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समास

Tatpurush samasKarmadharay samasDvigu samasDvandva samasBahuvrihi samasAvyayibhav samasSamas

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तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas): परिभाषा, भेद और उदाहरण

जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो और बीच का कारक चिह्न लुप्त हो जाए, वह तत्पुरुष समास है; जैसे राजपुत्र = राजा का पुत्र।

  • समास
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Tatpurush samas वह समास है जिसमें उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच का कारक चिह्न (को, से, के लिए, का, में, पर) लुप्त हो जाता है। जैसे: राजा का पुत्र = राजपुत्र, गगन को चूमने वाला = गगनचुंबी।

तत्पुरुष समास की परिभाषा (Tatpurush samas kise kahate hain)

जिस समास में बाद वाला पद प्रधान हो और पहले पद के साथ लगी विभक्ति (कारक चिह्न) समस्त पद बनाते समय हट जाए, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। "तत्पुरुष" शब्द का अर्थ ही है "उसका पुरुष"। इसमें प्रश्न "क्या" का उत्तर दूसरा पद देता है। जैसे राजपुत्र में बात "पुत्र" की हो रही है, इसलिए उत्तरपद प्रधान है।

तत्पुरुष समास को समझने के लिए कारक के चिह्न याद होने चाहिए, क्योंकि इसके भेद इन्हीं चिह्नों पर बने हैं।

पहचान की ट्रिक

  • विग्रह करते समय बीच में को, से, के द्वारा, के लिए, से अलग, का/के/की, में या पर लगाना पड़े, तो समझिए तत्पुरुष है।
  • अर्थ दूसरे पद पर ही रुके। रसोईघर अंत में एक घर ही है, इसलिए उत्तरपद प्रधान है।
  • यदि अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु पर चला जाए तो वह बहुव्रीहि समास होगा, तत्पुरुष नहीं।

तत्पुरुष समास के भेद (Tatpurush samas ke bhed)

कारक चिह्न के आधार पर तत्पुरुष समास के 6 भेद होते हैं। कर्ता और संबोधन कारक के तत्पुरुष नहीं बनते, इसलिए आठ कारकों में से छह ही बचते हैं। इनके अतिरिक्त नञ् तत्पुरुष और उपपद तत्पुरुष भी पढ़ाए जाते हैं। कुछ पुस्तकें कर्मधारय और द्विगु को भी तत्पुरुष का उपभेद मानती हैं, पर स्कूली पुस्तकों में ये अलग समास के रूप में पढ़ाए जाते हैं।

भेदलुप्त कारक चिह्नउदाहरण
1. कर्म तत्पुरुषकोगगनचुंबी, यशप्राप्त
2. करण तत्पुरुषसे, के द्वाराहस्तलिखित, बैलगाड़ी
3. संप्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघर, देशभक्ति
4. अपादान तत्पुरुषसे (अलग होना)देशनिकाला, ऋणमुक्त
5. संबंध तत्पुरुषका, के, कीराजपुत्र, गंगाजल
6. अधिकरण तत्पुरुषमें, परवनवास, घुड़सवार

1. कर्म तत्पुरुष

इसमें "को" चिह्न लुप्त होता है। जैसे गगनचुंबी = गगन को चूमने वाला, यशप्राप्त = यश को प्राप्त, चिड़ीमार = चिड़ियों को मारने वाला।

2. करण तत्पुरुष

इसमें "से" या "के द्वारा" लुप्त होता है, जहाँ "से" साधन बताता है। जैसे हस्तलिखित = हाथ से लिखा हुआ, रेखांकित = रेखा द्वारा अंकित, बैलगाड़ी = बैलों से चलने वाली गाड़ी।

3. संप्रदान तत्पुरुष

इसमें "के लिए" लुप्त होता है। जैसे रसोईघर = रसोई के लिए घर, देशभक्ति = देश के लिए भक्ति, विद्यालय = विद्या के लिए आलय।

4. अपादान तत्पुरुष

इसमें अलग होने के अर्थ वाला "से" लुप्त होता है। जैसे देशनिकाला = देश से निकाला गया, पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट, ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त।

5. संबंध तत्पुरुष

इसमें "का, के, की" लुप्त होता है। यह सबसे अधिक मिलने वाला भेद है। जैसे राजपुत्र = राजा का पुत्र, पतझड़ = पत्तों का झड़ना, जलधारा = जल की धारा।

6. अधिकरण तत्पुरुष

इसमें "में" या "पर" लुप्त होता है। जैसे वनवास = वन में वास, जलमग्न = जल में मग्न, घुड़सवार = घोड़े पर सवार।

नञ् तत्पुरुष

जिस समास में पहला पद निषेध (नहीं) का अर्थ देता है, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं। पहले पद में अ, अन, न, ना, गैर जैसे अंश आते हैं। जैसे असभ्य = न सभ्य, अनपढ़ = न पढ़ा, नापसंद = न पसंद, अनादि = न आदि। ध्यान रहे, यहाँ अ और अन उपसर्ग जैसे दिखते हैं, पर समास के प्रश्न में इन्हें नञ् तत्पुरुष लिखा जाता है।

उपपद तत्पुरुष

जिस समास का दूसरा पद ऐसा अंश हो जो अकेले स्वतंत्र शब्द की तरह प्रयोग नहीं होता (जैसे कार, चर, स्थ, ज्ञ, द), उसे उपपद तत्पुरुष कहते हैं। जैसे कुंभकार = कुंभ को बनाने वाला, जलचर = जल में विचरण करने वाला, तटस्थ = तट पर स्थित, सर्वज्ञ = सब को जानने वाला।

तत्पुरुष समास के उदाहरण (Tatpurush samas ke udaharan)

समस्त पदसमास विग्रहभेद
गगनचुंबीगगन को चूमने वालाकर्म तत्पुरुष
यशप्राप्तयश को प्राप्तकर्म तत्पुरुष
शरणागतशरण को आया हुआकर्म तत्पुरुष
हस्तलिखितहाथ से लिखा हुआकरण तत्पुरुष
मनचाहामन से चाहा हुआकरण तत्पुरुष
रेखांकितरेखा द्वारा अंकितकरण तत्पुरुष
रसोईघररसोई के लिए घरसंप्रदान तत्पुरुष
गौशालागायों के लिए शालासंप्रदान तत्पुरुष
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ीसंप्रदान तत्पुरुष
देशनिकालादेश से निकाला गयाअपादान तत्पुरुष
धनहीनधन से हीनअपादान तत्पुरुष
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्टअपादान तत्पुरुष
राजमहलराजा का महलसंबंध तत्पुरुष
गंगाजलगंगा का जलसंबंध तत्पुरुष
पराधीनपर (दूसरे) के अधीनसंबंध तत्पुरुष
वनवासवन में वासअधिकरण तत्पुरुष
आपबीतीआप पर बीतीअधिकरण तत्पुरुष
घुड़सवारघोड़े पर सवारअधिकरण तत्पुरुष
अनपढ़न पढ़ानञ् तत्पुरुष
कुंभकारकुंभ को बनाने वालाउपपद तत्पुरुष

मध्यमपदलोपी तत्पुरुष

कुछ समस्त पदों में केवल कारक चिह्न ही नहीं, बीच का एक पूरा शब्द भी हट जाता है। जैसे बैलगाड़ी = बैलों से चलने वाली गाड़ी, दहीबड़ा = दही में डूबा हुआ बड़ा। ऐसे शब्दों में विग्रह करते समय वह बीच का शब्द जोड़ना ज़रूरी है, नहीं तो अर्थ अधूरा रहता है।

सामान्य गलतियाँ

  • करण और अपादान में भ्रम: दोनों में "से" आता है। साधन वाला से (हाथ से लिखा) करण है, अलग होने वाला से (पथ से भ्रष्ट) अपादान है।
  • संबंध और कर्मधारय में भ्रम: राजपुत्र में "का" आता है, इसलिए तत्पुरुष। महापुरुष में "महान है जो" आता है, इसलिए कर्मधारय।
  • विग्रह में चिह्न भूलना: केवल "राजा पुत्र" लिखना गलत है। "राजा का पुत्र" लिखिए।

याद रखने की ट्रिक

छह भेद क्रम से याद करने के लिए कारक चिह्नों का क्रम दोहराइए: को, से, के लिए, से (अलग), का, में/पर। यही क्रम कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण का है। विग्रह में जो चिह्न लगे, वही तत्पुरुष का भेद है। पूरे समास का सार यह है कि तत्पुरुष में "चिह्न छिपा होता है", कर्मधारय में "विशेषता", और बहुव्रीहि में "तीसरा अर्थ"।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो और दोनों पदों के बीच का कारक चिह्न लुप्त हो जाए, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे राजपुत्र (राजा का पुत्र) और देशभक्ति (देश के लिए भक्ति)।

तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं?

कारक चिह्नों के आधार पर तत्पुरुष समास के 6 भेद होते हैं: कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण तत्पुरुष। इनके अलावा नञ् तत्पुरुष और उपपद तत्पुरुष भी पढ़ाए जाते हैं।

तत्पुरुष समास के 10 उदाहरण बताइए।

गगनचुंबी, हस्तलिखित, रसोईघर, देशनिकाला, राजपुत्र, गंगाजल, वनवास, घुड़सवार, अनपढ़ और कुंभकार तत्पुरुष समास के उदाहरण हैं। इनके विग्रह और भेद ऊपर की तालिका में दिए गए हैं।

कर्ता और संबोधन तत्पुरुष क्यों नहीं होते?

तत्पुरुष समास के भेद लुप्त कारक चिह्न पर बनते हैं। कर्ता कारक का चिह्न ने और संबोधन के चिह्न हे, अरे समास बनाने में लुप्त नहीं होते, इसलिए इन दोनों के तत्पुरुष नहीं माने जाते।

नञ् तत्पुरुष समास क्या है?

जिस तत्पुरुष में पहला पद नहीं या निषेध का अर्थ देता है, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं। जैसे असभ्य (न सभ्य), अनपढ़ (न पढ़ा), नापसंद (न पसंद) और अनादि (न आदि)।