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कारक (Karak): परिभाषा, 8 भेद, विभक्ति चिह्न और उदाहरण

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया या दूसरे शब्दों से पता चले, उसे कारक कहते हैं। कारक के 8 भेद हैं और ने, को, से, का, में, पर इसके विभक्ति चिह्न हैं।

  • शब्द और व्याकरण
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Karak kise kahate hain: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया या दूसरे शब्दों के साथ पता चलता है, उसे कारक कहते हैं। "कारक" का अर्थ है "करने वाला" या "क्रिया को पूरा करने में सहायक"। कारक को बताने वाले छोटे शब्द, जैसे ने, को, से, का, में, पर, विभक्ति चिह्न या परसर्ग कहलाते हैं।

इस पाठ में कारक की परिभाषा, कारक के 8 भेद, विभक्ति चिह्नों की तालिका, हर कारक के उदाहरण और परीक्षा में होने वाले भ्रम दूर करने की ट्रिक दी गई हैं।

कारक की परिभाषा

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया या किसी अन्य शब्द से जाना जाए, उसे कारक कहते हैं।

उदाहरण: "माँ ने रसोई में बच्चों के लिए चाकू से फल काटे।" इस वाक्य में "माँ ने" (काटने वाली), "रसोई में" (कहाँ), "बच्चों के लिए" (किसके लिए), "चाकू से" (किसकी सहायता से), "फल" (क्या काटे): हर शब्द का क्रिया "काटे" से अलग संबंध है। यही संबंध कारक है।

कारक के भेद और विभक्ति चिह्न

हिंदी में कारक के 8 भेद होते हैं। नीचे की तालिका सबसे महत्वपूर्ण है, इसे याद कर लीजिए।

क्रमकारकविभक्ति चिह्न (परसर्ग)पहचान का प्रश्नउदाहरण
1कर्ता कारकने, शून्य (कोई चिह्न नहीं)काम किसने कियाअमन ने पत्र लिखा।
2कर्म कारकको, शून्यकिसे या क्यामाँ ने बच्चे को सुलाया।
3करण कारकसे, के द्वाराकिसके द्वारा, किस साधन सेवह कलम से लिखता है।
4संप्रदान कारकको, के लिएकिसके लिए, किसको दियापिताजी मेरे लिए साइकिल लाए।
5अपादान कारकसे (अलग होने के अर्थ में)किससे अलग हुआपेड़ से पत्ता गिरा।
6संबंध कारकका, के, की, रा, रे, री, ना, ने, नीकिसका, किसकीयह नेहा की किताब है।
7अधिकरण कारकमें, परकहाँ, किसमें, किस परचिड़िया पेड़ पर बैठी है।
8संबोधन कारकहे, अरे, ओ, अजीकिसे पुकाराअरे बच्चो, इधर आओ।

ध्यान दें: कुछ व्याकरणाचार्य संबंध और संबोधन को पूरा कारक नहीं मानते, क्योंकि इनका सीधा संबंध क्रिया से नहीं होता। फिर भी स्कूली किताबों में कारक के 8 भेद ही पढ़ाए जाते हैं।

सभी 8 कारक: उदाहरण सहित

1. कर्ता कारक

जो क्रिया को करता है, उसे कर्ता कारक कहते हैं। इसका चिह्न "ने" है, पर यह केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है। बाकी जगह कर्ता के साथ कोई चिह्न नहीं आता।

  • नेहा ने गाना गाया। (ने के साथ)
  • बच्चे खेल रहे हैं। (बिना चिह्न के)

2. कर्म कारक

जिस पर क्रिया का फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। चिह्न "को" है, पर निर्जीव कर्म के साथ प्रायः चिह्न नहीं लगता।

  • शिक्षक ने छात्रों को पढ़ाया।
  • तन्वी ने किताब पढ़ी। (बिना चिह्न के)

3. करण कारक

जिस साधन या माध्यम से क्रिया होती है, उसे करण कारक कहते हैं। चिह्न "से" और "के द्वारा" हैं।

  • हम आँखों से देखते हैं।
  • यह पत्र डाक के द्वारा आया।

4. संप्रदान कारक

जिसके लिए कुछ किया जाए या जिसे कुछ दिया जाए, उसे संप्रदान कारक कहते हैं। चिह्न "को" और "के लिए" हैं।

  • दादी ने गरीबों को कंबल दिए।
  • माँ ने मेरे लिए खीर बनाई।

5. अपादान कारक

जिससे किसी वस्तु के अलग होने, निकलने, डरने, सीखने या तुलना का भाव हो, उसे अपादान कारक कहते हैं। चिह्न "से" है।

  • हिमालय से अनेक नदियाँ निकलती हैं।
  • बच्चा कुत्ते से डरता है।
  • अमन नेहा से लंबा है।

6. संबंध कारक

जिससे एक संज्ञा या सर्वनाम का दूसरी संज्ञा से संबंध पता चले, उसे संबंध कारक कहते हैं। चिह्न का, के, की हैं, और सर्वनाम के साथ रा, रे, री (मेरा, तेरी) या ना, ने, नी (अपना, अपनी) आते हैं।

  • यह आरव का घर है।
  • मेरी बहन डॉक्टर है।

7. अधिकरण कारक

जिससे क्रिया के आधार, यानी स्थान या समय का बोध हो, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। चिह्न "में" और "पर" हैं।

  • मछली पानी में रहती है।
  • किताब मेज़ पर रखी है।

8. संबोधन कारक

जिससे किसी को पुकारा या बुलाया जाए, उसे संबोधन कारक कहते हैं। इसके चिह्न हे, अरे, ओ, अजी हैं, और लिखते समय संबोधन के बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न लगाया जाता है।

  • अरे नेहा, ज़रा इधर आना।
  • हे मित्र, मेरी बात ध्यान से सुनो।

करण और अपादान में अंतर (दोनों में "से")

करण कारकअपादान कारक
"से" का अर्थ है साधन या सहायता"से" का अर्थ है अलग होना
वह चाकू से सेब काटता है।पेड़ से सेब गिरा।
हम कान से सुनते हैं।वह गाँव से आया है।

कर्म और संप्रदान में अंतर (दोनों में "को")

कर्म कारकसंप्रदान कारक
क्रिया का फल जिस पर पड़ेजिसके लिए कुछ किया जाए या दिया जाए
पुलिस ने चोर को पकड़ा।पिताजी ने भिखारी को भोजन दिया।
माँ ने बच्चे को नहलाया।माँ ने बच्चे को खिलौना दिया।

याद रखने की ट्रिक

आठों कारक क्रम से याद करने के लिए इस पंक्ति को बोलिए: "कर्ता कर्म करण संप्रदान, अपादान संबंध अधिकरण संबोधन", और चिह्न क्रम से: "ने, को, से, को के लिए, से, का के की, में पर, हे अरे"।

  • "से" के बाद "की सहायता से" जोड़ सकें तो करण, "से अलग" जोड़ सकें तो अपादान।
  • "को" के साथ "देना" या "के लिए" का भाव हो तो संप्रदान, वरना कर्म।

सामान्य गलतियाँ

  • "मैं ने" लिखना: सर्वनाम के साथ चिह्न जोड़कर लिखते हैं: मैंने, उसने, तुमको। संज्ञा के साथ अलग लिखते हैं: लड़के ने, नेहा को।
  • हर वाक्य में "ने" लगाना: "मैंने जाना है" गलत है, सही है "मुझे जाना है"। अकर्मक क्रिया (जाना, आना, सोना) के साथ "ने" नहीं लगता। देखें अकर्मक क्रिया।
  • बहुवचन रूप भूलना: कारक चिह्न लगने पर बहुवचन में "ओं" लगता है: लड़कों ने, बिल्लियों को। इसके नियम वचन पाठ में हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कारक किसे कहते हैं?

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की क्रिया या दूसरे शब्दों से पता चले, उसे कारक कहते हैं। जैसे "माँ ने रसोई में खाना बनाया" में माँ ने और रसोई में कारक हैं।

कारक के कितने भेद होते हैं?

हिंदी में कारक के 8 भेद होते हैं: कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन। कुछ व्याकरणाचार्य संबंध और संबोधन को पूरा कारक नहीं मानते, पर स्कूली किताबों में 8 भेद ही पढ़ाए जाते हैं।

कारक के विभक्ति चिह्न कौन-से हैं?

कर्ता का ने, कर्म का को, करण का से या के द्वारा, संप्रदान का को या के लिए, अपादान का से, संबंध का का के की, अधिकरण का में पर और संबोधन का हे अरे ओ। इन चिह्नों को परसर्ग भी कहते हैं।

करण और अपादान कारक में क्या अंतर है?

दोनों का चिह्न "से" है। करण में से का अर्थ साधन या सहायता है, जैसे "कलम से लिखा"। अपादान में से का अर्थ अलग होना, निकलना या डरना है, जैसे "पेड़ से पत्ता गिरा"।

कर्ता कारक में ने कब लगता है?

कर्ता के साथ "ने" तब लगता है जब क्रिया सकर्मक हो और वाक्य भूतकाल में हो, जैसे "नेहा ने खाना खाया"। अकर्मक क्रिया और वर्तमान या भविष्य काल में ने नहीं लगता, जैसे "नेहा सो गई", "नेहा खाना खाती है"।