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अलंकार, रस, छंद

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मानवीकरण अलंकार (Manvikaran Alankar): परिभाषा और उदाहरण

जहाँ जड़ प्रकृति या निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय भावनाओं और क्रियाओं का आरोप किया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।

  • अलंकार, रस, छंद
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Manvikaran alankar में कवि प्रकृति को इंसान बना देता है। पेड़ बात करते हैं, नदी गाती है, हवा गुनगुनाती है और सूरज खिड़की से झाँकता है। मानवीकरण का अर्थ ही है मानव जैसा बना देना।

मानवीकरण अलंकार की परिभाषा

Manvikaran alankar ki paribhasha: जहाँ जड़ प्रकृति, पशु पक्षी या निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय भावनाओं, क्रियाओं और व्यवहार का आरोप किया जाए, यानी उन्हें मनुष्य की तरह बोलते, हँसते, रोते या काम करते दिखाया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है। यह अलंकार के अर्थालंकार भेद में गिना जाता है।

ध्यान दें: मानवीकरण पुराने संस्कृत आचार्यों की सूची का अलंकार नहीं है। यह अंग्रेज़ी के Personification से हिंदी में आया और आज स्कूली पुस्तकों में अर्थालंकार के रूप में पढ़ाया जाता है। फिर भी कबीर जैसे पुराने कवियों की कविता में इसके सुंदर उदाहरण मिलते हैं।

मानवीकरण अलंकार की पहचान

  • कर्ता कोई निर्जीव वस्तु या प्रकृति होती है: पेड़, नदी, हवा, सूरज, चाँद, मिट्टी, कली।
  • क्रिया मनुष्य वाली होती है: बोलना, कहना, पुकारना, हँसना, रोना, खेलना, बुलाना, झाँकना।
  • प्रकृति में मनुष्य जैसी भावना दिखती है: प्रेम, गुस्सा, दुख, खुशी, शर्म।
निर्जीव कर्तामानवीय क्रियावाक्य
कलियाँपुकारनाकलियन करी पुकार
मिट्टीकहनामांटी कहै कुम्हार सौं
किरणेंखेलनाखेल रही हैं जल थल में
सूरजझाँकना, जगानासूरज ने खिड़की से झाँककर मुझे जगाया

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण

Manvikaran alankar ke udaharan नीचे अर्थ सहित दिए गए हैं।

  1. माली आवत देखि के, कलियन करी पुकार। फूली फूली चुनि लई, काल्हि हमारी बार॥ (कबीर)
    कलियाँ मनुष्य की तरह पुकारकर कहती हैं कि खिले फूल चुन लिए गए, कल हमारी बारी है।
  2. मांटी कहै कुम्हार सौं, तू क्या रौंदै मोहि। इक दिन ऐसा होइगा, मैं रौंदूँगी तोहि॥ (कबीर)
    मिट्टी कुम्हार से बात कर रही है, यह मानवीय क्रिया है।
  3. पात झरंता यों कहै, सुनि तरुवर बनराइ। अब के बिछुड़े ना मिलैं, दूरि पड़ैंगे जाइ॥ (कबीर)
    गिरता हुआ पत्ता पेड़ से विदा लेते हुए मनुष्य की तरह बोलता है।
  4. चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल थल में। (मैथिलीशरण गुप्त, पंचवटी)
    चाँद की किरणों को बच्चों की तरह खेलते दिखाया गया है। इसमें अनुप्रास भी है।
  5. है बिखेर देती वसुंधरा मोती, सबके सोने पर। रवि बटोर लेता है उनको, सदा सवेरा होने पर॥ (मैथिलीशरण गुप्त, पंचवटी)
    धरती रात में ओस रूपी मोती बिखेरती है और सूरज सुबह उन्हें बटोर लेता है। दोनों मनुष्य की तरह काम कर रहे हैं।
  6. उदाहरण: सूरज ने खिड़की से झाँककर मुझे जगाया। (स्वरचित उदाहरण)
    झाँकना और जगाना मनुष्य की क्रियाएँ हैं।
  7. उदाहरण: हवा गुनगुनाती हुई खेतों के बीच से निकल गई। (स्वरचित उदाहरण)
    हवा को गुनगुनाते दिखाया गया है।
  8. उदाहरण: बूढ़ा बरगद अपनी लंबी बाँहें फैलाकर राहगीरों को छाँव में बुला रहा था। (स्वरचित उदाहरण)
    पेड़ को बूढ़ा, बाँहों वाला और बुलाने वाला बताया गया है।
  9. उदाहरण: नदी इठलाती, गाती हुई सागर से मिलने चली। (स्वरचित उदाहरण)
    इठलाना और गाना मानवीय भाव और क्रियाएँ हैं।

मानवीकरण और अन्य अलंकारों में अंतर

अलंकारक्या होता हैउदाहरण
मानवीकरणनिर्जीव को मनुष्य की तरह काम करते दिखानाहवा गुनगुना रही है।
रूपकएक वस्तु को दूसरी वस्तु ही मान लेनाजीवन एक नदी है।
उत्प्रेक्षामानो, जनु से संभावना बतानापेड़ ऐसे झूमे मानो नाच रहे हों।

एक पंक्ति में दो अलंकार भी हो सकते हैं। "पेड़ ऐसे झूमे मानो नाच रहे हों" में उत्प्रेक्षा मुख्य है, क्योंकि मानो शब्द है, पर पेड़ों के नाचने की कल्पना में मानवीकरण का भाव भी है।

कविता में मानवीकरण क्यों

मानवीकरण से प्रकृति हमारे परिवार जैसी लगने लगती है। जब कवि कहता है कि पत्ता पेड़ से विदा ले रहा है, तो हम उस दृश्य को अपने किसी प्रिय से बिछड़ने की तरह महसूस करते हैं। कबीर ने इसी तरीके से जीवन की नश्वरता जैसी गहरी बात बहुत सरल ढंग से समझा दी। बाल कविताओं में भी चंदा मामा, सूरज दादा, हवा रानी जैसे प्रयोग इसी अलंकार से आते हैं।

अभ्यास: मानवीकरण है या नहीं

वाक्यउत्तर
बादल गरज रहे हैं।नहीं, गरजना बादल की स्वाभाविक क्रिया है।
बादल गुस्से में धरती को डाँट रहे हैं।हाँ, गुस्सा और डाँटना मानवीय हैं।
फूल खिल गए।नहीं, खिलना फूल की स्वाभाविक क्रिया है।
फूल हँसकर भौंरों का स्वागत कर रहे हैं।हाँ, हँसना और स्वागत करना मानवीय क्रियाएँ हैं।

परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें

प्रश्न: "मांटी कहै कुम्हार सौं" में कौन सा अलंकार है?

आदर्श उत्तर: इसमें मानवीकरण अलंकार है, क्योंकि मिट्टी जैसी निर्जीव वस्तु को मनुष्य की तरह कुम्हार से बात करते दिखाया गया है। बोलना मनुष्य की क्रिया है।

याद रखने की ट्रिक

पंक्ति का कर्ता देखिए और क्रिया देखिए। कर्ता निर्जीव और क्रिया इंसानी हो, तो मानवीकरण। प्रकृति वर्णन वाली कविताओं में, खासकर श्रृंगार रस और ऋतु वर्णन में, यह अलंकार बहुत मिलता है।

सामान्य गलतियाँ

  • "पेड़ हिल रहा है" को मानवीकरण लिखना। हिलना पेड़ की अपनी स्वाभाविक क्रिया है, मानवीय नहीं।
  • पशु पक्षियों की स्वाभाविक क्रिया, जैसे "चिड़िया उड़ रही है", को मानवीकरण मानना। चिड़िया चिट्ठी लिखे, तब मानवीकरण होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानवीकरण अलंकार किसे कहते हैं?

जहाँ प्रकृति या निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय भावनाओं और क्रियाओं का आरोप किया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है। जैसे हवा गुनगुना रही है, कलियाँ पुकार रही हैं। यह अर्थालंकार माना जाता है।

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण बताइए।

कबीर का माली आवत देखि के कलियन करी पुकार, मांटी कहै कुम्हार सौं और पात झरंता यों कहै प्रसिद्ध उदाहरण हैं। सूरज ने खिड़की से झाँककर मुझे जगाया और हवा गुनगुनाती हुई निकल गई सरल उदाहरण हैं।

मानवीकरण अलंकार की पहचान क्या है?

पंक्ति में कर्ता कोई निर्जीव वस्तु या प्रकृति होती है और क्रिया मनुष्य जैसी होती है, जैसे बोलना, हँसना, बुलाना, खेलना। यही इसकी सबसे सरल पहचान है।

मानवीकरण अलंकार कहाँ से आया?

मानवीकरण अंग्रेज़ी के Personification से हिंदी में आया। यह संस्कृत आचार्यों की पुरानी सूची में नहीं है, पर आज स्कूली पुस्तकों में इसे अर्थालंकार के रूप में पढ़ाया जाता है।

मानवीकरण अलंकार के कितने भेद हैं?

स्कूली पुस्तकों में मानवीकरण के भेद नहीं पढ़ाए जाते, केवल इसकी पहचान और उदाहरण पूछे जाते हैं। परीक्षा में निर्जीव कर्ता और मानवीय क्रिया बताकर उत्तर लिखना काफी है।