Karun ras ka udaharan हिंदी व्याकरण में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से है। जब किसी कविता में किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु, उससे हमेशा के लिए बिछड़ने, धन या मान की बड़ी हानि अथवा किसी असहाय की पीड़ा का ऐसा वर्णन हो कि पढ़ने वाले की आँखें भर आएँ, तो वहाँ करुण रस होता है। करुण रस रस के नौ मूल भेदों में तीसरा है।
करुण रस की परिभाषा (Karun ras ki paribhasha)
प्रिय व्यक्ति या प्रिय वस्तु के नाश, उसके सदा के लिए दूर हो जाने अथवा अनिष्ट की प्राप्ति से हृदय में जो शोक नामक स्थायी भाव जागता है, वह विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होकर करुण रस बन जाता है।
करुण रस का स्थायी भाव क्या है? करुण रस का स्थायी भाव शोक है।
करुण रस के अंग
| अंग | करुण रस में |
|---|---|
| स्थायी भाव | शोक |
| आलंबन | मृत या बिछड़ा हुआ प्रिय व्यक्ति, नष्ट हुई वस्तु, दुखी व्यक्ति |
| उद्दीपन | प्रिय की वस्तुएँ, उसकी याद, उसके गुणों का वर्णन, सूना घर |
| अनुभाव | रोना, विलाप करना, छाती पीटना, धरती पर गिरना, भाग्य को कोसना |
| संचारी भाव | विषाद, स्मृति, मोह, ग्लानि, चिंता, जड़ता, निर्वेद |
करुण रस की पहचान कैसे करें
- पंक्ति में रोना, विलाप, आँसू, हाय, बिलखना जैसे शब्द हों।
- किसी प्रिय की मृत्यु या कभी न लौटने वाली हानि का वर्णन हो।
- पढ़ने वाले के मन में गहरी उदासी और सहानुभूति जागे।
- फिर से मिलने की कोई आशा न हो। यही बात करुण को वियोग श्रृंगार रस से अलग करती है।
करुण रस के उदाहरण (Karun ras ke udaharan)
उदाहरण 1: तुलसीदास (चौपाई)
सोक बिकल सब रोवहिं रानी।
रूपु सीलु बलु तेजु बखानी॥
करहिं बिलाप अनेक प्रकारा।
परहिं भूमितल बारहिं बारा॥
व्याख्या: राजा की मृत्यु के बाद सभी रानियाँ शोक से व्याकुल होकर रो रही हैं। वे राजा के रूप, शील, बल और तेज का बखान करती हैं, तरह तरह से विलाप करती हैं और बार बार धरती पर गिर पड़ती हैं। मृत राजा आलंबन है, उनके गुणों का स्मरण उद्दीपन है, रोना और धरती पर गिरना अनुभाव हैं। यह सबसे प्रसिद्ध karun ras ka example है।
उदाहरण 2: तुलसीदास (भाई के मूर्च्छित होने का प्रसंग)
जथा पंख बिनु खग अति दीना।
मनि बिनु फनि करिबर कर हीना॥
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही।
जौं जड़ दैव जिआवै मोही॥
व्याख्या: मूर्च्छित भाई को देखकर बड़ा भाई विलाप करता है कि जैसे पंख के बिना पक्षी, मणि के बिना साँप और सूँड़ के बिना हाथी दीन हो जाता है, वैसा ही मेरा जीवन तुम्हारे बिना होगा। यह अंश कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक में भी है।
उदाहरण 3: भारतेंदु हरिश्चंद्र (भारत दुर्दशा)
रोवहु सब मिलि कै आवहु भारत भाई।
हा हा भारत दुर्दशा न देखी जाई॥
व्याख्या: कवि सब भारतवासियों को बुलाकर देश की दुर्दशा पर मिलकर रोने को कहता है। देश की बदहाली आलंबन है, "रोवहु" और "हा हा" अनुभाव हैं। यहाँ देश की हानि पर शोक है, इसलिए करुण रस है।
उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (karun ras ka udaharan easy)
उदाहरण:
आँगन सूना, खाट अकेली, चश्मा रखा पास।
दादी अब न लौटेंगी, फिर भी मन को आस॥
व्याख्या: दादी की मृत्यु के बाद सूना आँगन और उनका चश्मा उनकी याद दिलाते हैं (उद्दीपन)। स्मृति और विषाद संचारी भाव हैं। यह बच्चों के लिए आसान उदाहरण है।
उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (पक्षी)
उदाहरण:
आँधी में घोंसला उजड़ा, अंडे बिखरे धूल।
चिड़िया बैठी डाल पर, चुप, सब गाना भूल॥
व्याख्या: घोंसला उजड़ने से चिड़िया की हानि हुई है। उसका चुप बैठना और गाना भूल जाना अनुभाव हैं। असहाय प्राणी की पीड़ा पढ़कर मन में करुणा जागती है।
उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (किसान)
उदाहरण:
ओले गिरे, फसल सब बिछ गई, खेत बना शमशान।
सिर पकड़े मेड़ पर बैठा, रोता बूढ़ा किसान॥
व्याख्या: साल भर की मेहनत नष्ट होने पर किसान का सिर पकड़कर रोना अनुभाव है। प्रिय वस्तु (फसल) के नाश से शोक जागा है, इसलिए करुण रस है।
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "सोक बिकल सब रोवहिं रानी" में कौन सा रस है? उत्तर: करुण रस। स्थायी भाव: शोक। आश्रय: रानियाँ। आलंबन: मृत राजा। उद्दीपन: राजा के रूप, शील और बल का स्मरण। अनुभाव: रोना, विलाप करना, धरती पर गिरना। संचारी भाव: विषाद, स्मृति, मोह। इस क्रम में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
करुण रस और वियोग श्रृंगार में अंतर
| करुण रस | वियोग श्रृंगार |
|---|---|
| स्थायी भाव शोक | स्थायी भाव रति |
| प्रिय सदा के लिए खो गया, मिलने की आशा नहीं | प्रिय दूर है, मिलने की आशा बाकी है |
| किसी के भी प्रति (परिवार, देश, पशु पक्षी) | केवल प्रेमी प्रेमिका के बीच |
अभ्यास: रस पहचानिए
- "टूटा खिलौना हाथ में लेकर, रोया नन्हा बाल।" उत्तर: करुण रस (हल्का), क्योंकि प्रिय वस्तु के टूटने से शोक जागा।
- "परदेस गए पिया, लौटेंगे सावन में, गोरी गिनती दिन।" उत्तर: वियोग श्रृंगार, क्योंकि मिलने की आशा बाकी है।
- "युद्ध में खोया इकलौता बेटा, सूनी माँ की गोद।" उत्तर: करुण रस, क्योंकि पुत्र सदा के लिए खो गया।
याद रखने की ट्रिक
"करुण में कभी न लौटे, वियोग में लौट आने की आस।" करुण का स्थायी भाव लिखते समय "दुख" नहीं, शोक लिखें। दुख के पर्यायवाची (पीड़ा, क्लेश, विषाद) पंक्ति में मिलें, तो करुण रस की जाँच करें।
सामान्य गलतियाँ
- स्थायी भाव "करुणा" नहीं, शोक है। करुणा तो भाव का परिणाम है।
- हर आँसू करुण रस नहीं। खुशी के आँसू या विरह के आँसू अलग रस बताते हैं।
- संसार की नश्वरता से वैराग्य जागे तो वह शांत रस है, करुण नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करुण रस की परिभाषा क्या है?
किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु के नाश, मृत्यु या सदा के लिए बिछड़ने से हृदय में जो शोक जागता है, वहाँ करुण रस होता है। इसमें रोना, विलाप जैसे अनुभाव दिखते हैं।
करुण रस का स्थायी भाव क्या है?
करुण रस का स्थायी भाव शोक है। इसे "दुख" या "करुणा" लिखना पूरी तरह सही नहीं माना जाता।
करुण रस का आसान उदाहरण क्या है?
तुलसीदास की चौपाई "सोक बिकल सब रोवहिं रानी। रूपु सीलु बलु तेजु बखानी॥" सबसे आसान और प्रसिद्ध उदाहरण है। इसमें रानियाँ राजा की मृत्यु पर विलाप कर रही हैं।
करुण रस किसे कहते हैं, कक्षा 10 के लिए एक पंक्ति में बताइए।
प्रिय के सदा के लिए खो जाने से उत्पन्न शोक जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो उसे करुण रस कहते हैं।
करुण रस और वियोग श्रृंगार में क्या अंतर है?
करुण रस में प्रिय सदा के लिए खो जाता है और स्थायी भाव शोक होता है। वियोग श्रृंगार में प्रिय केवल दूर होता है, मिलने की आशा रहती है और स्थायी भाव रति होता है।