Yan sandhi (यण संधि) स्वर संधि का चौथा भेद है। इसमें इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाता है। जैसे इति + आदि = इत्यादि। नीचे नियम तालिका और 20 yan sandhi ke udaharan विच्छेद सहित दिए गए हैं।
यण संधि किसे कहते हैं (Yan sandhi kise kahate hain)
परिभाषा: यदि इ, ई, उ, ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न (दूसरी जाति का) स्वर आए, तो इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
भिन्न स्वर का अर्थ है ऐसा स्वर जो उसी जाति का न हो। अगर इ के बाद इ या ई आए तो दीर्घ संधि होगी, पर अ, आ, उ, ए जैसे स्वर आएँ तो यण संधि होगी।
यण संधि के नियम
| नियम | स्वरों का मेल | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | इ/ई + अ = य | अति + अधिक = अत्यधिक |
| 2 | इ/ई + आ = या | इति + आदि = इत्यादि |
| 3 | इ/ई + उ = यु | अभि + उदय = अभ्युदय |
| 4 | इ/ई + ऊ = यू | नि + ऊन = न्यून |
| 5 | इ/ई + ए = ये | प्रति + एक = प्रत्येक |
| 6 | उ/ऊ + अ = व | अनु + अय = अन्वय |
| 7 | उ/ऊ + आ = वा | सु + आगत = स्वागत |
| 8 | उ/ऊ + इ = वि | अनु + इति = अन्विति |
| 9 | उ/ऊ + ए = वे | अनु + एषण = अन्वेषण |
| 10 | ऋ + आ = रा | पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा |
यण संधि में पहले शब्द का अंतिम व्यंजन आधा हो जाता है और उसके साथ य्, व् या र् जुड़ जाता है। जैसे अति + अधिक में त् + य = त्य बना।
यण संधि के उदाहरण (Yan sandhi ke udaharan)
| क्रम | शब्द | संधि विच्छेद | स्वरों का मेल |
|---|---|---|---|
| 1 | इत्यादि | इति + आदि | इ + आ = या |
| 2 | अत्याचार | अति + आचार | इ + आ = या |
| 3 | पर्यावरण | परि + आवरण | इ + आ = या |
| 4 | अत्यधिक | अति + अधिक | इ + अ = य |
| 5 | यद्यपि | यदि + अपि | इ + अ = य |
| 6 | प्रत्यक्ष | प्रति + अक्ष | इ + अ = य |
| 7 | व्यर्थ | वि + अर्थ | इ + अ = य |
| 8 | नद्यर्पण | नदी + अर्पण | ई + अ = य |
| 9 | प्रत्येक | प्रति + एक | इ + ए = ये |
| 10 | अभ्युदय | अभि + उदय | इ + उ = यु |
| 11 | प्रत्युपकार | प्रति + उपकार | इ + उ = यु |
| 12 | उपर्युक्त | उपरि + उक्त | इ + उ = यु |
| 13 | न्यून | नि + ऊन | इ + ऊ = यू |
| 14 | स्वागत | सु + आगत | उ + आ = वा |
| 15 | मध्वालय | मधु + आलय | उ + आ = वा |
| 16 | वध्वागमन | वधू + आगमन | ऊ + आ = वा |
| 17 | अन्वय | अनु + अय | उ + अ = व |
| 18 | अन्वेषण | अनु + एषण | उ + ए = वे |
| 19 | पित्राज्ञा | पितृ + आज्ञा | ऋ + आ = रा |
| 20 | मात्रानंद | मातृ + आनंद | ऋ + आ = रा |
इन शब्दों के अलग पेज पर नियम और मिलते जुलते शब्द दिए गए हैं: इत्यादि, स्वागत, प्रत्येक, अत्यधिक, अत्याचार, पर्यावरण और अन्वेषण का संधि विच्छेद।
यण संधि का विच्छेद कैसे करें
- शब्द में आधा व्यंजन + य, व या र देखें। जैसे इत्यादि में त्य, स्वागत में स्व, पित्राज्ञा में त्र।
- य दिखे तो आधे व्यंजन के साथ इ लगाएँ (इति), व दिखे तो उ लगाएँ (सु), र दिखे तो ऋ लगाएँ (पितृ)।
- य, व, र के साथ जो मात्रा है, वही दूसरे शब्द का पहला स्वर है। इत्यादि में या है, इसलिए दूसरा शब्द आ से शुरू होगा: आदि।
- दोनों भाग सार्थक हों, यह जाँच लें: इति + आदि।
कठिन शब्दों के अर्थ
संधि विच्छेद याद रखना तब आसान होता है जब दोनों भागों का अर्थ समझ में आए। ऊपर के उदाहरणों के कुछ कठिन शब्दों के अर्थ नीचे दिए गए हैं।
- आदि: वगैरह (इत्यादि यानी इसी तरह के और)
- अक्ष: आँख (प्रत्यक्ष यानी आँखों के सामने)
- ऊन: कम (न्यून यानी कम)
- एषण: खोज (अन्वेषण यानी खोज करना)
- आवरण: ढकने वाली परत (पर्यावरण यानी चारों ओर का घेरा)
- अभ्युदय: उन्नति, उदय
- उपर्युक्त: ऊपर कहा गया
- अर्पण: भेंट करना
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
परीक्षा में प्रश्न प्रायः इस रूप में आता है: अध्ययन का संधि विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए। पूरे अंक पाने के लिए उत्तर में तीन बातें लिखें: शब्द का विच्छेद, स्वरों या वर्णों का मेल, और संधि का पूरा नाम।
आदर्श उत्तर: अध्ययन = अधि + अयन। यहाँ इ + अ = य हुआ है, इसलिए यह यण स्वर संधि है।
अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
नीचे दिए शब्दों का संधि विच्छेद स्वयं करके देखें, फिर उत्तर से मिलाएँ।
- अध्यक्ष उत्तर: अधि + अक्ष (इ + अ = य), यण संधि।
- अत्यंत उत्तर: अति + अंत (इ + अ = य), यण संधि।
- गत्यवरोध उत्तर: गति + अवरोध (इ + अ = य), यण संधि।
- प्रत्याशा उत्तर: प्रति + आशा (इ + आ = या), यण संधि।
- अन्वीक्षण उत्तर: अनु + ईक्षण (उ + ई = वी), यण संधि।
- मात्राज्ञा उत्तर: मातृ + आज्ञा (ऋ + आ = रा), यण संधि।
- अतीव में यण संधि है या दीर्घ? उत्तर: दीर्घ संधि, क्योंकि अति + इव में इ + इ एक ही जाति के स्वर हैं।
याद रखने की ट्रिक
इ से य, उ से व, ऋ से र। इसे ऐसे याद करें: इ, उ, ऋ के बाद कोई दूसरा स्वर आया तो वे अपना रूप बदलकर आधे व्यंजन बन जाते हैं। यण का य, उसके बाद व और र, यही इस संधि की पहचान है।
सामान्य गलतियाँ
- पर्यावरण = परि + वरण गलत है। सही है परि + आवरण।
- इत्यादि = इत् + यादि गलत है। सही है इति + आदि।
- प्रत्येक = प्रत्य + एक गलत है। सही है प्रति + एक।
- त्य, स्व जैसे आधे अक्षर देखकर इसे व्यंजन संधि लिखना गलत है। यहाँ परिवर्तन स्वर का हुआ है, इसलिए यह यण स्वर संधि है।
- यण और अयादि को मिलाना: यण में पहला स्वर इ, उ, ऋ होता है, अयादि में ए, ऐ, ओ, औ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यण संधि के 10 उदाहरण बताइए।
इत्यादि = इति + आदि, अत्यधिक = अति + अधिक, यद्यपि = यदि + अपि, प्रत्येक = प्रति + एक, अभ्युदय = अभि + उदय, पर्यावरण = परि + आवरण, स्वागत = सु + आगत, अन्वय = अनु + अय, अन्वेषण = अनु + एषण, पित्राज्ञा = पितृ + आज्ञा।
यण संधि किसे कहते हैं?
जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
यण संधि का सूत्र क्या है?
इ/ई + भिन्न स्वर = य्, उ/ऊ + भिन्न स्वर = व् और ऋ + भिन्न स्वर = र्। जैसे इ + आ = या, उ + आ = वा, ऋ + आ = रा।
स्वागत में कौन सी संधि है?
स्वागत में यण स्वर संधि है। इसका विच्छेद सु + आगत है, जिसमें उ + आ = वा हुआ है।
पर्यावरण का संधि विच्छेद क्या है?
पर्यावरण का संधि विच्छेद परि + आवरण है। यहाँ इ + आ = या हुआ है, इसलिए यह यण संधि है।