Bahuvrihi samas वह समास है जिसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) व्यक्ति, जीव या वस्तु की ओर संकेत करते हैं। वही तीसरा अर्थ प्रधान होता है। जैसे: पंक में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल = पंकज।
बहुव्रीहि समास की परिभाषा (Bahuvrihi samas kise kahate hain)
"बहुव्रीहि" शब्द स्वयं इस समास का उदाहरण है: बहु (बहुत) + व्रीहि (धान), अर्थात् बहुत धान है जिसके पास, यानी धनी किसान। जिस समस्त पद में पूर्वपद और उत्तरपद दोनों अपना सीधा अर्थ छोड़कर किसी अन्य पद का विशेषण बन जाएँ, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। इसीलिए इसे अन्य पद प्रधान समास कहा जाता है।
उदाहरण के लिए बारहसिंगा में न "बारह" प्रधान है, न "सींग"। दोनों मिलकर एक विशेष हिरण का नाम बनाते हैं, जिसके बारह सींग (शाखाएँ) होते हैं।
पहचान की ट्रिक
- विग्रह में "जिसका, जिसके, जिसकी, जिसमें, जो" जैसे संबंधवाचक शब्द लगते हैं।
- विग्रह के अंत में "अर्थात्" लगाकर उस तीसरे का नाम बताया जाता है।
- समस्त पद प्रायः किसी व्यक्ति, जीव या वस्तु का नाम या उपनाम होता है।
- प्रश्न पूछिए: "यह शब्द किसके लिए आया है?" यदि उत्तर दोनों पदों से अलग कोई तीसरा है, तो बहुव्रीहि है।
बहुव्रीहि समास के उदाहरण (Bahuvrihi samas ke udaharan)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| पंकज | पंक (कीचड़) में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल |
| नीरज | नीर (जल) में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल |
| जलज | जल में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल |
| बारहसिंगा | बारह हैं सींग जिसके, अर्थात् एक प्रकार का हिरण |
| दिनकर | दिन को करता है जो, अर्थात् सूर्य |
| निशाचर | निशा (रात) में विचरण करता है जो, अर्थात् राक्षस या उल्लू |
| जलद | जल देता है जो, अर्थात् बादल |
| विषधर | विष को धारण करता है जो, अर्थात् साँप |
| वसुंधरा | वसु (धन) को धारण करती है जो, अर्थात् पृथ्वी |
| नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका, अर्थात् नीलकंठ पक्षी |
| मृगनयनी | मृग के समान नयन हैं जिसके, अर्थात् सुंदर आँखों वाली स्त्री |
| सुलोचना | सुंदर हैं लोचन (आँखें) जिसकी, अर्थात् कोई स्त्री |
| दुधमुँहा | दूध है मुँह में जिसके, अर्थात् छोटा बच्चा |
| चौलड़ी | चार हैं लड़ियाँ जिसमें, अर्थात् माला |
| सतखंडा | सात हैं खंड जिसमें, अर्थात् भवन |
| तिरंगा | तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज |
| महात्मा | महान है आत्मा जिसकी, अर्थात् कोई श्रेष्ठ व्यक्ति |
| अनाथ | नहीं है नाथ (सहारा) जिसका, अर्थात् बेसहारा व्यक्ति |
| दीर्घबाहु | दीर्घ (लंबी) हैं बाहें जिसकी, अर्थात् कोई बलवान व्यक्ति |
| कनकटा | कटे हैं कान जिसके, अर्थात् कोई व्यक्ति या पशु |
पुस्तकों में पीतांबर, लंबोदर, चतुर्भुज और दशानन जैसे शब्द भी बहुव्रीहि के उदाहरण के रूप में दिए जाते हैं। ये किसी पौराणिक व्यक्ति के उपनाम हैं, इसलिए इनका विग्रह भी उसी ढाँचे में होता है: "... है/हैं ... जिसका/जिसके, अर्थात् (उस व्यक्ति का नाम)"।
समास विग्रह का अभ्यास: स्टेप बाय स्टेप
मान लीजिए प्रश्न है: "दुधमुँहा का विग्रह कीजिए और समास बताइए"। इसे ऐसे हल करें:
- पद अलग करें: दूध + मुँह (आ प्रत्यय के साथ)।
- सीधा अर्थ देखें: क्या बात दूध की है या मुँह की? नहीं, बात एक छोटे बच्चे की है।
- साँचे में लिखें: दूध है मुँह में जिसके।
- तीसरा अर्थ जोड़ें: अर्थात् छोटा बच्चा। उत्तर: बहुव्रीहि समास।
इसी तरह वाक्यों में भी पहचान कीजिए: "आसमान में जलद छा गए" (बादल), "झाड़ी में एक विषधर दिखा" (साँप), "तालाब में नीरज खिले हैं" (कमल)। हर बार शब्द किसी तीसरी वस्तु का नाम बनकर आया है।
बहुव्रीहि समास के प्रकार (Bahuvrihi samas ke prakar)
स्कूली परीक्षा में प्रायः भेद नहीं पूछे जाते, पर बड़ी कक्षाओं की व्याकरण पुस्तकों में इसके चार प्रकार बताए गए हैं:
| प्रकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| समानाधिकरण बहुव्रीहि | दोनों पद एक ही विभक्ति में, एक विशेषण और एक विशेष्य | सुलोचना, महात्मा |
| व्यधिकरण बहुव्रीहि | दोनों पद अलग विभक्ति में | दुधमुँहा (दूध है मुँह में जिसके) |
| तुल्ययोग (सह) बहुव्रीहि | पहला पद "स" या "सह" (साथ) | सबल (बल के साथ है जो), सपरिवार |
| व्यतिहार बहुव्रीहि | आपसी लड़ाई या आदान-प्रदान का भाव | लाठालाठी (लाठियों से जो लड़ाई हुई), मुक्कामुक्की |
बहुव्रीहि और कर्मधारय में अंतर
यह परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। कर्मधारय समास में दूसरा पद प्रधान रहता है और अर्थ उसी पर रुकता है। बहुव्रीहि में अर्थ किसी तीसरे पर चला जाता है।
| शब्द | कर्मधारय | बहुव्रीहि |
|---|---|---|
| नीलकंठ | नीला है जो कंठ | नीला है कंठ जिसका, अर्थात् एक पक्षी |
| महात्मा | महान है जो आत्मा | महान है आत्मा जिसकी, अर्थात् श्रेष्ठ व्यक्ति |
| चंद्रमुखी | चंद्रमा के समान मुख वाली | चंद्रमा के समान मुख है जिसका, अर्थात् सुंदर स्त्री |
बहुव्रीहि और द्विगु में अंतर
दोनों में पहला पद संख्या हो सकता है। द्विगु समास में अर्थ समूह का होता है (तिरंगा = तीन रंगों का समूह), जबकि बहुव्रीहि में किसी विशेष वस्तु या व्यक्ति का (तिरंगा = तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज)। विग्रह में "का समूह" आए तो द्विगु, "जिसके ... अर्थात्" आए तो बहुव्रीहि।
सामान्य गलतियाँ
- विग्रह में "अर्थात्" के बाद का नाम छोड़ देना। "पंक में जन्म लेता है जो" अधूरा है, "अर्थात् कमल" जोड़िए।
- पंकज को उपपद तत्पुरुष लिख देना। जब पंकज का अर्थ कमल हो (अधिकतर यही होता है), तो बहुव्रीहि ही सही उत्तर है।
- हर संख्या वाले शब्द को द्विगु मान लेना। बारहसिंगा, चौलड़ी, सतखंडा बहुव्रीहि हैं।
याद रखने की ट्रिक
"दो शब्द, तीसरा अर्थ"। जहाँ दोनों शब्द मिलकर किसी तीसरे की पहचान बनाएँ, वहाँ बहुव्रीहि है। विग्रह का साँचा याद रखिए: "(विशेषता) है/हैं (वस्तु) जिसका/जिसके, अर्थात् (तीसरा)"। सभी भेदों की तुलना के लिए समास का पूरा पेज देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?
जिस समास में कोई भी पद प्रधान न हो और दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति, जीव या वस्तु की ओर संकेत करें, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे पंकज (पंक में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल)।
बहुव्रीहि समास के 10 उदाहरण बताइए।
पंकज, नीरज, जलज, बारहसिंगा, दिनकर, जलद, विषधर, वसुंधरा, दुधमुँहा और चौलड़ी बहुव्रीहि समास के उदाहरण हैं। इन सबके विग्रह में जिसका या जो और अर्थात् लगता है।
बहुव्रीहि समास की पहचान कैसे करें?
विग्रह में जिसका, जिसके, जिसकी या जो लगे और अंत में अर्थात् लगाकर किसी तीसरे का नाम आए, तो बहुव्रीहि समास है। यदि अर्थ दूसरे पद पर ही रुक जाए तो वह कर्मधारय या तत्पुरुष होगा।
बहुव्रीहि समास के कितने प्रकार होते हैं?
व्याकरण पुस्तकों में बहुव्रीहि के चार प्रकार बताए गए हैं: समानाधिकरण, व्यधिकरण, तुल्ययोग और व्यतिहार बहुव्रीहि। स्कूली परीक्षाओं में प्रायः केवल परिभाषा और उदाहरण पूछे जाते हैं।
पंकज में कौन सा समास है?
पंकज में बहुव्रीहि समास है। इसका विग्रह है: पंक (कीचड़) में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल। यहाँ पंक और ज दोनों मिलकर तीसरे अर्थ कमल की ओर संकेत करते हैं।