Alankar kise kahate hain: अलंकार का अर्थ है आभूषण या गहना। जैसे गहने पहनने से शरीर की सुंदरता बढ़ती है, वैसे ही अलंकार से कविता और भाषा की सुंदरता बढ़ती है। इसलिए alankar ki paribhasha है: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्द और अर्थ के चमत्कार को अलंकार कहते हैं।
अलंकार शब्द दो भागों से बना है: अलम् + कार। अलम् का अर्थ है भूषण या सजावट, और कार का अर्थ है करने वाला। यानी जो भाषा को सजाए, वही अलंकार है। कक्षा 9 और 10 की हिंदी में अलंकार पहचानने के प्रश्न लगभग हर परीक्षा में आते हैं।
अलंकार की परिभाषा (Alankar ki Paribhasha)
जब कवि किसी बात को सीधे न कहकर उसे सुंदर ढंग से कहता है, तो उसमें चमत्कार आ जाता है। यह चमत्कार कभी शब्दों की ध्वनि से आता है, जैसे एक ही वर्ण का बार बार आना। कभी यह अर्थ से आता है, जैसे मुख की तुलना चंद्रमा से करना। काव्य में आए इसी चमत्कार को अलंकार कहते हैं।
आचार्य दंडी ने कहा था कि काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्म अलंकार हैं। आज के स्कूली पाठ्यक्रम में भी यही सरल अर्थ पढ़ाया जाता है।
अलंकार के भेद (Alankar ke Bhed)
Alankar ke kitne bhed hote hain: स्कूली पुस्तकों में अलंकार के दो मुख्य भेद पढ़ाए जाते हैं।
- शब्दालंकार: जहाँ चमत्कार शब्द पर टिका हो। शब्द बदल देने पर चमत्कार खत्म हो जाता है।
- अर्थालंकार: जहाँ चमत्कार अर्थ पर टिका हो। शब्द बदलकर उसी अर्थ का दूसरा शब्द रख दें, तब भी चमत्कार बना रहता है।
कुछ पुस्तकों में तीसरा भेद उभयालंकार भी दिया जाता है, जहाँ शब्द और अर्थ दोनों का चमत्कार एक साथ हो। परीक्षा के लिए दो मुख्य भेद याद रखना काफी है।
शब्दालंकार और अर्थालंकार की पहचान
पहचान का सबसे आसान तरीका है: पंक्ति के मुख्य शब्द की जगह उसका पर्यायवाची रख दीजिए। यदि सुंदरता चली जाए तो शब्दालंकार है, यदि बनी रहे तो अर्थालंकार है। जैसे "कनक कनक ते सौ गुनी" में कनक की जगह सोना लिख दें तो यमक का चमत्कार खत्म हो जाता है। पर "मुख चंद्रमा के समान सुंदर है" में चंद्रमा की जगह शशि लिख दें, तब भी उपमा बनी रहती है।
शब्दालंकार के मुख्य प्रकार
| अलंकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण बार बार आए | तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए (भारतेंदु) |
| यमक | एक शब्द बार बार आए, हर बार अर्थ अलग | कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय (बिहारी) |
| श्लेष | एक शब्द एक ही बार आए, पर उसके कई अर्थ निकलें | रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून (रहीम) |
| वक्रोक्ति | कहने वाले के अर्थ से अलग अर्थ सुनने वाला निकाल ले | उदाहरण: "आप बड़े समझदार हैं" को व्यंग्य से कहना |
| पुनरुक्ति प्रकाश | एक ही शब्द एक ही अर्थ में दोहराया जाए | उदाहरण: धीरे धीरे बादल छँटने लगे। |
अर्थालंकार के मुख्य प्रकार
| अलंकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| उपमा | समानता बताई जाए, वाचक शब्द सा, सी, से, सम, समान, सरिस | पीपर पात सरिस मन डोला (तुलसीदास) |
| रूपक | उपमेय और उपमान को एक ही मान लिया जाए (अभेद) | संत हंस गुन गहहिं पय (तुलसीदास) |
| उत्प्रेक्षा | उपमेय में उपमान की संभावना, वाचक शब्द मनु, मानो, जनु, जानो | मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा (मैथिलीशरण गुप्त, जयद्रथ वध) |
| अतिशयोक्ति | बात को सीमा से बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहना | पत्रा ही तिथि पाइयै (बिहारी) |
| मानवीकरण | प्रकृति या निर्जीव वस्तु मनुष्य की तरह काम करे | मांटी कहै कुम्हार सौं (कबीर) |
| संदेह | दो वस्तुओं में से कौन सी है, यह तय न हो पाए | उदाहरण: यह मुख है या चंद्रमा? |
| भ्रांतिमान | समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी समझ लेना | फिरि फिरि जानि महावरी, एड़ी मीड़ति जाइ (बिहारी) |
| अन्योक्ति | किसी और के बहाने किसी और को बात कहना | नहिं पराग नहिं मधुर मधु (बिहारी) |
ध्यान दें: श्लेष को कुछ पुस्तकें शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों में रखती हैं। स्कूली परीक्षा में इसे शब्दालंकार ही माना जाता है।
अलंकार के उदाहरण (Alankar ke Udaharan)
- मुदित महीपति मंदिर आए। (तुलसीदास)
यहाँ म वर्ण बार बार आया है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है। - माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर॥ (कबीर)
मनका शब्द दो बार आया है: एक बार माला का दाना, दूसरी बार मन का। इसलिए यमक अलंकार है। - जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय। बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥ (रहीम)
बारे और बढ़े के दो दो अर्थ हैं (जलाना और बचपन, बुझना और बड़ा होना), इसलिए श्लेष अलंकार है। - कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा। (तुलसीदास)
वचनों की तुलना वज्र से सम शब्द द्वारा की गई है, इसलिए उपमा अलंकार है। - माया दीपक नर पतंग, भ्रमि भ्रमि इवैं पड़ंत। (कबीर)
माया को ही दीपक और मनुष्य को ही पतंगा मान लिया गया है, इसलिए रूपक अलंकार है। - कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए॥ (मैथिलीशरण गुप्त, जयद्रथ वध)
आँसू भरे नेत्रों में ओस भरे कमल की संभावना मानो शब्द से की गई है, इसलिए उत्प्रेक्षा अलंकार है। - माली आवत देखि के, कलियन करी पुकार। (कबीर)
कलियाँ मनुष्य की तरह पुकार रही हैं, इसलिए मानवीकरण अलंकार है। - नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं बिकास इहि काल। अली कली ही सौं बँध्यो, आगैं कौन हवाल॥ (बिहारी)
भौंरे और कली के बहाने एक राजा को समझाया गया है, इसलिए अन्योक्ति अलंकार है।
याद रखने की ट्रिक
- अनुप्रास: अक्षर दोहराया। यमक: शब्द दोहराया, अर्थ बदला। श्लेष: शब्द एक, अर्थ अनेक।
- सा, सी, से, सम दिखे तो उपमा। मनु, मानो, जनु, जानो दिखे तो उत्प्रेक्षा। उपमेय और उपमान के बीच कोई वाचक न हो और दोनों एक मान लिए गए हों तो रूपक।
- मन में "यह या वह" का प्रश्न बना रहे तो संदेह। पक्का गलत मान लिया तो भ्रांतिमान।
सामान्य गलतियाँ
- यमक और श्लेष को एक समझ लेना। यमक में शब्द दो या अधिक बार आता है, श्लेष में एक ही बार।
- हर "सा" को उपमा मान लेना। "थोड़ा सा पानी" में सा तुलना नहीं बताता, यह उपमा नहीं है।
- पुनरुक्ति को यमक लिख देना। "धीरे धीरे" में अर्थ एक ही है, इसलिए यह यमक नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अलंकार किसे कहते हैं?
काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्द और अर्थ के चमत्कार को अलंकार कहते हैं। अलंकार का शाब्दिक अर्थ आभूषण है। जैसे गहने शरीर को सजाते हैं, वैसे ही अलंकार भाषा को सजाते हैं।
अलंकार के कितने भेद होते हैं?
अलंकार के दो मुख्य भेद होते हैं: शब्दालंकार और अर्थालंकार। कुछ पुस्तकें तीसरा भेद उभयालंकार भी मानती हैं, जिसमें शब्द और अर्थ दोनों का चमत्कार हो। स्कूली परीक्षा में दो भेद ही पूछे जाते हैं।
शब्दालंकार के कितने प्रकार हैं?
स्कूली पुस्तकों में शब्दालंकार के मुख्य प्रकार अनुप्रास, यमक और श्लेष हैं। इनके अलावा वक्रोक्ति और पुनरुक्ति प्रकाश भी शब्दालंकार में गिने जाते हैं।
अर्थालंकार के मुख्य प्रकार कौन से हैं?
उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण, संदेह, भ्रांतिमान और अन्योक्ति मुख्य अर्थालंकार हैं। इनमें चमत्कार अर्थ पर टिका रहता है, इसलिए पर्यायवाची रखने पर भी अलंकार बना रहता है।
अन्योक्ति अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ किसी एक के बहाने किसी दूसरे को बात कही जाए, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। बिहारी का दोहा 'नहिं पराग नहिं मधुर मधु' इसका प्रसिद्ध उदाहरण है, जिसमें भौंरे के बहाने राजा को समझाया गया है।