Anupras alankar हिंदी का सबसे सरल और सबसे अधिक पूछा जाने वाला शब्दालंकार है। अनुप्रास शब्द अनु + प्रास से बना है। अनु का अर्थ है बार बार और प्रास का अर्थ है वर्ण का प्रयोग। यानी जहाँ एक ही वर्ण बार बार आए, वहाँ अनुप्रास होता है।
अनुप्रास अलंकार की परिभाषा
Anupras alankar ki paribhasha: जहाँ काव्य में किसी एक वर्ण या वर्णों की बार बार आवृत्ति हो और उससे कविता में संगीत जैसी मधुरता आ जाए, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यह अलंकार के शब्दालंकार भेद में आता है, क्योंकि इसका चमत्कार शब्दों की ध्वनि पर टिका है।
ध्यान रहे, वर्ण की आवृत्ति स्वर के बदलने पर भी मानी जाती है। जैसे क, का, कि, कु, के सब में क व्यंजन दोहराया जा रहा है।
अनुप्रास अलंकार की पहचान
- पंक्ति को धीरे धीरे पढ़िए और देखिए कि कौन सा व्यंजन बार बार सुनाई दे रहा है।
- प्रायः शब्दों का पहला वर्ण एक जैसा होता है, जैसे चारु चंद्र की चंचल किरणें।
- एक ही वर्ण कम से कम दो बार, और प्रायः तीन या अधिक बार आता है।
- यदि उस शब्द की जगह पर्यायवाची रख दें, तो ध्वनि का सौंदर्य चला जाता है।
अनुप्रास अलंकार के भेद
Anupras alankar ke bhed: अधिकतर पुस्तकों में इसके पाँच भेद बताए जाते हैं। कुछ स्कूली पुस्तकें केवल पहले तीन भेद पढ़ाती हैं।
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| छेकानुप्रास | एक या अधिक वर्णों की आवृत्ति केवल एक बार (वर्ण दो बार आए) | बंदउँ गुरु पद पदुम परागा (तुलसीदास) |
| वृत्यनुप्रास | एक वर्ण की अनेक बार आवृत्ति | तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए (भारतेंदु) |
| लाटानुप्रास | शब्द और अर्थ वही रहें, पर अन्वय बदलने से तात्पर्य बदल जाए | पूत सपूत तो क्यों धन संचय, पूत कपूत तो क्यों धन संचय (लोक प्रचलित) |
| अंत्यानुप्रास | पंक्तियों के अंत में एक जैसी तुक | दोहे और चौपाई के चरणों का तुकांत अंत |
| श्रुत्यनुप्रास | एक ही उच्चारण स्थान (जैसे दंत्य) के वर्ण बार बार आएँ | तुलसीदास सीदत निसिदिन देखत तुम्हारि निठुराई (तुलसीदास) |
अनुप्रास अलंकार के उदाहरण
Anupras alankar ke udaharan नीचे दिए गए हैं। हर उदाहरण के नीचे बताया गया है कि कौन सा वर्ण दोहराया गया है।
- तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए। (भारतेंदु हरिश्चंद्र)
त वर्ण छह बार आया है, इसलिए वृत्यनुप्रास है। - चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल थल में। (मैथिलीशरण गुप्त, पंचवटी)
च वर्ण चार बार आया है, जिससे पंक्ति में मधुर ध्वनि बनती है। - मुदित महीपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत्र बोलाए॥ (तुलसीदास)
पहले चरण में म और दूसरे में स वर्ण की आवृत्ति है। - कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। (तुलसीदास)
क और न वर्ण बार बार आए हैं, गहनों की झनकार जैसी ध्वनि बनती है। - बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ (तुलसीदास)
प वर्ण और स वर्ण की आवृत्ति है। पद पदुम में प का दोहराव छेकानुप्रास का उदाहरण माना जाता है। - कबीर कहा गरबियौ, काल गहै कर केस। (कबीर)
क वर्ण पाँच बार आया है, इसलिए अनुप्रास है। - रस सिंगार मंजनु किए, कंजनु भंजनु दैन। अंजनु रंजनु हूँ बिना, खंजनु गंजनु नैन॥ (बिहारी)
न वर्ण और "जनु" ध्वनि बार बार आती है, पूरे दोहे में अनुप्रास की झड़ी है। - उदाहरण: सुंदर सुमन सजे सरोवर के तीर। (स्वरचित उदाहरण)
स वर्ण चार बार आया है। - उदाहरण: चम चम चमकती चाँदनी में चकोर चुपचाप बैठा था। (स्वरचित उदाहरण)
च वर्ण बार बार आया है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है।
अनुप्रास, यमक और श्लेष में अंतर
| अलंकार | क्या दोहराया जाता है | अर्थ |
|---|---|---|
| अनुप्रास | वर्ण (अक्षर) | अर्थ से कोई संबंध नहीं, केवल ध्वनि का सौंदर्य |
| यमक | पूरा शब्द | हर बार अर्थ अलग |
| श्लेष | कुछ नहीं, शब्द एक ही बार आता है | एक शब्द के कई अर्थ |
"यमक अनुप्रास" को लेकर छात्र अक्सर उलझते हैं। यदि पूरा शब्द दोहराया जाए और अर्थ बदल जाए तो यमक है। यदि केवल पहला अक्षर मेल खाए, तो अनुप्रास है। एक ही पंक्ति में दोनों अलंकार साथ भी हो सकते हैं।
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
मान लीजिए प्रश्न है: "तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए" में कौन सा अलंकार है? उत्तर तीन हिस्सों में लिखिए।
- अलंकार का नाम: अनुप्रास अलंकार।
- कारण: इस पंक्ति में त वर्ण की बार बार आवृत्ति हुई है।
- भेद (यदि पूछा जाए): त वर्ण अनेक बार आया है, इसलिए यह वृत्यनुप्रास है।
इस तरह नाम, कारण और दोहराया गया वर्ण लिखने से पूरे अंक मिलते हैं। केवल "अनुप्रास" लिख देने से अक्सर आधे अंक ही मिलते हैं।
अनुप्रास कविता में क्यों प्रिय है
पुराने कवि कविता गाकर सुनाते थे। एक ही वर्ण के बार बार आने से पंक्ति गुनगुनाने में आसान हो जाती है और जल्दी याद हो जाती है। यही कारण है कि दोहा, चौपाई और कवित्त में अनुप्रास बहुत मिलता है। आज के बाल गीतों और विज्ञापन जैसे नारों में भी इसी तरह के ध्वनि खेल दिखते हैं।
याद रखने की ट्रिक
अनुप्रास को "अक्षरों का संगीत" मानकर याद रखिए। पंक्ति को ज़ोर से पढ़िए, जो अक्षर बार बार कानों में बजे, वही अनुप्रास है।
सामान्य गलतियाँ
- केवल एक बार आए वर्ण को अनुप्रास मान लेना। आवृत्ति कम से कम दो बार होनी चाहिए।
- पूरे शब्द के दोहराव को अनुप्रास लिख देना। अलग अर्थ हो तो वह यमक है, एक अर्थ हो तो पुनरुक्ति प्रकाश।
- भेद पूछे जाने पर केवल तीन भेद लिखना, जब प्रश्न में पाँच भेद माँगे गए हों।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ काव्य में एक ही वर्ण की बार बार आवृत्ति से शोभा बढ़े, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यह शब्दालंकार का भेद है। जैसे तरनि तनूजा तट तमाल में त वर्ण बार बार आया है।
अनुप्रास अलंकार के 5 उदाहरण बताइए।
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए, चारु चंद्र की चंचल किरणें, मुदित महीपति मंदिर आए, कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि, और कबीर कहा गरबियौ काल गहै कर केस। इन सब में एक वर्ण बार बार आया है।
अनुप्रास अलंकार के कितने भेद हैं?
अनुप्रास के पाँच भेद माने जाते हैं: छेकानुप्रास, वृत्यनुप्रास, लाटानुप्रास, अंत्यानुप्रास और श्रुत्यनुप्रास। कई स्कूली पुस्तकें केवल पहले तीन भेद पढ़ाती हैं।
चारु चंद्र की चंचल किरणें में कौन सा अलंकार है?
इसमें च वर्ण की आवृत्ति है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है। साथ ही किरणों के खेलने की बात कही गई है, इसलिए इसमें मानवीकरण अलंकार भी है।
अनुप्रास और यमक में क्या अंतर है?
अनुप्रास में केवल वर्ण दोहराया जाता है और उसका अर्थ से संबंध नहीं होता। यमक में पूरा शब्द दोहराया जाता है और हर बार उसका अर्थ अलग होता है।