Sandhi kise kahate hain: दो वर्णों के पास पास आने से उनमें जो मेल या परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि का अर्थ है मेल या जोड़। जैसे विद्या + आलय = विद्यालय। यहाँ विद्या का अंतिम आ और आलय का पहला आ मिलकर एक आ बन गए। इस पेज पर sandhi in hindi की परिभाषा, संधि के भेद, उदाहरण और sandhi vichchhed करने का आसान तरीका दिया गया है।
संधि की परिभाषा (Sandhi ki paribhasha)
परिभाषा: जब दो शब्द पास पास आते हैं, तब पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द का पहला वर्ण मिलकर बदल जाते हैं। वर्णों के इस मेल से होने वाले परिवर्तन को संधि कहते हैं।
ध्यान दें कि संधि वर्णों का मेल है, शब्दों का नहीं। शब्दों के मेल को समास कहते हैं। संधि में केवल जोड़ की जगह पर ध्वनि बदलती है, बाकी शब्द वैसा ही रहता है।
- हिम + आलय = हिमालय (अ + आ = आ)
- सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ = ओ)
- सत् + जन = सज्जन (त् + ज = ज्ज)
- मनः + हर = मनोहर (अः + ह = ओ)
संधि विच्छेद किसे कहते हैं (Sandhi vichchhed)
संधि से बने शब्द को फिर से उसके मूल शब्दों में अलग करना संधि विच्छेद कहलाता है। विच्छेद का अर्थ है अलग करना। जैसे विद्यालय का संधि विच्छेद है विद्या + आलय। परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है: किसी शब्द का संधि विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए। कई लोग इसे sandhi viched भी लिखते हैं, अर्थ एक ही है।
संधि के कितने भेद होते हैं (Sandhi ke bhed)
संधि के तीन भेद होते हैं। यह बँटवारा इस बात पर होता है कि मेल किन वर्णों का हुआ है।
| भेद | किसका मेल | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वर संधि | स्वर + स्वर | विद्या + आलय = विद्यालय |
| व्यंजन संधि | व्यंजन + व्यंजन या व्यंजन + स्वर | सत् + आचार = सदाचार |
| विसर्ग संधि | विसर्ग (ः) + स्वर या व्यंजन | निः + धन = निर्धन |
1. स्वर संधि
दो स्वरों के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। स्वर संधि के पाँच भेद हैं। हर भेद का अपना पेज है, जहाँ पूरे नियम और 15 से अधिक उदाहरण दिए गए हैं।
| स्वर संधि का भेद | मुख्य नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ संधि | अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ | हिम + आलय = हिमालय |
| गुण संधि | अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर् | पर + उपकार = परोपकार |
| वृद्धि संधि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ, अ/आ + ओ/औ = औ | सदा + एव = सदैव |
| यण संधि | इ/ई + भिन्न स्वर = य्, उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्, ऋ + भिन्न स्वर = र् | इति + आदि = इत्यादि |
| अयादि संधि | ए = अय्, ऐ = आय्, ओ = अव्, औ = आव् | ने + अन = नयन |
2. व्यंजन संधि
व्यंजन का व्यंजन से या व्यंजन का स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जैसे उत् + लास = उल्लास, सत् + जन = सज्जन, सम् + तोष = संतोष।
3. विसर्ग संधि
विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे मनः + हर = मनोहर, निः + आशा = निराशा, नमः + ते = नमस्ते।
संधि के उदाहरण (Sandhi ke udaharan)
नीचे परीक्षा में बार बार पूछे जाने वाले शब्दों का संधि विच्छेद और संधि का नाम दिया गया है।
| शब्द | संधि विच्छेद | संधि का नाम |
|---|---|---|
| विद्यालय | विद्या + आलय | दीर्घ संधि |
| विद्यार्थी | विद्या + अर्थी | दीर्घ संधि |
| परीक्षा | परि + ईक्षा | दीर्घ संधि |
| सूर्योदय | सूर्य + उदय | गुण संधि |
| महोत्सव | महा + उत्सव | गुण संधि |
| महर्षि | महा + ऋषि | गुण संधि |
| सदैव | सदा + एव | वृद्धि संधि |
| वनौषधि | वन + ओषधि | वृद्धि संधि |
| प्रत्येक | प्रति + एक | यण संधि |
| स्वागत | सु + आगत | यण संधि |
| पवन | पो + अन | अयादि संधि |
| नायक | नै + अक | अयादि संधि |
| उज्ज्वल | उत् + ज्वल | व्यंजन संधि |
| संसार | सम् + सार | व्यंजन संधि |
| निर्धन | निः + धन | विसर्ग संधि |
| निश्चल | निः + चल | विसर्ग संधि |
हर संधि के भेद वाले पेज पर इन शब्दों के नियम विस्तार से समझाए गए हैं और हर शब्द के अलग पेज का लिंक भी दिया गया है।
संधि विच्छेद कैसे करें: आसान तरीका
संधि विच्छेद करते समय इन चार चरणों का पालन करें। अभ्यास से यह काम बहुत जल्दी होने लगता है।
- जोड़ की जगह खोजें: शब्द में वह स्थान पहचानें जहाँ दो शब्द मिले हैं। जैसे महोत्सव में महा और उत्सव।
- बदले हुए वर्ण को पहचानें: देखें कि जोड़ पर कौन सा वर्ण बना है। महोत्सव में जोड़ पर ओ बना है।
- नियम उल्टा लगाएँ: सोचें कि यह वर्ण किन दो वर्णों से बनता है। ओ बनता है अ/आ + उ/ऊ से। यहाँ महा का आ और उत्सव का उ है।
- दोनों शब्द सार्थक हों: विच्छेद के बाद दोनों भाग सही और सार्थक शब्द होने चाहिए। महा + उत्सव, दोनों सार्थक हैं, इसलिए विच्छेद सही है।
एक और उदाहरण: निर्धन शब्द लें। जोड़ पर र् दिख रहा है और दूसरा भाग धन है। र् अक्सर विसर्ग से बनता है, इसलिए निर्धन = निः + धन। यह विसर्ग संधि है।
याद रखने की ट्रिक
- दीर्घ: एक जैसे स्वर मिलें तो बड़ा (दीर्घ) स्वर बनता है।
- गुण: अ/आ के बाद इ, उ, ऋ आए तो ए, ओ, अर् बनते हैं।
- वृद्धि: अ/आ के बाद ए, ओ आए तो ऐ, औ बनते हैं।
- यण: शब्द में य्, व्, र् का आधा रूप दिखे (त्य, स्व, त्र) तो पहले यण संधि सोचें।
- अयादि: अय, आय, अव, आव दिखे (नयन, गायक, पवन, पावक) तो अयादि संधि।
सामान्य गलतियाँ
- विद्यार्थी का विच्छेद विद्या + आर्थी लिखना गलत है। सही है विद्या + अर्थी।
- परीक्षा को परी + क्षा लिखना गलत है। सही है परि + ईक्षा।
- संधि और समास को एक समझना गलत है। संधि में वर्ण मिलते हैं, समास में शब्द। जैसे राजपुत्र में समास है, संधि नहीं।
- संधि विच्छेद में + चिह्न लगाएँ, समास विग्रह में नहीं। जैसे विद्यालय = विद्या + आलय।
कुछ किताबें संस्कृत की तरह स्वर संधि के और भेद (जैसे पूर्वरूप, प्रकृतिभाव) भी बताती हैं, पर स्कूल की हिंदी में ऊपर दिए पाँच भेद ही पढ़ाए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संधि के कितने भेद होते हैं?
संधि के तीन भेद होते हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि के आगे पाँच भेद हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि।
संधि विच्छेद किसे कहते हैं?
संधि से बने शब्द को उसके मूल शब्दों में अलग करना संधि विच्छेद कहलाता है। जैसे विद्यालय = विद्या + आलय और सूर्योदय = सूर्य + उदय।
संधि की परिभाषा क्या है?
दो वर्णों के पास पास आने से उनमें जो मेल या परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि का शाब्दिक अर्थ है मेल या जोड़।
संधि के 10 उदाहरण क्या हैं?
हिमालय = हिम + आलय, परीक्षा = परि + ईक्षा, परोपकार = पर + उपकार, सदैव = सदा + एव, इत्यादि = इति + आदि, नयन = ने + अन, सज्जन = सत् + जन, उल्लास = उत् + लास, मनोहर = मनः + हर, निराशा = निः + आशा।
संधि और समास में क्या अंतर है?
संधि में दो वर्णों का मेल होता है और जोड़ पर ध्वनि बदलती है। समास में दो या अधिक शब्दों का मेल होता है और बीच के कारक चिह्न हट जाते हैं। संधि तोड़ने को विच्छेद और समास तोड़ने को विग्रह कहते हैं।