Atishyokti alankar का नाम दो शब्दों से बना है: अतिशय + उक्ति। अतिशय का अर्थ है बहुत अधिक और उक्ति का अर्थ है कथन। यानी जहाँ बात को बहुत अधिक बढ़ा चढ़ाकर कहा जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। रोज़ की बोलचाल में "मैंने तुम्हें सौ बार बुलाया" कहना भी छोटी सी अतिशयोक्ति ही है।
अतिशयोक्ति अलंकार की परिभाषा
Atishyokti alankar ki paribhasha: जहाँ किसी वस्तु, व्यक्ति, गुण या घटना का वर्णन इतना बढ़ा चढ़ाकर किया जाए कि वह लोक की सीमा, यानी सामान्य संभावना से बाहर चला जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। यह अलंकार के अर्थालंकार भेद में आता है।
अतिशयोक्ति अलंकार की पहचान
- बात असंभव या लगभग असंभव लगती है, फिर भी उससे भाव गहरा हो जाता है।
- प्रायः "इतना ... कि" वाली बनावट होती है, जैसे इतना रोया कि नदी बह चली।
- मनु, मानो जैसे संभावना वाले शब्द नहीं होते। कवि बात को सच की तरह कहता है।
- सुंदरता, वीरता, विरह, दान या दुख का बहुत बड़ा चित्र खींचा जाता है।
अतिशयोक्ति अलंकार के उदाहरण
Atishyokti alankar ke udaharan अर्थ सहित नीचे दिए गए हैं।
- इत आवति चलि जात उत, चली छसातक हाथ। चढ़ी हिंडोरैं सैं रहै, लगी उसासनु साथ॥ (बिहारी)
विरह में नायिका इतनी दुबली हो गई है कि साँस लेने छोड़ने से ही वह छह सात हाथ आगे पीछे हो जाती है, मानो झूले पर बैठी हो। यह असंभव बात है, इसलिए अतिशयोक्ति है। - पत्रा ही तिथि पाइयै, वा घर कैं चहुँ पास। नित प्रति पून्यौ ई रहै, आनन-ओप उजास॥ (बिहारी)
नायिका के मुख की चमक से उसके घर के आसपास हर दिन पूर्णिमा जैसा उजाला रहता है, इसलिए तिथि जानने के लिए पंचांग देखना पड़ता है। - पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए। (नरोत्तमदास, सुदामा चरित)
मित्र की दीन दशा देखकर इतने आँसू बहे कि परात के पानी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, आँसुओं से ही पैर धुल गए। - उदाहरण: धावक इतना तेज दौड़ा कि हवा भी पीछे छूट गई। (स्वरचित उदाहरण)
हवा से तेज दौड़ना असंभव है, इसलिए अतिशयोक्ति है। - उदाहरण: बिटिया की विदाई पर माँ इतना रोई कि आँगन में नदी बह चली। (स्वरचित उदाहरण)
आँसुओं से नदी बहना लोक की सीमा से बाहर की बात है। - उदाहरण: धूप इतनी तेज थी कि पेड़ों की छाया भी छाया ढूँढ रही थी। (स्वरचित उदाहरण)
गर्मी को बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहा गया है। - उदाहरण: उसकी आवाज़ इतनी ऊँची थी कि आकाश के तारे काँप उठे। (स्वरचित उदाहरण)
आवाज़ से तारों का काँपना असंभव है, इसलिए अतिशयोक्ति है। - उदाहरण: किसान के खेत में इतना अनाज हुआ कि गाँव के कोठार छोटे पड़ गए। (स्वरचित उदाहरण)
फसल की अधिकता को सीमा से बढ़ाकर बताया गया है।
अतिशयोक्ति अलंकार के भेद
बड़ी कक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में अतिशयोक्ति के कई भेद पढ़ाए जाते हैं। स्कूली परीक्षा में प्रायः केवल पहचान पूछी जाती है।
| भेद | सरल पहचान |
|---|---|
| रूपकातिशयोक्ति | केवल उपमान कहा जाए, उपमेय छिपा रहे |
| भेदकातिशयोक्ति | "और ही", "निराला" कहकर वस्तु को सबसे अलग बताना |
| संबंधातिशयोक्ति | जहाँ संबंध न हो वहाँ संबंध दिखाना |
| असंबंधातिशयोक्ति | जहाँ संबंध हो वहाँ संबंध न दिखाना |
| अक्रमातिशयोक्ति | कारण और कार्य एक साथ हो जाएँ |
| चपलातिशयोक्ति | कारण के आते ही कार्य हो जाए |
| अत्यंतातिशयोक्ति | कार्य कारण से पहले ही हो जाए |
अतिशयोक्ति और उत्प्रेक्षा में अंतर
| आधार | अतिशयोक्ति | उत्प्रेक्षा |
|---|---|---|
| मूल भाव | बात को सीमा से बहुत बढ़ाना | उपमेय में उपमान की संभावना |
| वाचक शब्द | नहीं होते, बात सच की तरह कही जाती है | मनु, मानो, जनु, जानो |
| उदाहरण | इतना रोई कि आँगन में नदी बह चली। | आँसू ऐसे बहे मानो नदी बह चली हो। |
दोनों में कल्पना है, पर उत्प्रेक्षा "मानो" कहकर रुक जाती है, जबकि अतिशयोक्ति असंभव बात को सीधे घटित होते दिखा देती है।
अतिशयोक्ति और रस
अतिशयोक्ति का प्रयोग प्रायः वीर रस में वीरता दिखाने के लिए और श्रृंगार रस में सुंदरता या विरह दिखाने के लिए होता है। बिहारी के ऊपर दिए दोनों दोहे श्रृंगार रस के हैं।
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए" में कौन सा अलंकार है?
आदर्श उत्तर: इसमें अतिशयोक्ति अलंकार है, क्योंकि आँसुओं से पैर धो देना लोक की सीमा से बाहर की बात है। कवि ने मित्र के प्रति प्रेम और करुणा को बहुत बढ़ा चढ़ाकर दिखाया है।
रोज़ की बोलचाल में अतिशयोक्ति
हम रोज़ अतिशयोक्ति बोलते हैं: "भूख से जान निकल रही है", "मैंने हज़ार बार समझाया", "इतनी ठंड है कि खून जम गया"। इनमें कोई झूठ बोलने का इरादा नहीं होता, केवल भाव को गहरा करने का प्रयास होता है। कविता में भी अतिशयोक्ति का यही काम है: पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ना।
याद रखने की ट्रिक
"इतना ... कि ... असंभव", यही अतिशयोक्ति का सूत्र है। पंक्ति पढ़कर पूछिए: क्या ऐसा सच में हो सकता है? यदि उत्तर "नहीं, यह तो बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहा गया है" हो, और मानो जैसा शब्द न हो, तो अतिशयोक्ति है।
सामान्य गलतियाँ
- हर सुंदर वर्णन को अतिशयोक्ति मान लेना। बात असंभव या असामान्य स्तर तक बढ़ी हो, तभी अतिशयोक्ति है।
- "मानो" वाली पंक्ति को अतिशयोक्ति लिखना। मानो हो तो पहले उत्प्रेक्षा देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ किसी बात का वर्णन लोक की सीमा से बहुत बढ़ा चढ़ाकर किया जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। अतिशय का अर्थ है बहुत अधिक और उक्ति का अर्थ है कथन। यह अर्थालंकार है।
अतिशयोक्ति अलंकार के उदाहरण बताइए।
बिहारी का इत आवति चलि जात उत, पत्रा ही तिथि पाइयै और नरोत्तमदास का पानी परात को हाथ छुयो नहिं प्रसिद्ध उदाहरण हैं। धावक इतना तेज दौड़ा कि हवा भी पीछे छूट गई, यह सरल उदाहरण है।
अतिशयोक्ति अलंकार की पहचान कैसे करें?
जहाँ बात असंभव या लगभग असंभव स्तर तक बढ़ा दी जाए, वहाँ अतिशयोक्ति होती है। प्रायः इतना ... कि वाली बनावट होती है और मानो जैसे वाचक शब्द नहीं होते।
पानी परात को हाथ छुयो नहिं में कौन सा अलंकार है?
इसमें अतिशयोक्ति अलंकार है। आँसुओं से ही पैर धो देना असंभव बात है, जिसे कवि ने प्रेम और करुणा दिखाने के लिए बढ़ा चढ़ाकर कहा है।
अतिशयोक्ति और उत्प्रेक्षा में क्या अंतर है?
उत्प्रेक्षा में मनु, मानो जैसे शब्दों से केवल संभावना जताई जाती है। अतिशयोक्ति में असंभव बात को सीधे सच की तरह कह दिया जाता है।