Dravya vachak sangya यानी द्रव्यवाचक संज्ञा वह संज्ञा है जो किसी पदार्थ, धातु या द्रव्य का नाम बताती है। ऐसी चीज़ों को हम एक, दो, तीन करके गिन नहीं सकते, बल्कि लीटर, किलो, ग्राम या मीटर में नापते या तौलते हैं। जैसे दूध, पानी, सोना, आटा, तेल।
यह संज्ञा का पाँचवाँ भेद है। "द्रव्य" का अर्थ है पदार्थ या सामग्री। कुछ पुरानी किताबें इसे जातिवाचक संज्ञा का ही उपभेद मानती हैं, पर अधिकतर स्कूली किताबों में यह अलग भेद है।
द्रव्यवाचक संज्ञा की परिभाषा
परिभाषा: जिस संज्ञा शब्द से किसी ठोस, तरल या गैस पदार्थ, धातु या अधातु का बोध हो, जिसे गिना नहीं जा सकता बल्कि नापा या तौला जाता है, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
उदाहरण: "माँ ने दो लीटर दूध लिया।" यहाँ दूध को गिना नहीं गया, नापा गया है। इसलिए "दूध" द्रव्यवाचक संज्ञा है। पर "माँ ने दो गिलास लिए" में "गिलास" गिने गए हैं, इसलिए गिलास जातिवाचक संज्ञा है।
द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण
| पदार्थ का प्रकार | द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण | कैसे नापते हैं |
|---|---|---|
| धातुएँ | सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, पीतल, एल्युमिनियम | ग्राम, किलो |
| तरल पदार्थ | दूध, पानी, तेल, घी, दही, शहद, रस | लीटर, मिलीलीटर |
| अनाज और दालें | गेहूँ, चावल, बाजरा, दाल, आटा, मैदा | किलो, क्विंटल |
| रसोई की सामग्री | चीनी, नमक, गुड़, मसाला, हल्दी | ग्राम, किलो |
| ईंधन | कोयला, लकड़ी, पेट्रोल, मिट्टी का तेल | किलो, लीटर |
| प्राकृतिक पदार्थ | रेत, मिट्टी, पत्थर, बर्फ़, हवा, धुआँ | ट्रॉली, किलो |
| कपड़े की सामग्री | ऊन, कपास, रेशम, सूत | किलो, मीटर |
द्रव्यवाचक संज्ञा के 30 उदाहरण: एक नज़र में
दूध, पानी, घी, तेल, दही, शहद, सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, पीतल, कोयला, लकड़ी, गेहूँ, चावल, दाल, आटा, मैदा, चीनी, नमक, गुड़, हल्दी, रेत, मिट्टी, बर्फ़, ऊन, कपास, रेशम, पेट्रोल, हवा।
द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण वाक्य
- दादी रोज़ सुबह एक गिलास दूध पीती हैं।
- यह अँगूठी सोने की बनी है।
- बाज़ार से पाँच किलो आटा ले आओ।
- सब्ज़ी में नमक थोड़ा कम है।
- सर्दियों में माँ ऊन से स्वेटर बुनती हैं।
- मज़दूर ट्रक से रेत उतार रहे हैं।
- लोहे का दरवाज़ा बहुत मज़बूत है।
- हमें पानी बचाना चाहिए।
द्रव्यवाचक संज्ञा की पहचान
- इसे गिना नहीं जाता, केवल नापा या तौला जाता है। हम "तीन दूध" नहीं कहते, "तीन लीटर दूध" कहते हैं।
- सामान्यतः यह एकवचन में ही प्रयोग होती है: "दूध गिर गया", "सोना महँगा है"।
- जब अलग-अलग प्रकार बताने हों, तब बहुवचन बन सकता है: "बाज़ार में कई तरह के तेल मिलते हैं"। बहुवचन के नियम वचन पाठ में पढ़ें।
ठोस, तरल और गैस: तीनों रूपों में द्रव्य
द्रव्यवाचक संज्ञा केवल तरल चीज़ों तक सीमित नहीं है। पदार्थ तीनों रूपों में हो सकता है। ठोस रूप में लोहा, सोना, लकड़ी, कोयला, रेत आते हैं। तरल रूप में पानी, दूध, तेल, शहद आते हैं। गैस रूप में हवा, भाप, धुआँ, ऑक्सीजन आते हैं। तीनों की एक ही पहचान है: इन्हें गिनते नहीं, नापते या तौलते हैं।
द्रव्यवाचक संज्ञा का जातिवाचक की तरह प्रयोग
रोज़ की बोलचाल में कभी-कभी द्रव्यवाचक शब्द गिनती के साथ आ जाता है। जैसे होटल में कहा जाता है "दो चाय लाना"। यहाँ "चाय" का अर्थ चाय का पदार्थ नहीं, बल्कि "चाय के दो कप" है। इसलिए इस वाक्य में चाय जातिवाचक की तरह प्रयोग हुई है। इसी तरह "बाज़ार में कई तरह के तेल मिलते हैं" में तेल के अलग-अलग प्रकार गिने जा रहे हैं। मूल रूप में चाय और तेल द्रव्यवाचक संज्ञा ही हैं।
एक और उदाहरण देखिए: "माँ ने चावल बनाए" और "माँ ने दो किलो चावल खरीदे"। दोनों में चावल पदार्थ है जिसे तौला जाता है, इसलिए यह द्रव्यवाचक संज्ञा है। "चावल" का रूप एकवचन और बहुवचन में एक जैसा रहता है।
द्रव्य और उससे बनी वस्तु में अंतर
यह प्रश्न परीक्षा में बहुत आता है। द्रव्य से बनी चीज़ गिनी जा सकती है, इसलिए वह जातिवाचक संज्ञा होती है।
| द्रव्यवाचक संज्ञा | उससे बनी वस्तु (जातिवाचक) |
|---|---|
| सोना | अँगूठी, कंगन, हार |
| लकड़ी | कुर्सी, मेज़, दरवाज़ा |
| आटा | रोटी, पूरी |
| ऊन | स्वेटर, मोज़े, टोपी |
| दूध | मिठाई, खीर |
| मिट्टी | घड़ा, दीया, गमला |
याद रखने की ट्रिक
"गिनो तो जाति, तौलो तो द्रव्य।" अगर किसी चीज़ के लिए किलो, लीटर, ग्राम या मीटर बोलना पड़े, तो वह द्रव्यवाचक संज्ञा है। अगर एक, दो, तीन गिन सकें, तो वह जातिवाचक है।
सामान्य गलतियाँ
- "सोना" शब्द में भ्रम: "सोना महँगा हो गया" में सोना धातु है, इसलिए द्रव्यवाचक संज्ञा है। पर "रात को जल्दी सोना चाहिए" में सोना क्रिया है।
- "रोटी" को द्रव्यवाचक मानना: रोटी गिनी जाती है, इसलिए जातिवाचक है। आटा द्रव्यवाचक है।
- "दूधों", "पानियों" लिखना: सामान्य वाक्यों में द्रव्यवाचक संज्ञा का बहुवचन नहीं बनाते।
अभ्यास प्रश्न
नीचे के वाक्यों से द्रव्यवाचक संज्ञा छाँटिए। उत्तर कोष्ठक में हैं।
- हलवाई ने घी में जलेबी तली। (घी)
- किसान ने दस क्विंटल गेहूँ बेचा। (गेहूँ)
- चाँदी की पायल बहुत सुंदर है। (चाँदी)
- बच्चे बर्फ़ से खेल रहे हैं। (बर्फ़)
- दुकानदार ने तराज़ू पर दो किलो चीनी तौली। (चीनी)
- पुरानी खदानों से कोयला निकाला जाता था। (कोयला)
- माली ने गमले में नई मिट्टी डाली। (मिट्टी)
- सुबह की ताज़ी हवा सेहत के लिए अच्छी है। (हवा)
संज्ञा के अन्य भेद: समूहवाचक संज्ञा और भाववाचक संज्ञा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
द्रव्यवाचक संज्ञा किसे कहते हैं?
जिस संज्ञा से किसी पदार्थ, धातु या द्रव्य का बोध हो, जिसे गिना नहीं जा सकता बल्कि नापा या तौला जाता है, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे दूध, पानी, सोना, आटा और तेल।
द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण क्या हैं?
दूध, पानी, घी, तेल, शहद, सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, कोयला, गेहूँ, चावल, आटा, चीनी, नमक, रेत, ऊन और कपास द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।
द्रव्यवाचक संज्ञा की पहचान कैसे करें?
जिस चीज़ को गिना नहीं जा सकता, बल्कि किलो, लीटर, ग्राम या मीटर में नापा या तौला जाता है, वह द्रव्यवाचक संज्ञा है। सामान्यतः यह एकवचन में प्रयोग होती है।
क्या द्रव्यवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा का भेद है?
कुछ किताबों में संज्ञा के 3 भेद बताए जाते हैं और द्रव्यवाचक को जातिवाचक का उपभेद माना जाता है। अधिकतर स्कूली किताबें 5 भेद मानती हैं, जिनमें द्रव्यवाचक संज्ञा अलग भेद है।
सोना कौन-सी संज्ञा है?
धातु के अर्थ में "सोना" द्रव्यवाचक संज्ञा है, क्योंकि इसे तौला जाता है। पर "रात को सोना" वाले अर्थ में यह क्रिया है, संज्ञा नहीं। सोने से बनी अँगूठी जातिवाचक संज्ञा है।