाँतों तले उँगली दबाना, आँखें फटी रह जाना।
अद्भुत रस के उदाहरण (Adbhut ras ke udaharan)
उदाहरण 1: कबीर (उलटबाँसी)
एक अचंभा देखा रे भाई।
ठाढ़ा सिंह चरावै गाई॥
पहले पूत पीछे भइ माई।
चेला के गुरु लागै पाई॥
व्याख्या: कबीर कहते हैं, भाई, मैंने एक अचंभा देखा: शेर खड़ा होकर गाय चरा रहा है, पहले पुत्र जन्मा फिर माता, और गुरु चेले के पैर छू रहा है। ये सब बातें सामान्य नियम के उलट हैं, इसलिए सुनने वाले के मन में विस्मय जागता है। "अचंभा" शब्द ही अद्भुत रस का संकेत है। कबीर की ऐसी रचनाओं को उलटबाँसी कहते हैं, जिनके भीतर गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा होता है।
उदाहरण 2: कबीर (उलटी बानी)
कबीरदास की उलटी बानी।
बरसै कंबल भीजै पानी॥
व्याख्या: कंबल बरस रहा है और पानी भीग रहा है। यह बात प्रकृति के नियम से बिलकुल उलटी है। ऐसी विचित्र बात सुनकर मन चकित हो जाता है, इसलिए यह अद्भुत रस का सरल उदाहरण है।
उदाहरण 3: मौलिक उदाहरण (जादूगर)
उदाहरण:
खाली टोपी, हाथ घुमाया, निकला उजला खरगोश।
मुँह खुला रह गया सबका, बच्चे खो बैठे होश॥
व्याख्या: खाली टोपी से खरगोश निकलना आलंबन है, जादूगर का हाथ घुमाना उद्दीपन है, मुँह खुला रह जाना अनुभाव है, उत्सुकता और वितर्क संचारी भाव हैं।
उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (प्रकृति)
उदाहरण:
एक रात में खिल गए, सौ सौ फूल अपार।
सुबह जो देखा बाग को, चकित रहा संसार॥
व्याख्या: एक ही रात में सैकड़ों फूलों का खिल जाना अनोखी घटना है। "चकित रहा संसार" विस्मय का सीधा संकेत है। यहाँ "सौ सौ" में अनुप्रास की छटा भी है।
उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (नन्हा चित्रकार)
उदाहरण:
पाँच बरस का नन्हा बालक, रंग भरे बेजोड़।
देख चित्र को दाँतों तले, उँगली दबाएँ लोग॥
व्याख्या: छोटे बच्चे की अद्भुत प्रतिभा आलंबन है। लोगों का दाँतों तले उँगली दबाना विस्मय का अनुभाव है।
उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (आकाश)
उदाहरण:
आधी रात को चमका नभ में, सतरंगी उजियार।
ठिठक गए सब राही पथ के, देखें बारंबार॥
व्याख्या: रात में आकाश का सतरंगा प्रकाश अनोखा दृश्य है। राहियों का ठिठक जाना (जड़ता) और बार बार देखना अनुभाव हैं।
अद्भुत रस को दूसरे रसों से अलग कैसे करें
| स्थिति | रस | कारण |
|---|---|---|
| अनोखी चीज़ देखकर चकित होना | अद्भुत | स्थायी भाव विस्मय |
| अनोखी चीज़ देखकर डर जाना | भयानक | स्थायी भाव भय |
| अजीब वेश देखकर हँसना | हास्य | स्थायी भाव हास |
ध्यान दें: एक ही दृश्य से अलग अलग भाव जाग सकते हैं। अगर जादूगर की आग वाली करामात देखकर बच्चा चकित हो, तो अद्भुत रस है; अगर वह डरकर रोने लगे, तो भयानक रस।
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "एक अचंभा देखा रे भाई। ठाढ़ा सिंह चरावै गाई॥" में कौन सा रस है? उत्तर: अद्भुत रस। स्थायी भाव: विस्मय। आलंबन: शेर का गाय चराना (नियम के उलट घटना)। उद्दीपन: घटना की विचित्रता। अनुभाव: "अचंभा देखा" कहकर चकित होना। संचारी भाव: वितर्क, उत्सुकता।
अभ्यास: रस पहचानिए
- "पत्थर पर उग आया पीपल, देख सभी हैरान।" उत्तर: अद्भुत रस, क्योंकि अनोखी घटना से हैरानी (विस्मय) जागी।
- "गुब्बारे सा फूला मोटू, सब हँस हँस बेहाल।" उत्तर: हास्य रस, क्योंकि यहाँ आश्चर्य नहीं, हँसी है।
- "नन्ही चींटी ढोए दाना, अपने से दस गुना।" उत्तर: अद्भुत रस, क्योंकि छोटे जीव की अनोखी शक्ति चकित करती है।
याद रखने की ट्रिक
"अचरज हो तो अद्भुत।" दोनों शब्द "अ" से शुरू होते हैं। स्थायी भाव विस्मय याद रखने के लिए सोचिए: "विस्मय में वाह निकलती है।"
सामान्य गलतियाँ
- स्थायी भाव "आश्चर्य" भी सही माना जाता है, पर शास्त्रीय उत्तर विस्मय लिखें।
- उलटबाँसी में छिपा आध्यात्मिक अर्थ समझ आने पर कुछ पुस्तकें उसे शांत रस भी मानती हैं। परीक्षा में "अचंभा" वाली पंक्ति के लिए अद्भुत रस लिखें।
- हर अतिशयोक्ति अद्भुत रस नहीं होती। जब अतिशयोक्ति हँसाए, तो हास्य रस होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अद्भुत रस की परिभाषा क्या है?
किसी अलौकिक, अनोखी या आश्चर्यजनक वस्तु या घटना को देखने, सुनने से हृदय में जागा विस्मय जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो अद्भुत रस बनता है।
अद्भुत रस का स्थायी भाव क्या है?
अद्भुत रस का स्थायी भाव विस्मय है, जिसे सरल शब्दों में आश्चर्य कहते हैं।
अद्भुत रस का सबसे आसान उदाहरण क्या है?
कबीर की पंक्ति "एक अचंभा देखा रे भाई। ठाढ़ा सिंह चरावै गाई॥" सबसे आसान उदाहरण है। शेर का गाय चराना नियम के उलट है, जिससे विस्मय जागता है।
अद्भुत रस की पहचान कैसे करें?
जहाँ अचंभा, चकित, विस्मय जैसे शब्द हों, कोई असंभव सी घटना हो और पात्र स्तब्ध रह जाए या दाँतों तले उँगली दबाए, वहाँ अद्भुत रस समझें।
अद्भुत रस के अनुभाव कौन से हैं?
अद्भुत रस के अनुभाव हैं: आँखें फाड़कर देखना, मुँह खुला रह जाना, स्तब्ध होना, रोमांचित होना, गद्गद वाणी और दाँतों तले उँगली दबाना।