Dvigu samas वह समास है जिसका पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और पूरा समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराता है। इसमें उत्तरपद प्रधान होता है। जैसे: सात दिनों का समूह = सप्ताह, चार राहों का समूह = चौराहा।
द्विगु समास की परिभाषा
"द्विगु" शब्द स्वयं द्विगु समास का उदाहरण है: द्वि (दो) + गु (गाय), अर्थात् दो गायों का समूह। जिस समस्त पद में पहला पद कोई गिनती (एक, दो, तीन, चार, पाँच, सात, सौ आदि) बताए और पूरा शब्द उस गिनती वाली वस्तुओं के समूह का अर्थ दे, उसे द्विगु समास कहते हैं।
पहला पद संख्या बताता है, इसलिए वह संख्यावाचक विशेषण है। दूसरा पद वह संज्ञा है जिसकी गिनती की जा रही है। इसी कारण कई विद्वान द्विगु को कर्मधारय समास का ही एक रूप मानते हैं, और संस्कृत व्याकरण में इसे तत्पुरुष का उपभेद माना जाता है। हिंदी की स्कूली पुस्तकों में यह अलग समास के रूप में पढ़ाया जाता है।
पहचान की ट्रिक
- पहला पद संख्या हो: एक, द्वि/दो/दु, त्रि/ति, चतुर्/चौ, पंच, षट्, सप्त/सत, अष्ट/अठ, नव, दश, शत।
- विग्रह के अंत में "का समूह" या "का समाहार" लगे।
- अर्थ उसी समूह पर रुके, किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु पर न जाए।
संख्या के संस्कृत रूप पहचानना ज़रूरी है, क्योंकि शब्द में संख्या कई बार छिपी रहती है: त्रि = तीन, चतु/चौ = चार, पंच = पाँच, सप्त = सात, अष्ट = आठ, शत = सौ।
द्विगु समास के भेद
कुछ पुस्तकों में द्विगु के दो भेद बताए गए हैं:
- समाहार द्विगु: पूरा पद समूह का अर्थ देता है। जैसे त्रिभुवन, सप्ताह, पंचवटी। स्कूल में अधिकतर यही रूप पढ़ाया जाता है।
- उत्तरपद प्रधान द्विगु: संख्या के साथ दूसरा पद ही मुख्य रहता है, समूह का भाव कम होता है। जैसे दोपहर (दूसरा पहर), पंचप्रमाण।
द्विगु समास के उदाहरण (Dvigu samas ke udaharan)
| समस्त पद | समास विग्रह | संख्या |
|---|---|---|
| पंचतंत्र | पाँच तंत्रों का समूह | 5 |
| पंचवटी | पाँच वटों (बरगद) का समूह | 5 |
| चौराहा | चार राहों का समूह | 4 |
| अठन्नी | आठ आनों का समूह | 8 |
| चवन्नी | चार आनों का समूह | 4 |
| तिरंगा | तीन रंगों का समूह | 3 |
| त्रिभुज | तीन भुजाओं का समूह | 3 |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समूह (गणित की आकृति) | 4 |
| त्रिफला | तीन फलों का समूह | 3 |
| सप्ताह | सात दिनों का समूह | 7 |
| शताब्दी | सौ अब्दों (वर्षों) का समूह | 100 |
| नवरत्न | नौ रत्नों का समूह | 9 |
| चौमासा | चार मासों का समूह | 4 |
| दोपहर | दो पहरों का समूह | 2 |
| पंचामृत | पाँच अमृतों का समूह | 5 |
| सतसई | सात सौ दोहों का समूह | 700 |
| त्रिकोण | तीन कोणों का समूह | 3 |
| अष्टधातु | आठ धातुओं का समूह | 8 |
| नवग्रह | नौ ग्रहों का समूह | 9 |
| पंसेरी | पाँच सेरों का समूह | 5 |
सतसई का अर्थ है सात सौ दोहों का संग्रह। रीतिकाल के कवि बिहारी की प्रसिद्ध रचना "बिहारी सतसई" इसी नाम से जानी जाती है। दोहा छंद के बारे में अलग पेज पर पढ़ें।
वाक्यों में द्विगु समास
- हम हर सप्ताह रविवार को पार्क जाते हैं। (सात दिनों का समूह)
- स्कूल के सामने वाले चौराहे पर बहुत भीड़ रहती है। (चार राहों का समूह)
- गणित की कॉपी में मैंने एक त्रिभुज बनाया। (तीन भुजाओं का समूह)
- दादाजी ने पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाईं। (पाँच तंत्रों का समूह)
- गर्मियों की दोपहर में घर से बाहर कम निकलना चाहिए। (दो पहरों का समूह)
इन वाक्यों से साफ़ है कि द्विगु समास के शब्द हमारी रोज़ की बोलचाल में बहुत आते हैं। अभ्यास के लिए अपने आसपास के ऐसे शब्द खोजिए जिनमें कोई गिनती छिपी हो।
द्विगु और बहुव्रीहि में अंतर
परीक्षा में सबसे बड़ा भ्रम यहीं होता है, क्योंकि बहुव्रीहि के कई शब्दों में भी पहला पद संख्या होता है। नियम सीधा है: समूह का अर्थ हो तो द्विगु, किसी तीसरे का नाम या विशेषता बने तो बहुव्रीहि।
| शब्द | द्विगु विग्रह | बहुव्रीहि विग्रह |
|---|---|---|
| तिरंगा | तीन रंगों का समूह | तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समूह | चार हैं भुजाएँ जिसकी, अर्थात् एक पौराणिक नाम |
| बारहसिंगा | (द्विगु में प्रयोग नहीं) | बारह हैं सींग जिसके, अर्थात् एक हिरण |
| दशानन | दस आननों (मुखों) का समूह | दस हैं आनन जिसके, अर्थात् एक पौराणिक पात्र |
गणित की कक्षा में "चतुर्भुज" चार भुजाओं वाली आकृति है, यहाँ अर्थ आकृति (चार भुजाओं के समूह) पर ही रुकता है, इसलिए इसे द्विगु मानना ठीक है। जब वही शब्द किसी विशेष व्यक्ति का नाम बनता है, तब बहुव्रीहि समास होता है।
द्विगु और कर्मधारय में अंतर
दोनों में पहला पद विशेषण होता है। द्विगु में वह विशेषण केवल संख्यावाचक होता है (सप्ताह, चौराहा), जबकि कर्मधारय में वह गुणवाचक होता है (नीलकमल, महापुरुष)। इसलिए कोई पद देखते ही पहले शब्द से पूछिए: यह गिनती है या गुण?
सामान्य गलतियाँ
- हर संख्या वाले शब्द को आँख बंद करके द्विगु लिख देना। बारहसिंगा, दशानन जैसे शब्द प्रायः बहुव्रीहि में पूछे जाते हैं।
- विग्रह में "समूह" शब्द छोड़ देना। "चार राहें" नहीं, "चार राहों का समूह" लिखें।
- दोपहर और चौमासा जैसे छिपी संख्या वाले शब्द न पहचान पाना। दो और चौ भी संख्या ही हैं।
याद रखने की ट्रिक
"गिनती + समूह = द्विगु"। जैसे ही समस्त पद में गिनती दिखे और विग्रह के अंत में "का समूह" ठीक बैठे, उत्तर द्विगु लिखिए। अगर "जिसके" और "अर्थात्" लगाना पड़े, तो रुककर बहुव्रीहि पर विचार कीजिए। सभी भेदों की तुलना समास के मुख्य पेज पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
द्विगु समास किसे कहते हैं?
जिस समास का पहला पद संख्यावाचक हो और पूरा पद किसी समूह का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। इसमें उत्तरपद प्रधान होता है। जैसे सप्ताह (सात दिनों का समूह) और चौराहा (चार राहों का समूह)।
द्विगु समास के 10 उदाहरण बताइए।
पंचतंत्र, पंचवटी, चौराहा, अठन्नी, तिरंगा, त्रिभुज, सप्ताह, शताब्दी, नवरत्न और दोपहर द्विगु समास के उदाहरण हैं। इन सबके विग्रह के अंत में का समूह लगता है।
द्विगु समास की पहचान कैसे करें?
समस्त पद का पहला शब्द कोई संख्या हो और विग्रह करने पर का समूह लगाना पड़े, तो द्विगु समास है। यदि अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु पर जाए, तो वह बहुव्रीहि होगा।
तिरंगा में कौन सा समास है?
तिरंगा का विग्रह तीन रंगों का समूह करने पर द्विगु समास है। यदि विग्रह तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज किया जाए, तो बहुव्रीहि समास है। प्रश्न में दिए विग्रह के अनुसार उत्तर लिखें।
द्विगु और बहुव्रीहि समास में क्या अंतर है?
द्विगु में पहला पद संख्या होता है और अर्थ समूह पर रुकता है। बहुव्रीहि में संख्या हो या न हो, दोनों पद मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं और विग्रह में जिसका तथा अर्थात् लगता है।