Visarg sandhi kise kahate hain: विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे मनः + हर = मनोहर, निः + धन = निर्धन। यह संधि का तीसरा भेद है। नीचे visarg sandhi के नियम, तालिका और 20 से अधिक उदाहरण दिए गए हैं।
विसर्ग संधि की परिभाषा
परिभाषा: विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन का मेल होने पर विसर्ग में जो विकार (परिवर्तन) आता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
विसर्ग वर्ण के बाद लगने वाले दो बिंदु (ः) हैं, जैसे मनः, निः, दुः, नमः। संधि होने पर विसर्ग कभी ओ बन जाता है, कभी र्, कभी श्, ष्, स्, और कभी हट जाता है। यह इस पर निर्भर करता है कि विसर्ग से पहले कौन सा स्वर है और बाद में कौन सा वर्ण आया है।
विसर्ग संधि के नियम
| नियम | स्थिति | परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | विसर्ग से पहले अ, बाद में अ या वर्ग का 3, 4, 5वाँ वर्ण या य, र, ल, व, ह | ओ | मनः + हर = मनोहर |
| 2 | विसर्ग से पहले इ या उ, बाद में स्वर या वर्ग का 3, 4, 5वाँ वर्ण या य, ल, व, ह | र् | निः + धन = निर्धन |
| 3 | विसर्ग के बाद च या छ | श् | निः + चल = निश्चल |
| 4 | विसर्ग के बाद ट या ठ | ष् | धनुः + टंकार = धनुष्टंकार |
| 5 | विसर्ग के बाद त या थ | स् | नमः + ते = नमस्ते |
| 6 | विसर्ग से पहले इ या उ, बाद में क, ख, प, फ | ष् | निः + कपट = निष्कपट |
| 7 | विसर्ग से पहले अ, बाद में क, ख, प, फ | प्रायः कोई परिवर्तन नहीं | प्रातः + काल = प्रातःकाल |
| 8 | विसर्ग के बाद श, ष, स | विसर्ग वैसा ही या अगला वर्ण | निः + संदेह = निःसंदेह / निस्संदेह |
| 9 | विसर्ग से पहले इ या उ, बाद में र | विसर्ग का लोप, पहला स्वर दीर्घ | निः + रस = नीरस |
| 10 | विसर्ग से पहले अ, बाद में अ से भिन्न स्वर | विसर्ग का लोप | अतः + एव = अतएव |
नियम 1: विसर्ग का ओ होना
यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला नियम है। मनः, यशः, तपः, सरः, पयः, अधः, वयः जैसे शब्दों में विसर्ग से पहले अ होता है। इनके बाद कोमल व्यंजन आए तो अः मिलकर ओ बन जाता है।
- मनः + बल = मनोबल
- मनः + रंजन = मनोरंजन
- मनः + विज्ञान = मनोविज्ञान
- तपः + बल = तपोबल
- यशः + गान = यशोगान
- अधः + गति = अधोगति
- सरः + ज = सरोज
- वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
नियम 2: विसर्ग का र् होना
निः, दुः, आशीः, बहिः जैसे शब्दों में विसर्ग से पहले इ, ई या उ होता है। इनके बाद स्वर या कोमल व्यंजन आए तो विसर्ग र् बन जाता है।
- निः + आशा = निराशा
- दुः + आचार = दुराचार
- निः + बल = निर्बल
- निः + जन = निर्जन
- निः + मल = निर्मल
- निः + भय = निर्भय
- दुः + गुण = दुर्गुण
- दुः + लभ = दुर्लभ
- आशीः + वाद = आशीर्वाद
अपवाद: पुनः और अंतः में विसर्ग से पहले अ होने पर भी विसर्ग र् बनता है: पुनः + जन्म = पुनर्जन्म, अंतः + गत = अंतर्गत।
नियम 3 से 6: विसर्ग का श्, ष्, स् होना
- निः + छल = निश्छल (श्)
- दुः + चरित्र = दुश्चरित्र (श्)
- निः + तेज = निस्तेज (स्)
- मनः + ताप = मनस्ताप (स्)
- दुः + कर्म = दुष्कर्म (ष्)
- निः + फल = निष्फल (ष्)
- निः + पाप = निष्पाप (ष्)
नियम 7 के कुछ प्रसिद्ध अपवाद भी हैं, जहाँ अ के बाद भी विसर्ग स् बन जाता है: नमः + कार = नमस्कार, पुरः + कार = पुरस्कार, भाः + कर = भास्कर।
विसर्ग संधि के उदाहरण (Visarg sandhi ke udaharan)
| क्रम | शब्द | संधि विच्छेद | विसर्ग बना |
|---|---|---|---|
| 1 | मनोहर | मनः + हर | ओ |
| 2 | मनोबल | मनः + बल | ओ |
| 3 | मनोरंजन | मनः + रंजन | ओ |
| 4 | यशोगान | यशः + गान | ओ |
| 5 | अधोगति | अधः + गति | ओ |
| 6 | सरोज | सरः + ज | ओ |
| 7 | निराशा | निः + आशा | र् |
| 8 | निर्धन | निः + धन | र् |
| 9 | निर्मल | निः + मल | र् |
| 10 | दुर्लभ | दुः + लभ | र् |
| 11 | आशीर्वाद | आशीः + वाद | र् |
| 12 | पुनर्जन्म | पुनः + जन्म | र् |
| 13 | निश्चल | निः + चल | श् |
| 14 | निश्छल | निः + छल | श् |
| 15 | नमस्ते | नमः + ते | स् |
| 16 | निस्तेज | निः + तेज | स् |
| 17 | निष्कपट | निः + कपट | ष् |
| 18 | दुष्कर्म | दुः + कर्म | ष् |
| 19 | नीरस | निः + रस | लोप, इ का ई |
| 20 | अतएव | अतः + एव | लोप |
दो सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले शब्दों के अलग पेज भी देखें: मनोहर का संधि विच्छेद और नमस्ते का संधि विच्छेद।
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
परीक्षा में प्रश्न प्रायः इस रूप में आता है: तेजोमय का संधि विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए। पूरे अंक पाने के लिए उत्तर में तीन बातें लिखें: शब्द का विच्छेद, स्वरों या वर्णों का मेल, और संधि का पूरा नाम।
आदर्श उत्तर: तेजोमय = तेजः + मय। विसर्ग से पहले अ और बाद में म आया है, इसलिए अः का ओ बना। यह विसर्ग संधि है।
अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
नीचे दिए शब्दों का संधि विच्छेद स्वयं करके देखें, फिर उत्तर से मिलाएँ।
- मनोज उत्तर: मनः + ज (अः का ओ), विसर्ग संधि।
- दुर्जन उत्तर: दुः + जन (विसर्ग का र्), विसर्ग संधि।
- निर्भय उत्तर: निः + भय (विसर्ग का र्), विसर्ग संधि।
- निष्प्राण उत्तर: निः + प्राण (विसर्ग का ष्), विसर्ग संधि।
- नीरोग उत्तर: निः + रोग (विसर्ग का लोप, इ का ई), विसर्ग संधि।
- दुस्साहस उत्तर: दुः + साहस (विसर्ग का स्), विसर्ग संधि।
याद रखने की ट्रिक
- शब्द में मनो, यशो, तपो, अधो दिखे तो विच्छेद में अः लिखें: मनः, यशः, तपः, अधः।
- शब्द निर्, दुर्, निष्, दुष्, निस्, निश् से शुरू हो तो विच्छेद में निः या दुः लिखें।
- शब्द नी से शुरू होकर र आए (नीरस, नीरोग) तो वह भी निः से बना है।
सामान्य गलतियाँ
- मनोहर = मनो + हर गलत है। सही है मनः + हर।
- निर्धन = निर् + धन गलत है। विसर्ग संधि में मूल रूप निः लिखा जाता है: निः + धन।
- नमस्ते = नमस् + ते गलत है। सही है नमः + ते।
- नीरस = नी + रस गलत है। सही है निः + रस।
- इन शब्दों को व्यंजन संधि लिखना गलत है, क्योंकि बदलाव विसर्ग में हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विसर्ग संधि किसे कहते हैं?
विसर्ग के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। विसर्ग कभी ओ, कभी र्, कभी श्, ष्, स् बन जाता है और कभी हट जाता है।
विसर्ग संधि के 10 उदाहरण बताइए।
मनोहर = मनः + हर, मनोबल = मनः + बल, यशोगान = यशः + गान, निराशा = निः + आशा, निर्धन = निः + धन, दुर्लभ = दुः + लभ, निश्चल = निः + चल, नमस्ते = नमः + ते, निष्कपट = निः + कपट, नीरस = निः + रस।
मनोहर में कौन सी संधि है?
मनोहर में विसर्ग संधि है। इसका विच्छेद मनः + हर है। विसर्ग से पहले अ है और बाद में ह आया है, इसलिए अः का ओ बन गया।
नमस्ते का संधि विच्छेद क्या है?
नमस्ते का संधि विच्छेद नमः + ते है। विसर्ग के बाद त आने पर विसर्ग स् बन जाता है, इसलिए नमस्ते बना। यह विसर्ग संधि है।
निराशा में कौन सी संधि है?
निराशा में विसर्ग संधि है। इसका विच्छेद निः + आशा है। विसर्ग से पहले इ और बाद में स्वर आ है, इसलिए विसर्ग र् बन गया।