Sakarmak kriya kise kahate hain: जिस क्रिया के साथ कर्म होता है, यानी जिसका फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। सकर्मक शब्द "स + कर्म" से बना है, जिसका अर्थ है कर्म के साथ। जैसे आशा पत्र लिखती है। यहाँ लिखने का काम आशा करती है, पर लिखने का फल पत्र पर पड़ता है। पत्र कर्म है, इसलिए लिखती है सकर्मक क्रिया है।
कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं: सकर्मक और अकर्मक। इस पेज पर हम सकर्मक क्रिया को उदाहरणों के साथ समझेंगे।
सकर्मक क्रिया की परिभाषा (Sakarmak kriya ki paribhasha)
जिन क्रियाओं का प्रभाव या फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं।
कर्म का अर्थ है वह व्यक्ति या वस्तु जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े। कारक में इसे कर्म कारक कहते हैं और इसका चिह्न "को" है, जो कई बार लुप्त भी रहता है।
सकर्मक क्रिया की पहचान कैसे करें
क्रिया से पहले क्या या किसे / किसको लगाकर प्रश्न करें। अगर उत्तर मिलता है, तो वह उत्तर कर्म है और क्रिया सकर्मक है।
| वाक्य | प्रश्न | उत्तर (कर्म) |
|---|---|---|
| माँ खाना बनाती है। | क्या बनाती है? | खाना |
| पुलिस ने चोर को पकड़ा। | किसे पकड़ा? | चोर को |
| बच्चे गेंद खेलते हैं। | क्या खेलते हैं? | गेंद |
| मैंने दोस्त को बुलाया। | किसे बुलाया? | दोस्त को |
| किसान खेत जोतता है। | क्या जोतता है? | खेत |
सकर्मक क्रिया के भेद (Sakarmak kriya ke bhed)
कर्म की संख्या के आधार पर सकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं:
1. एककर्मक क्रिया
जिस सकर्मक क्रिया के साथ केवल एक कर्म हो, उसे एककर्मक क्रिया कहते हैं।
- रवि किताब पढ़ता है।
- दादी स्वेटर बुन रही हैं।
- बिल्ली दूध पीती है।
2. द्विकर्मक क्रिया
जिस सकर्मक क्रिया के साथ दो कर्म हों, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं। इनमें एक मुख्य कर्म होता है (प्रायः वस्तु, बिना "को") और दूसरा गौण कर्म (प्रायः व्यक्ति, "को" के साथ)।
- अध्यापिका ने बच्चों को (गौण) कहानी (मुख्य) सुनाई।
- माँ ने मुझे (गौण) पैसे (मुख्य) दिए।
- मैंने भाई को (गौण) घड़ी (मुख्य) उपहार में दी।
पहचान: पहले "क्या" पूछें, मुख्य कर्म मिलेगा। फिर "किसे" पूछें, गौण कर्म मिलेगा।
सकर्मक क्रिया के 15 उदाहरण (Sakarmak kriya ke udaharan)
- राहुल चिट्ठी लिखता है।
- दीदी गाना गाती है।
- बच्चे फल खा रहे हैं।
- पिताजी ने नई साइकिल खरीदी।
- माली पौधों को सींचता है।
- मैंने दरवाज़ा खोला।
- गाय घास चरती है।
- नेहा चित्र बना रही है।
- दादाजी अख़बार पढ़ते हैं।
- भाई ने गिलास तोड़ दिया।
- हम टीवी देख रहे थे।
- डॉक्टर ने मरीज़ को दवा दी। (द्विकर्मक)
- दुकानदार ने ग्राहक को सामान दिखाया। (द्विकर्मक)
- मोची जूते सिलता है।
- मैंने पत्र भेजा।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर (Sakarmak aur akarmak kriya)
| सकर्मक क्रिया | अकर्मक क्रिया |
|---|---|
| कर्म होता है। | कर्म नहीं होता। |
| फल कर्म पर पड़ता है। | फल कर्ता पर पड़ता है। |
| क्या या किसे का उत्तर मिलता है। | क्या या किसे का उत्तर नहीं मिलता। |
| उदाहरण: वह आम खाता है। | उदाहरण: वह सोता है। |
कुछ क्रियाएँ दोनों तरह की होती हैं
पढ़ना, लिखना, खेलना, खाना जैसी कई क्रियाएँ प्रयोग के अनुसार सकर्मक भी होती हैं और अकर्मक भी। कर्म हो तो सकर्मक, न हो तो अकर्मक।
- वह पढ़ता है। (अकर्मक प्रयोग) / वह कहानी पढ़ता है। (सकर्मक)
- बच्चे खेल रहे हैं। (अकर्मक प्रयोग) / बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। (सकर्मक)
इसलिए हमेशा वाक्य देखकर निर्णय करें, केवल क्रिया देखकर नहीं।
सकर्मक क्रिया और "ने" का प्रयोग
सकर्मक क्रिया की एक खास पहचान भूतकाल में दिखती है। सामान्य भूत, आसन्न भूत और पूर्ण भूत में सकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ प्रायः "ने" चिह्न लगता है, जैसे मैंने खाना खाया, उसने गीत गाया है, बच्चों ने चित्र बनाए थे। ऐसे वाक्यों में क्रिया कर्ता के अनुसार न बदलकर कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है: लड़के ने रोटी खाई (रोटी स्त्रीलिंग, इसलिए खाई), लड़की ने आम खाया (आम पुल्लिंग, इसलिए खाया)।
अकर्मक क्रिया के साथ "ने" नहीं लगता: लड़का सोया, लड़की सोई। यह अंतर सकर्मक क्रिया पहचानने में मदद करता है। कुछ अपवाद हैं, जैसे लाना सकर्मक है फिर भी वह किताब लाया में "ने" नहीं लगता।
अभ्यास: सकर्मक क्रिया पहचानिए
- बच्चे शोर मचा रहे हैं।
- सूरज डूब गया।
- मैंने दोस्त को जन्मदिन का कार्ड दिया।
- दादी बगीचे के पास रहती हैं।
- चाचा ने नई कार चलाई।
उत्तर: 1. सकर्मक (क्या मचा रहे हैं? शोर), 2. अकर्मक, 3. द्विकर्मक सकर्मक (कार्ड, दोस्त को), 4. अकर्मक, 5. सकर्मक (क्या चलाई? कार)।
सामान्य गलतियाँ
- वह घर गया में घर कर्म नहीं है, स्थान है। "क्या गया?" का उत्तर नहीं बनता, इसलिए जाना अकर्मक है।
- "को" देखकर हमेशा कर्म न मानें। रात को में को समय बताता है, कर्म नहीं।
- अकर्मक क्रिया को प्रेरणार्थक बनाने पर वह सकर्मक बन जाती है, जैसे सोना (अकर्मक) से सुलाना (सकर्मक)। देखें प्रेरणार्थक क्रिया।
क्रिया से जुड़े अन्य विषय: काल और क्रिया विशेषण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं? (sakarmak kriya kise kahate hain)
जिस क्रिया के साथ कर्म हो और उसका फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़े, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे अमित पुस्तक पढ़ता है में पढ़ता है सकर्मक क्रिया है और पुस्तक कर्म है।
सकर्मक क्रिया के कितने भेद हैं?
सकर्मक क्रिया के दो भेद हैं: एककर्मक और द्विकर्मक। एककर्मक में एक कर्म होता है, जैसे वह फल खाता है। द्विकर्मक में दो कर्म होते हैं, जैसे माँ ने बच्चे को खिलौना दिया।
सकर्मक क्रिया के 5 उदाहरण बताइए।
बच्चा दूध पीता है, दीदी पत्र लिखती है, माली पौधे लगाता है, मैंने गाना सुना, किसान फसल काटता है। सभी में क्या पूछने पर उत्तर (कर्म) मिलता है।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में क्या अंतर है?
सकर्मक क्रिया के साथ कर्म होता है और फल कर्म पर पड़ता है। अकर्मक क्रिया के साथ कर्म नहीं होता और फल कर्ता पर पड़ता है। पहचान के लिए क्रिया से पहले क्या या किसे लगाकर प्रश्न करें।
द्विकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?
जिस सकर्मक क्रिया के साथ दो कर्म हों, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं। इसमें एक मुख्य कर्म (वस्तु) और एक गौण कर्म (व्यक्ति) होता है। जैसे गुरुजी ने छात्रों को गणित पढ़ाया।