Avyayibhav samas वह समास है जिसका पहला पद (पूर्वपद) अव्यय होता है और पूरा समस्त पद भी अव्यय बनकर वाक्य में क्रियाविशेषण का काम करता है। इसमें पूर्वपद प्रधान होता है। जैसे: शक्ति के अनुसार = यथाशक्ति, प्रत्येक दिन = प्रतिदिन।
अव्ययीभाव समास की परिभाषा (Avyayibhav samas kise kahate hain)
अव्यय वे शब्द हैं जिनका रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण कभी नहीं बदलता, जैसे प्रति, यथा, आ, भर, बे। जब ऐसा अव्यय किसी संज्ञा या दूसरे शब्द के साथ मिलकर नया शब्द बनाता है और वह नया शब्द भी अव्यय की तरह ही प्रयोग होता है, तो वह अव्ययीभाव समास कहलाता है। "अव्ययीभाव" का अर्थ ही है "जो अव्यय न हो, उसका अव्यय बन जाना"।
छह समासों में अव्ययीभाव अकेला ऐसा समास है जिसमें पूर्वपद प्रधान होता है। बाकी में उत्तरपद, दोनों पद या कोई तीसरा पद प्रधान होता है।
कक्षा 9 और 10 की परीक्षा में प्रायः "निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए" जैसे प्रश्न आते हैं। अव्ययीभाव के शब्द छोटे और आसान होते हैं, इसलिए इनकी पहचान पक्की कर लेने से पूरे अंक आसानी से मिल जाते हैं।
पहचान की ट्रिक
- पहला पद अव्यय: प्रति, यथा, आ, भर, बे, नि, अनु, बा, हर जैसे शब्द शुरू में हों।
- पूरा शब्द क्रियाविशेषण: वाक्य में यह बताए कि काम कैसे, कब या कितना हुआ। जैसे "वह प्रतिदिन पढ़ता है"। (देखें क्रियाविशेषण)
- रूप नहीं बदलता: लड़का हो या लड़की, एक हो या अनेक, यथाशक्ति हमेशा यथाशक्ति ही रहेगा।
- दोहराए गए शब्द: धीरे-धीरे, घर-घर, रातोंरात, हाथोंहाथ जैसे पुनरुक्त शब्द भी अव्ययीभाव समास माने जाते हैं।
मुख्य अव्यय और उनका अर्थ
| अव्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रति | हर, प्रत्येक | प्रतिदिन, प्रतिवर्ष, प्रतिक्षण |
| यथा | के अनुसार, जैसा | यथाशक्ति, यथासंभव, यथाक्रम |
| आ | तक, से लेकर | आजन्म, आमरण, आजीवन |
| भर | पूरा | भरपेट, भरसक |
| बे / नि | बिना | बेखटके, बेशक, निडर |
| अनु | पीछे, के योग्य | अनुरूप, अनुकूल |
इनमें से कई अंश उपसर्ग की तरह भी पढ़ाए जाते हैं। समास के प्रश्न में जब पूरा शब्द अव्यय बनकर आए, तो उत्तर अव्ययीभाव समास ही लिखें।
अव्ययीभाव समास के उदाहरण (Avyayibhav samas ke udaharan)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन |
| यथासंभव | जैसा संभव हो |
| यथाक्रम | क्रम के अनुसार |
| यथासमय | समय के अनुसार |
| प्रतिक्षण | प्रत्येक क्षण |
| आजन्म | जन्म से लेकर |
| आमरण | मरण तक |
| आजीवन | जीवन भर |
| भरपेट | पेट भरकर |
| भरसक | शक्ति भर |
| बेखटके | बिना खटके के |
| बेशक | बिना शक के |
| निडर | बिना डर के |
| अनुरूप | रूप के योग्य |
| धीरे-धीरे | धीरे के बाद धीरे |
| घर-घर | प्रत्येक घर |
| हाथोंहाथ | हाथ ही हाथ में |
| रातोंरात | रात ही रात में |
| दिनोंदिन | दिन के बाद दिन |
अव्ययीभाव समास का विग्रह कैसे करें
अव्ययीभाव समास का विग्रह करते समय अव्यय का अर्थ खोलकर लिखा जाता है। इसके लिए तीन कदम अपनाइए:
- अव्यय पहचानें: यथासमय में "यथा" अव्यय है।
- अव्यय का अर्थ लिखें: यथा का अर्थ है "के अनुसार"।
- दूसरे पद के साथ जोड़ें: समय के अनुसार। उत्तर: अव्ययीभाव समास।
दोहराए गए शब्दों में विग्रह थोड़ा अलग होता है। घर-घर का अर्थ है "प्रत्येक घर", और रातोंरात का अर्थ है "रात ही रात में"। यहाँ कोई अलग अव्यय नहीं दिखता, पर दोहराव से पूरा शब्द अव्यय बन जाता है।
हिंदी, संस्कृत और उर्दू के अव्यय
अव्ययीभाव समास के शब्द तीन स्रोतों से आते हैं। संस्कृत के अव्यय: प्रति, यथा, आ, अनु (प्रतिदिन, यथाशक्ति, आजन्म, अनुरूप)। हिंदी के अव्यय: भर, नि (भरपेट, निडर)। उर्दू-फ़ारसी के अव्यय: बे, बा, हर (बेशक, बखूबी, हररोज़)। स्रोत कोई भी हो, पहचान का नियम एक ही है: पहला पद अव्यय और पूरा शब्द क्रियाविशेषण।
वाक्यों में अव्ययीभाव समास
अव्ययीभाव समास का शब्द वाक्य में प्रायः क्रिया की विशेषता बताता है। नीचे मोटे अक्षरों वाले शब्द देखिए:
- मैं प्रतिदिन सुबह व्यायाम करता हूँ। (कब: हर दिन)
- सबने यथाशक्ति दान दिया। (कितना: अपनी शक्ति के अनुसार)
- मेहमानों ने भरपेट भोजन किया। (कितना: पेट भरकर)
- बच्चे बेखटके मैदान में खेलते रहे। (कैसे: बिना डर के)
- मेले की टिकटें हाथोंहाथ बिक गईं। (कैसे: बहुत जल्दी)
- पौधा धीरे-धीरे बड़ा हुआ। (कैसे: धीमी गति से)
हर वाक्य में शब्द यह बता रहा है कि काम कब, कैसे या कितना हुआ। यही अव्ययीभाव की सबसे पक्की पहचान है।
अव्ययीभाव और द्वंद्व में अंतर
दोनों में कई बार योजक चिह्न (-) दिखता है, इसलिए भ्रम होता है।
| अव्ययीभाव | द्वंद्व |
|---|---|
| एक ही शब्द दोहराया जाता है: घर-घर, धीरे-धीरे। | दो अलग शब्द जुड़ते हैं: माता-पिता, दिन-रात। |
| पूरा पद क्रियाविशेषण की तरह काम करता है। | पद प्रायः संज्ञा या विशेषण की तरह काम करता है। |
| पूर्वपद प्रधान। | दोनों पद प्रधान। |
और अधिक जानने के लिए द्वंद्व समास का पेज देखें।
सामान्य गलतियाँ
- प्रत्येक को केवल विशेषण मानना: समास के प्रश्न में प्रत्येक (एक-एक) को भी अव्ययीभाव में रखा जाता है।
- धीरे-धीरे को द्वंद्व लिखना: इसमें एक ही शब्द दोहराया गया है, इसलिए यह अव्ययीभाव है।
- विग्रह में अव्यय छोड़ देना: प्रतिदिन का विग्रह "दिन" नहीं, "प्रत्येक दिन" है।
याद रखने की ट्रिक
"प्रति, यथा, आ, भर, बे: शुरू में हों तो अव्ययीभाव"। साथ ही दोहराए गए शब्द (घर-घर, रातोंरात) भी इसी समास में आते हैं। सभी छह भेद एक साथ समझने के लिए समास का मुख्य पेज पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं?
जिस समास का पहला पद अव्यय हो और पूरा समस्त पद भी अव्यय बनकर क्रियाविशेषण का काम करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इसमें पूर्वपद प्रधान होता है। जैसे यथाशक्ति और प्रतिदिन।
अव्ययीभाव समास के 10 उदाहरण बताइए।
यथाशक्ति, प्रतिदिन, यथासंभव, आजन्म, आमरण, भरपेट, बेखटके, निडर, धीरे-धीरे और हाथोंहाथ अव्ययीभाव समास के उदाहरण हैं। इनके विग्रह ऊपर की तालिका में दिए गए हैं।
अव्ययीभाव समास की पहचान कैसे करें?
यदि समस्त पद के शुरू में प्रति, यथा, आ, भर, बे जैसा अव्यय हो, या एक ही शब्द दोहराया गया हो, और पूरा पद वाक्य में क्रियाविशेषण का काम करे, तो वह अव्ययीभाव समास है।
प्रतिदिन में कौन सा समास है?
प्रतिदिन में अव्ययीभाव समास है। इसका विग्रह है: प्रत्येक दिन। यहाँ पहला पद प्रति अव्यय है और पूरा शब्द वाक्य में बताता है कि काम कब होता है।
अव्ययीभाव समास में कौन सा पद प्रधान होता है?
अव्ययीभाव समास में पूर्वपद (पहला पद) प्रधान होता है, जो अव्यय होता है। छह समासों में यह अकेला समास है जिसमें पहला पद प्रधान माना जाता है।