Gun sandhi (गुण संधि) स्वर संधि का दूसरा भेद है। इसमें अ या आ के बाद इ/ई, उ/ऊ या ऋ आने पर नया स्वर ए, ओ या अर् बन जाता है। जैसे सूर्य + उदय = सूर्योदय। नीचे नियम तालिका और 20 gun sandhi ke udaharan संधि विच्छेद सहित दिए गए हैं।
गुण संधि किसे कहते हैं (Gun sandhi kise kahate hain)
परिभाषा: यदि अ या आ के बाद इ या ई आए तो दोनों मिलकर ए हो जाते हैं, उ या ऊ आए तो ओ हो जाते हैं, और ऋ आए तो अर् हो जाते हैं। इसे गुण संधि कहते हैं।
ध्यान दें कि गुण संधि में पहला स्वर हमेशा अ या आ होता है, और दूसरा स्वर इ, उ या ऋ परिवार का होता है।
गुण संधि के नियम
| नियम | स्वरों का मेल | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | अ + इ = ए | नर + इंद्र = नरेंद्र |
| 2 | अ + ई = ए | नर + ईश = नरेश |
| 3 | आ + इ = ए | महा + इंद्र = महेंद्र |
| 4 | आ + ई = ए | राका + ईश = राकेश |
| 5 | अ + उ = ओ | सूर्य + उदय = सूर्योदय |
| 6 | अ + ऊ = ओ | जल + ऊर्मि = जलोर्मि |
| 7 | आ + उ = ओ | महा + उत्सव = महोत्सव |
| 8 | आ + ऊ = ओ | महा + ऊर्मि = महोर्मि |
| 9 | अ + ऋ = अर् | सप्त + ऋषि = सप्तर्षि |
| 10 | आ + ऋ = अर् | महा + ऋषि = महर्षि |
अर् वाले शब्दों में र् ऊपर रेफ (र्) के रूप में लिखा जाता है, जैसे महर्षि में र्षि।
गुण संधि के उदाहरण (Gun sandhi ke udaharan)
| क्रम | शब्द | संधि विच्छेद | स्वरों का मेल |
|---|---|---|---|
| 1 | नरेंद्र | नर + इंद्र | अ + इ = ए |
| 2 | गजेंद्र | गज + इंद्र | अ + इ = ए |
| 3 | महेंद्र | महा + इंद्र | आ + इ = ए |
| 4 | राजेंद्र | राजा + इंद्र | आ + इ = ए |
| 5 | नरेश | नर + ईश | अ + ई = ए |
| 6 | सर्वेक्षण | सर्व + ईक्षण | अ + ई = ए |
| 7 | राकेश | राका + ईश | आ + ई = ए |
| 8 | सूर्योदय | सूर्य + उदय | अ + उ = ओ |
| 9 | परोपकार | पर + उपकार | अ + उ = ओ |
| 10 | वीरोचित | वीर + उचित | अ + उ = ओ |
| 11 | हितोपदेश | हित + उपदेश | अ + उ = ओ |
| 12 | सर्वोत्तम | सर्व + उत्तम | अ + उ = ओ |
| 13 | ज्ञानोदय | ज्ञान + उदय | अ + उ = ओ |
| 14 | महोत्सव | महा + उत्सव | आ + उ = ओ |
| 15 | यथोचित | यथा + उचित | आ + उ = ओ |
| 16 | जलोर्मि | जल + ऊर्मि | अ + ऊ = ओ |
| 17 | महोर्मि | महा + ऊर्मि | आ + ऊ = ओ |
| 18 | सप्तर्षि | सप्त + ऋषि | अ + ऋ = अर् |
| 19 | राजर्षि | राज + ऋषि | अ + ऋ = अर् |
| 20 | महर्षि | महा + ऋषि | आ + ऋ = अर् |
राजेंद्र का विच्छेद ज़्यादातर स्कूल की किताबों में राजा + इंद्र दिया गया है। कुछ किताबें राज + इंद्र भी लिखती हैं। दोनों में संधि गुण ही रहती है।
इन शब्दों के अलग पेज पर नियम और मिलते जुलते शब्द देखें: सूर्योदय का संधि विच्छेद, परोपकार का संधि विच्छेद, महोत्सव का संधि विच्छेद, नरेंद्र का संधि विच्छेद, राजेंद्र का संधि विच्छेद और वीरोचित का संधि विच्छेद।
गुण संधि का विच्छेद कैसे करें
- जोड़ पर े (ए की मात्रा) हो तो विच्छेद में पहले शब्द के अंत में अ/आ और दूसरे शब्द के आरंभ में इ/ई लिखें। जैसे नरेश = नर + ईश।
- जोड़ पर ो (ओ की मात्रा) हो तो अ/आ + उ/ऊ लिखें। जैसे यथोचित = यथा + उचित।
- जोड़ पर रेफ (र्) हो और दूसरा शब्द ऋ से बनता हो तो अ/आ + ऋ लिखें। जैसे सप्तर्षि = सप्त + ऋषि।
- अंत में जाँचें कि दोनों भाग सार्थक शब्द हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ
संधि विच्छेद याद रखना तब आसान होता है जब दोनों भागों का अर्थ समझ में आए। ऊपर के उदाहरणों के कुछ कठिन शब्दों के अर्थ नीचे दिए गए हैं।
- ईश: स्वामी (नरेश यानी मनुष्यों का स्वामी, राजा)
- इंद्र: यहाँ अर्थ है श्रेष्ठ या राजा (गजेंद्र यानी हाथियों में श्रेष्ठ)
- राका: पूर्णिमा की रात (राकेश यानी चंद्रमा)
- ईक्षण: देखना (सर्वेक्षण यानी सब ओर से जाँच)
- ऊर्मि: लहर (जलोर्मि यानी पानी की लहर)
- उचित: ठीक, योग्य (यथोचित यानी जैसा उचित हो)
- सप्तर्षि: आकाश में सात तारों का समूह
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
परीक्षा में प्रश्न प्रायः इस रूप में आता है: चंद्रोदय का संधि विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए। पूरे अंक पाने के लिए उत्तर में तीन बातें लिखें: शब्द का विच्छेद, स्वरों या वर्णों का मेल, और संधि का पूरा नाम।
आदर्श उत्तर: चंद्रोदय = चंद्र + उदय। यहाँ अ + उ = ओ हुआ है, इसलिए यह गुण स्वर संधि है।
अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
नीचे दिए शब्दों का संधि विच्छेद स्वयं करके देखें, फिर उत्तर से मिलाएँ।
- स्वेच्छा उत्तर: स्व + इच्छा (अ + इ = ए), गुण संधि।
- प्रश्नोत्तर उत्तर: प्रश्न + उत्तर (अ + उ = ओ), गुण संधि।
- लोकोक्ति उत्तर: लोक + उक्ति (अ + उ = ओ), गुण संधि।
- नवोदय उत्तर: नव + उदय (अ + उ = ओ), गुण संधि।
- ग्रीष्मर्तु उत्तर: ग्रीष्म + ऋतु (अ + ऋ = अर्), गुण संधि।
- वर्षर्तु उत्तर: वर्षा + ऋतु (आ + ऋ = अर्), गुण संधि।
- सदैव में गुण संधि है या वृद्धि? उत्तर: वृद्धि संधि, क्योंकि सदा + एव में आ + ए = ऐ बना है।
याद रखने की ट्रिक
अ/आ + इ = ए, अ/आ + उ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्। इसे ऐसे याद रखें: गुण में एक कदम ऊपर, वृद्धि में दो कदम ऊपर। इ से ए (गुण), फिर ए से ऐ (वृद्धि)। उ से ओ (गुण), फिर ओ से औ (वृद्धि)। ऐ और औ वाली संधि के लिए वृद्धि संधि देखें।
सामान्य गलतियाँ
- सूर्योदय = सूर्यो + दय गलत है। सही है सूर्य + उदय।
- महर्षि = मह + ऋषि गलत है। सही है महा + ऋषि।
- अ + ए = ऐ को गुण संधि लिखना गलत है, वह वृद्धि संधि है।
- नरेंद्र को नरें + द्र या नर + एंद्र लिखना गलत है। सही है नर + इंद्र।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुण संधि के 10 उदाहरण बताइए।
नरेंद्र = नर + इंद्र, नरेश = नर + ईश, महेंद्र = महा + इंद्र, सूर्योदय = सूर्य + उदय, परोपकार = पर + उपकार, महोत्सव = महा + उत्सव, यथोचित = यथा + उचित, जलोर्मि = जल + ऊर्मि, सप्तर्षि = सप्त + ऋषि, महर्षि = महा + ऋषि।
गुण संधि किसे कहते हैं?
जब अ या आ के बाद इ/ई, उ/ऊ या ऋ आता है, तो क्रमशः ए, ओ और अर् बन जाते हैं। इस परिवर्तन को गुण संधि कहते हैं।
गुण संधि का सूत्र क्या है?
गुण संधि के सूत्र हैं: अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ और अ/आ + ऋ = अर्।
सूर्योदय में कौन सी संधि है?
सूर्योदय में गुण स्वर संधि है। इसका विच्छेद सूर्य + उदय है, जिसमें अ + उ = ओ हुआ है।
महर्षि का संधि विच्छेद क्या है?
महर्षि का संधि विच्छेद महा + ऋषि है। यहाँ आ + ऋ = अर् हुआ है, इसलिए यह गुण संधि है।