Samas kise kahate hain: समास का अर्थ है संक्षेप या छोटा करना। जब दो या दो से अधिक शब्द आपस में मिलकर एक नया और छोटा शब्द बनाते हैं, तथा बीच के विभक्ति चिह्न या जोड़ने वाले शब्द हट जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। जैसे: राजा का पुत्र = राजपुत्र, रसोई के लिए घर = रसोईघर।
समास की परिभाषा (Samas ki paribhasha)
दो या दो से अधिक पदों के मेल से बने नए सार्थक शब्द को समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं। समास बनाने की इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। समास से भाषा छोटी, सुंदर और प्रभावशाली बनती है। जो बात चार शब्दों में कही जाती, वह एक शब्द में कह दी जाती है।
समास को समझने के लिए चार शब्द याद रखिए:
- पूर्वपद: समस्त पद का पहला शब्द। जैसे राजपुत्र में "राज"।
- उत्तरपद: समस्त पद का दूसरा शब्द। जैसे राजपुत्र में "पुत्र"।
- समस्त पद: दोनों पदों के मेल से बना नया शब्द। जैसे राजपुत्र।
- समास विग्रह: समस्त पद को तोड़कर फिर से पूरा अर्थ लिखना। जैसे राजपुत्र = राजा का पुत्र।
समास के कितने भेद होते हैं (Samas ke bhed)
हिंदी व्याकरण में समास के 6 भेद होते हैं। पहचान का आधार यह है कि समस्त पद में कौन सा पद प्रधान (मुख्य) है।
| क्रम | समास का भेद | प्रधान पद | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|---|---|
| 1 | अव्ययीभाव समास | पूर्वपद (अव्यय) | प्रतिदिन | प्रत्येक दिन |
| 2 | तत्पुरुष समास | उत्तरपद | राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| 3 | कर्मधारय समास | उत्तरपद | नीलकमल | नीला है जो कमल |
| 4 | द्विगु समास | उत्तरपद (पूर्वपद संख्या) | चौराहा | चार राहों का समूह |
| 5 | द्वंद्व समास | दोनों पद | माता-पिता | माता और पिता |
| 6 | बहुव्रीहि समास | कोई तीसरा (अन्य) पद | बारहसिंगा | बारह हैं सींग जिसके, अर्थात् एक हिरण |
ध्यान दें: संस्कृत व्याकरण में समास के मुख्य चार भेद माने जाते हैं (अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वंद्व, बहुव्रीहि) और कर्मधारय तथा द्विगु को तत्पुरुष का ही उपभेद माना जाता है। हिंदी की स्कूली पुस्तकों और परीक्षाओं में छह भेद पढ़ाए जाते हैं, इसलिए उत्तर में छह भेद ही लिखें।
1. अव्ययीभाव समास
जिस समास का पहला पद अव्यय हो और पूरा समस्त पद भी अव्यय की तरह काम करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), आजन्म (जन्म से लेकर), भरपेट (पेट भरकर)।
2. तत्पुरुष समास
जिसमें उत्तरपद प्रधान हो और बीच का कारक चिह्न (को, से, के लिए, का, में, पर) हट जाए, वह तत्पुरुष समास है। जैसे गगनचुंबी (गगन को चूमने वाला), देशभक्ति (देश के लिए भक्ति)।
3. कर्मधारय समास
जिसमें एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य हो, या एक उपमान और दूसरा उपमेय हो। जैसे महापुरुष (महान है जो पुरुष), चरणकमल (कमल के समान चरण)।
4. द्विगु समास
जिसका पहला पद संख्यावाचक हो और पूरा पद किसी समूह का बोध कराए। जैसे पंचतंत्र (पाँच तंत्रों का समूह), सप्ताह (सात दिनों का समूह)।
5. द्वंद्व समास
जिसमें दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर "और", "या", "अथवा" लगे। ऐसे शब्दों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) लगता है। जैसे भाई-बहन, सुख-दुख, दाल-रोटी।
6. बहुव्रीहि समास
जिसमें कोई भी पद प्रधान न हो और दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति, वस्तु या जीव की ओर संकेत करें। जैसे पंकज (पंक में जन्म लेता है जो, अर्थात् कमल)।
समास विग्रह कैसे करें: स्टेप बाय स्टेप (Samas vigrah)
परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है "समस्त पद का विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए"। इसके लिए ये चार कदम अपनाइए:
- पद अलग करें: समस्त पद को दो सार्थक शब्दों में बाँटिए। जैसे रसोईघर = रसोई + घर।
- संबंध पहचानें: सोचिए कि दोनों शब्दों के बीच क्या संबंध है। घर किसके लिए है? रसोई के लिए।
- लुप्त शब्द जोड़ें: जो विभक्ति चिह्न या शब्द हट गया था, उसे वापस लिखिए: रसोई के लिए घर।
- समास का नाम लिखें: "के लिए" संप्रदान कारक का चिह्न है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष समास है।
| समस्त पद | समास विग्रह | समास |
|---|---|---|
| राजपुत्र | राजा का पुत्र | तत्पुरुष (संबंध) |
| बैलगाड़ी | बैलों से चलने वाली गाड़ी | तत्पुरुष (करण) |
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन | अव्ययीभाव |
| नीलगाय | नीली है जो गाय | कर्मधारय |
| चंद्रमुखी | चंद्रमा के समान मुख वाली | कर्मधारय |
| चौराहा | चार राहों का समूह | द्विगु |
| सुख-दुख | सुख और दुख | द्वंद्व |
| बारहसिंगा | बारह हैं सींग जिसके, अर्थात् एक प्रकार का हिरण | बहुव्रीहि |
कर्मधारय, बहुव्रीहि और द्विगु में अंतर कैसे पहचानें
यह परीक्षा का सबसे ज़रूरी बिंदु है, क्योंकि एक ही शब्द कभी कर्मधारय, कभी द्विगु और कभी बहुव्रीहि हो सकता है। फैसला शब्द के अर्थ से होता है, बनावट से नहीं।
- कर्मधारय: पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है और अर्थ उसी वस्तु पर रुकता है। विग्रह में "है जो" या "के समान" आता है। नीलकमल = नीला है जो कमल (बात कमल की ही है)।
- द्विगु: पहला पद संख्या है और अर्थ समूह का है। विग्रह में "का समूह" आता है। तिरंगा = तीन रंगों का समूह।
- बहुव्रीहि: दोनों पद मिलकर किसी तीसरे की ओर इशारा करते हैं। विग्रह में "जिसका, जिसके, जिसकी" और अंत में "अर्थात्" आता है। तिरंगा = तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज।
| शब्द | कर्मधारय / द्विगु विग्रह | बहुव्रीहि विग्रह |
|---|---|---|
| पीतांबर | पीला है जो अंबर (कर्मधारय) | पीले हैं अंबर जिसके, अर्थात् एक प्रसिद्ध पौराणिक नायक |
| नीलकंठ | नीला है जो कंठ (कर्मधारय) | नीला है कंठ जिसका, अर्थात् नीलकंठ पक्षी या एक पौराणिक नाम |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समूह, जैसे गणित की आकृति (द्विगु) | चार हैं भुजाएँ जिसकी, अर्थात् एक पौराणिक नाम |
| तिरंगा | तीन रंगों का समूह (द्विगु) | तीन हैं रंग जिसके, अर्थात् राष्ट्रध्वज |
| महात्मा | महान है जो आत्मा (कर्मधारय) | महान है आत्मा जिसकी, अर्थात् कोई श्रेष्ठ व्यक्ति |
Pitambar mein kaun sa samas hai: यदि केवल पीले वस्त्र की बात हो तो कर्मधारय, और यदि यह किसी विशेष व्यक्ति का नाम बनकर आए तो बहुव्रीहि। Neelkanth mein kaun sa samas hai: नीला कंठ अर्थ हो तो कर्मधारय, नीले कंठ वाले किसी जीव या व्यक्ति का नाम हो तो बहुव्रीहि। दशानन और लंबोदर जैसे नाम सूचक शब्द प्रायः बहुव्रीहि में गिने जाते हैं।
संधि और समास में अंतर
विद्यार्थी अक्सर संधि और समास को एक समझ लेते हैं। दोनों में मेल होता है, पर मेल किसका होता है, यही अंतर है।
| संधि | समास |
|---|---|
| दो वर्णों (ध्वनियों) का मेल होता है। | दो या अधिक पदों (शब्दों) का मेल होता है। |
| मेल के कारण वर्णों में परिवर्तन होता है। | बीच के विभक्ति चिह्न या शब्द लुप्त हो जाते हैं। |
| संधि को तोड़ना संधि विच्छेद कहलाता है। | समास को तोड़ना समास विग्रह कहलाता है। |
| विच्छेद में + चिह्न लगता है: विद्या + आलय। | विग्रह में पूरा अर्थ लिखा जाता है: विद्या के लिए आलय। |
| भेद: स्वर, व्यंजन, विसर्ग संधि। | भेद: छह (अव्ययीभाव से बहुव्रीहि तक)। |
उदाहरण के लिए विद्यालय शब्द में संधि भी है और समास भी। संधि विच्छेद: विद्या + आलय (दीर्घ संधि)। समास विग्रह: विद्या के लिए आलय (संप्रदान तत्पुरुष)।
याद रखने की ट्रिक
- पहला पद अव्यय (प्रति, यथा, आ, भर, बे) दिखे: अव्ययीभाव।
- बीच में को, से, के लिए, का, में, पर छिपा हो: तत्पुरुष।
- "है जो" या "के समान" लगे: कर्मधारय।
- पहला पद गिनती हो और "का समूह" लगे: द्विगु।
- "और", "या" लगे, बीच में योजक चिह्न हो: द्वंद्व।
- "जिसका, जिसके" और "अर्थात्" लगे: बहुव्रीहि।
सामान्य गलतियाँ
- हर संख्या वाले शब्द को द्विगु लिख देना। यदि अर्थ किसी तीसरे की ओर जाए तो वह बहुव्रीहि है।
- विग्रह में केवल + चिह्न लगा देना। वह संधि विच्छेद है, समास विग्रह नहीं।
- द्वंद्व समास में योजक चिह्न छोड़ देना। माता-पिता, भाई-बहन लिखें।
कक्षा 9 और कक्षा 10 (samas class 10) की परीक्षा में प्रायः समस्त पद देकर विग्रह और भेद पूछे जाते हैं। ऊपर की तालिकाएँ और ट्रिक इन्हीं प्रश्नों के लिए हैं। हर भेद के 15 से 20 उदाहरण उसके अलग पेज पर दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
समास के कितने भेद होते हैं?
हिंदी व्याकरण में समास के 6 भेद होते हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि। संस्कृत परंपरा में मुख्य भेद चार माने जाते हैं, जिनमें कर्मधारय और द्विगु तत्पुरुष के उपभेद हैं। स्कूली परीक्षा में छह भेद लिखें।
समास विग्रह किसे कहते हैं?
समस्त पद को तोड़कर उसके पदों और लुप्त विभक्ति चिह्नों के साथ पूरा अर्थ लिखना समास विग्रह कहलाता है। जैसे राजपुत्र का विग्रह है राजा का पुत्र। विग्रह से ही समास का भेद पहचाना जाता है।
पीतांबर में कौन सा समास है?
पीतांबर में कर्मधारय समास है जब इसका अर्थ केवल पीला वस्त्र हो: पीला है जो अंबर। जब यह शब्द पीले वस्त्र पहनने वाले किसी विशेष व्यक्ति के नाम के रूप में आए, तब बहुव्रीहि समास माना जाता है।
संधि और समास में क्या अंतर है?
संधि में दो वर्णों का मेल होता है और वर्णों में बदलाव होता है, जबकि समास में दो पदों का मेल होता है और बीच के विभक्ति चिह्न हट जाते हैं। संधि को तोड़ना संधि विच्छेद और समास को तोड़ना समास विग्रह कहलाता है।
देशांतर में कौन सा समास है?
देशांतर का विग्रह है: अन्य देश। इसे कर्मधारय समास माना जाता है, क्योंकि अंतर (अन्य) शब्द देश की विशेषता बताता है। कुछ पुस्तकें इसे दूसरे अर्थ में अलग भेद में भी रखती हैं, इसलिए अपनी पाठ्यपुस्तक का उत्तर भी देख लें।