Shlesh alankar ke udaharan हिंदी परीक्षा में बहुत पूछे जाते हैं। श्लेष का अर्थ है चिपका हुआ। इस अलंकार में एक ही शब्द के साथ कई अर्थ चिपके रहते हैं। शब्द एक बार आता है, पर पढ़ने वाला उसमें दो या तीन अर्थ एक साथ पाता है।
श्लेष अलंकार की परिभाषा
Shlesh alankar ki paribhasha: जहाँ काव्य में कोई शब्द केवल एक बार आए, पर प्रसंग के अनुसार उसके एक से अधिक अर्थ निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है। स्कूली पुस्तकों में श्लेष को अलंकार के शब्दालंकार भेद में रखा जाता है। कुछ पुस्तकें इसके दो रूप मानती हैं: शब्द श्लेष (शब्दालंकार) और अर्थ श्लेष (अर्थालंकार)।
श्लेष अलंकार की पहचान
- एक शब्द केवल एक बार आता है। यही इसे यमक से अलग करता है।
- वाक्य दो या तीन चीज़ों के बारे में होता है, और वही शब्द हर चीज़ पर अलग अर्थ में लागू होता है।
- पानी, बारे, सुबरन, जीवन, अंबर, दीप जैसे अनेकार्थी शब्द श्लेष में खूब आते हैं।
श्लेष अलंकार के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अभंग श्लेष | शब्द को तोड़े बिना ही कई अर्थ निकलें | रहिमन पानी राखिए (पानी) |
| सभंग श्लेष | शब्द को तोड़कर पढ़ने पर दूसरा अर्थ निकले | उदाहरण: "सुबरन" को सु + बरन (सुंदर वर्ण) और सुबरन (सोना) दोनों तरह पढ़ना |
श्लेष अलंकार के उदाहरण (अर्थ सहित)
- रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून॥ (रहीम)
पानी शब्द के तीन अर्थ हैं: मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए इज्जत और चून (आटे) के लिए जल। - जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय। बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥ (रहीम)
बारे का अर्थ दीपक के लिए जलाने पर और बेटे के लिए बचपन में है। बढ़े का अर्थ दीपक के लिए बुझने पर और बेटे के लिए बड़ा होने पर है। - सुबरन को ढूँढत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर। (प्रचलित प्राचीन दोहा)
सुबरन का अर्थ कवि के लिए सुंदर शब्द, दूसरे के लिए सुंदर रूप और चोर के लिए सोना है। - अजौं तर्यौना ही रह्यौ, श्रुति सेवत इक अंग। नाक बास बेसरि लह्यौ, बसि मुकुतनु कैं संग॥ (बिहारी)
तर्यौना का अर्थ कान का गहना और नीचे रह जाना, श्रुति का अर्थ कान और वेद, नाक का अर्थ नाक और स्वर्ग, मुकुतनु का अर्थ मोती और मुक्त पुरुष है। - उदाहरण: जीवन बिन सब सूना लागे, खेत, नदी और प्राणी। (स्वरचित उदाहरण)
जीवन का अर्थ खेत और नदी के लिए जल, प्राणी के लिए प्राण है। - उदाहरण: पोते के जन्म पर दादी बोलीं, आज घर में नया दीप जला है। (स्वरचित उदाहरण)
दीप का अर्थ दीया भी है और कुल को रोशन करने वाला बालक भी। - उदाहरण: मेघ आए तो धरती ने ओढ़ लिया नया अंबर। (स्वरचित उदाहरण)
अंबर का अर्थ आकाश भी है और वस्त्र भी। बादलों से ढका आकाश धरती का नया कपड़ा बन गया।
श्लेष में आने वाले प्रमुख अनेकार्थी शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पानी | जल, चमक, इज्जत |
| अंबर | आकाश, वस्त्र |
| जीवन | जल, प्राण, जिंदगी |
| कर | हाथ, किरण, टैक्स |
| पत्र | पत्ता, चिट्ठी |
| वर्ण | अक्षर, रंग, रूप |
इन शब्दों वाली पंक्ति में यदि शब्द एक बार आए और प्रसंग में दो अर्थ बैठें, तो श्लेष की संभावना बहुत अधिक होती है।
यमक और श्लेष अलंकार में अंतर
| आधार | श्लेष | यमक |
|---|---|---|
| शब्द की आवृत्ति | एक ही बार | दो या अधिक बार |
| अर्थ | एक ही स्थान पर अनेक अर्थ | हर बार एक नया अर्थ |
| उदाहरण | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून | कनक कनक ते सौ गुनी |
एक सरल परीक्षण: शब्द को गिनिए। एक बार है और अर्थ अनेक हैं तो श्लेष, एक से अधिक बार है और अर्थ बदलते हैं तो यमक।
श्लेष और उपमा का मेल
कई बार श्लेष के साथ उपमा अलंकार भी आ जाता है। "जो रहीम गति दीप की" में कुपुत्र की तुलना दीपक से की गई है और बारे, बढ़े में श्लेष है। ऐसे उदाहरण में दोनों अलंकार लिखे जा सकते हैं, पर मुख्य अलंकार श्लेष माना जाता है।
परीक्षा में श्लेष का उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून" में कौन सा अलंकार है?
आदर्श उत्तर: यहाँ श्लेष अलंकार है, क्योंकि पानी शब्द एक ही बार आया है, पर इसके तीन अर्थ हैं। मोती के प्रसंग में पानी का अर्थ चमक, मनुष्य के प्रसंग में इज्जत और चून के प्रसंग में जल है।
रहीम का यह दोहा सिखाता है कि जैसे चमक के बिना मोती बेकार है और जल के बिना आटा गूँधा नहीं जा सकता, वैसे ही सम्मान के बिना मनुष्य का जीवन सूना है। श्लेष के कारण एक छोटे से दोहे में तीन बातें एक साथ कह दी गई हैं।
याद रखने की ट्रिक
श्लेष को "एक तीर से कई निशाने" समझिए। शब्द एक बार चलता है, पर कई अर्थों को छू लेता है।
सामान्य गलतियाँ
- अनेकार्थी शब्द देखते ही श्लेष लिख देना। यदि प्रसंग में केवल एक अर्थ बैठता है, तो श्लेष नहीं है।
- उत्तर में केवल एक अर्थ लिखना। श्लेष के प्रश्न में सभी अर्थ लिखना ज़रूरी है।
- शब्द दो बार आने पर भी श्लेष लिखना। ऐसी स्थिति में यमक की संभावना देखें।
अनेकार्थी शब्दों का अभ्यास श्लेष पहचानने में बहुत मदद करता है। पर्यायवाची शब्द पढ़ते समय यह भी देखिए कि कौन से शब्द एक से अधिक अर्थ देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्लेष अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ एक शब्द केवल एक बार आए पर उसके एक से अधिक अर्थ निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है। श्लेष का अर्थ है चिपका हुआ, यानी एक शब्द से कई अर्थ चिपके रहते हैं।
श्लेष अलंकार के उदाहरण बताइए।
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून, जो रहीम गति दीप की, और सुबरन को ढूँढत फिरत कवि व्यभिचारी चोर इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं। इनमें पानी, बारे, बढ़े और सुबरन शब्दों के कई अर्थ हैं।
रहिमन पानी राखिए में कौन सा अलंकार है?
इसमें श्लेष अलंकार है। पानी शब्द का अर्थ मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए इज्जत और आटे के लिए जल है। शब्द एक है पर अर्थ तीन हैं।
श्लेष अलंकार शब्दालंकार है या अर्थालंकार?
स्कूली परीक्षा में श्लेष को शब्दालंकार माना जाता है। कुछ पुस्तकें इसके दो रूप मानती हैं: शब्द श्लेष, जो शब्दालंकार है, और अर्थ श्लेष, जो अर्थालंकार है।
श्लेष और यमक में क्या अंतर है?
श्लेष में शब्द एक बार आता है और उसी जगह कई अर्थ देता है। यमक में शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार अलग अर्थ देता है।