Sandeh alankar ke udaharan समझने से पहले संदेह शब्द का अर्थ जान लें। संदेह का अर्थ है शक या दुविधा। जब दो वस्तुएँ इतनी मिलती जुलती हों कि देखने वाला तय ही न कर पाए कि सामने यह है या वह, तब संदेह अलंकार होता है। इसे ससंदेह अलंकार भी कहा जाता है।
संदेह अलंकार की परिभाषा
जहाँ रूप, रंग या गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का संदेह बना रहे और अंत तक निश्चय न हो पाए, वहाँ संदेह अलंकार होता है। यह अलंकार के अर्थालंकार भेद में आता है।
संदेह अलंकार की पहचान
- मन में "यह है या वह" का प्रश्न बना रहता है।
- वाक्य में प्रायः या, अथवा, कि, किंवा जैसे शब्द होते हैं। पुरानी कविता में किधौं, कैधौं, कै, धौं जैसे शब्द आते हैं।
- वाक्य अक्सर प्रश्न के रूप में होता है और उत्तर नहीं मिलता।
- दुविधा के कारण कोई पक्का काम नहीं होता, केवल सोच बनी रहती है।
संदेह अलंकार के उदाहरण
- किधौं मुकुर मैं लखत उझकि सब निज निज सोभा। कै प्रनवत जल जानि परम पावन फल लोभा॥ (भारतेंदु हरिश्चंद्र)
नदी किनारे झुके पेड़ों को देखकर कवि तय नहीं कर पाता कि वे दर्पण जैसे जल में अपनी शोभा देख रहे हैं, या पवित्र जल को प्रणाम कर रहे हैं। किधौं और कै शब्द संदेह बताते हैं। - सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है। सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है॥ (प्रचलित प्राचीन पद)
लंबी होती साड़ी को देखकर संदेह है कि साड़ी के बीच नारी है या नारी के बीच साड़ी। कि शब्द दुविधा बताता है। इसमें अनुप्रास भी है। - उदाहरण: यह मुख है या चंद्रमा, कुछ समझ नहीं आता। (स्वरचित उदाहरण)
मुख और चंद्रमा की समानता के कारण निश्चय नहीं हो पा रहा। - उदाहरण: अँधेरे कोने में पड़ी वह रस्सी है या साँप, मैं तय नहीं कर पाया। (स्वरचित उदाहरण)
रस्सी और साँप के बीच दुविधा बनी हुई है। - उदाहरण: दूर अँधेरे में चमकता वह जुगनू है या कोई तारा? (स्वरचित उदाहरण)
चमक की समानता के कारण संदेह है। - उदाहरण: पहाड़ की चोटी पर वह बादल है या बर्फ, कोई नहीं बता सका। (स्वरचित उदाहरण)
सफेद रंग की समानता के कारण दोनों में से एक तय नहीं हो रहा। - उदाहरण: बगीचे में कोयल गा रही है या कोई बाँसुरी बजा रहा है? (स्वरचित उदाहरण)
मधुर ध्वनि की समानता के कारण संदेह है।
संदेह और भ्रांतिमान अलंकार में अंतर
| आधार | संदेह अलंकार | भ्रांतिमान अलंकार |
|---|---|---|
| मन की दशा | दुविधा बनी रहती है: यह है या वह | मन पक्का हो जाता है, पर गलत वस्तु पर |
| निर्णय | कोई निर्णय नहीं होता | गलत निर्णय हो जाता है |
| क्रिया | प्रायः कोई क्रिया नहीं, केवल प्रश्न | भ्रम के अनुसार क्रिया भी हो जाती है |
| पहचान के शब्द | या, अथवा, कि, किधौं, कैधौं, कै | समझकर, जानकर, मानकर, भ्रम से |
| उदाहरण | यह रस्सी है या साँप? | रस्सी को साँप समझकर वह डरकर भाग गया। |
एक ही दृश्य से अंतर समझिए। "यह रस्सी है या साँप?" कहने वाला अभी सोच रहा है, यह संदेह है। "रस्सी को साँप समझकर वह भाग गया" में उसने पक्का मान लिया और भाग भी गया, यह भ्रांतिमान अलंकार है।
संदेह और उत्प्रेक्षा में अंतर
उत्प्रेक्षा में कवि जानता है कि वस्तु क्या है और केवल संभावना जताता है: "मुख मानो चंद्रमा है"। संदेह में देखने वाला सचमुच दुविधा में है: "यह मुख है या चंद्रमा?" उत्प्रेक्षा की पहचान मनु, मानो, जनु, जानो है, जबकि संदेह की पहचान या, अथवा, कि, किधौं है।
| अलंकार | एक ही दृश्य |
|---|---|
| उपमा | मुख चंद्रमा के समान सुंदर है। |
| उत्प्रेक्षा | मुख मानो चंद्रमा है। |
| संदेह | यह मुख है या चंद्रमा? |
| भ्रांतिमान | मुख को चंद्रमा समझकर चकोर उसे एकटक देखने लगा। |
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है" में कौन सा अलंकार है?
आदर्श उत्तर: इसमें संदेह अलंकार है, क्योंकि साड़ी और नारी के बीच यह निश्चय नहीं हो पा रहा कि कौन किसके बीच है। कि शब्द दुविधा को प्रकट करता है और अंत तक कोई निर्णय नहीं होता।
संदेह अलंकार कहाँ मिलता है
पुरानी कविता में संदेह का प्रयोग प्रायः सुंदरता के वर्णन में होता है। कवि कहता है कि नायिका का मुख इतना सुंदर है कि उसे देखकर चंद्रमा का संदेह होता है। प्रकृति वर्णन में भी यह अलंकार मिलता है, जैसे भारतेंदु ने नदी किनारे झुके पेड़ों के बारे में कई संभावनाएँ एक साथ रखीं। ऐसे पदों में किधौं और कै बार बार आते हैं।
अभ्यास: संदेह या भ्रांतिमान
| वाक्य | उत्तर |
|---|---|
| यह फूल है या तितली? | संदेह, क्योंकि दुविधा बनी है। |
| फूल को तितली समझकर बच्चा उसे पकड़ने दौड़ा। | भ्रांतिमान, क्योंकि भ्रम के साथ क्रिया हुई। |
| नदी में चमकती वह मछली है या चाँदी का टुकड़ा? | संदेह। |
| तालाब में चाँद की परछाईं को रोटी समझकर कुत्ता पानी में कूद पड़ा। | भ्रांतिमान। |
याद रखने की ट्रिक
"संदेह में सवाल, भ्रांति में बवाल।" संदेह में केवल सवाल रहता है, भ्रांतिमान में गलत समझकर कुछ कर बैठने का बवाल हो जाता है।
सामान्य गलतियाँ
- हर "या" वाले वाक्य को संदेह मानना। "चाय लोगे या दूध?" में समानता से पैदा हुई दुविधा नहीं है, इसलिए अलंकार नहीं है।
- संदेह और भ्रांतिमान को उलट देना। निर्णय हुआ या नहीं, यह देखकर ही उत्तर लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संदेह अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ अत्यधिक समानता के कारण यह निश्चय न हो पाए कि वस्तु यह है या वह, वहाँ संदेह अलंकार होता है। इसमें मन अंत तक दुविधा में रहता है। यह अर्थालंकार है।
संदेह अलंकार का उदाहरण बताइए।
सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है, और भारतेंदु की पंक्ति किधौं मुकुर मैं लखत उझकि सब निज निज सोभा प्रसिद्ध उदाहरण हैं। यह मुख है या चंद्रमा, यह सबसे सरल उदाहरण है।
संदेह अलंकार की पहचान के शब्द कौन से हैं?
संदेह अलंकार में या, अथवा, कि, किंवा जैसे शब्द आते हैं। पुरानी कविता में किधौं, कैधौं, कै और धौं शब्द संदेह बताते हैं।
संदेह और भ्रांतिमान में क्या अंतर है?
संदेह में दुविधा बनी रहती है और कोई निर्णय नहीं होता। भ्रांतिमान में एक वस्तु को पक्के तौर पर दूसरी समझ लिया जाता है और उसी के अनुसार क्रिया भी हो जाती है।
संदेह और उत्प्रेक्षा में क्या अंतर है?
उत्प्रेक्षा में कवि वस्तु को जानते हुए मानो, जनु जैसे शब्दों से केवल संभावना बताता है। संदेह में देखने वाला सचमुच तय नहीं कर पाता कि वस्तु यह है या वह।