Hasya ras ka udaharan समझने के लिए पहले उसकी पहचान जानिए। जब किसी कविता में किसी की अजीब वेशभूषा, उलटी सीधी बातें, मूर्खता भरी हरकतें या बेढंगी चाल का ऐसा वर्णन हो कि पढ़ने वाले को हँसी आ जाए, तो वहाँ हास्य रस होता है। हास्य रस रस के नौ मूल भेदों में दूसरा है और बच्चों को सबसे ज़्यादा पसंद आता है।
हास्य रस की परिभाषा (Hasya ras ki paribhasha)
किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति की विकृत आकृति, विचित्र वेशभूषा, अटपटी बातें और चेष्टाएँ देखकर या सुनकर हृदय में स्थित हास नामक स्थायी भाव जागता है। यही हास जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो हास्य रस कहलाता है।
हास्य रस का स्थायी भाव है: हास (हँसी)।
हास्य रस के अंग
| अंग | हास्य रस में |
|---|---|
| स्थायी भाव | हास |
| आलंबन | विचित्र वेश वाला व्यक्ति, मूर्ख पात्र, अटपटी वस्तु |
| उद्दीपन | उसकी अजीब बातें, चाल, कपड़े, हरकतें |
| अनुभाव | मुसकराना, ठहाका लगाना, पेट पकड़कर हँसना, आँखें मिचमिचाना |
| संचारी भाव | हर्ष, चपलता, उत्सुकता, आलस्य |
हास्य रस की पहचान
- पंक्ति पढ़कर मुसकान या हँसी आए।
- किसी पात्र की मूर्खता, उलटी बातें या अजीब रूप का मज़ेदार वर्णन हो।
- व्यंग्य (किसी बुराई पर चुटकी) भी अक्सर हास्य रस में गिना जाता है।
- मन में दुख, डर या क्रोध नहीं, केवल हल्कापन और मनोरंजन हो।
हास्य रस के उदाहरण (Hasya ras ke udaharan)
उदाहरण 1: भारतेंदु हरिश्चंद्र (अंधेर नगरी)
अंधेर नगरी चौपट राजा।
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा॥
व्याख्या: ऐसी नगरी जहाँ सब्ज़ी और मिठाई एक ही भाव, एक टके सेर बिकती है। मूर्ख राजा के राज्य की यह उलटी व्यवस्था सुनकर हँसी आती है। मूर्ख राजा आलंबन है, अटपटी व्यवस्था उद्दीपन है। यह पंक्ति आज एक लोकोक्ति बन चुकी है।
उदाहरण 2: भारतेंदु हरिश्चंद्र (चूरन का लटका)
चूरन अमले जो सब खावैं।
दूनी रिश्वत तुरत पचावैं॥
चूरन पुलिस वाले खाते।
सब कानून हजम कर जाते॥
व्याख्या: चूरन वाला कहता है कि उसका चूरन खाकर अफ़सर दुगनी रिश्वत पचा जाते हैं और पुलिस वाले पूरा कानून हजम कर जाते हैं। यहाँ व्यंग्य के साथ हँसी है, इसलिए हास्य रस है।
उदाहरण 3: मौलिक उदाहरण (विद्यालय)
उदाहरण:
गुरुजी बोले, "होमवर्क लाओ", मुन्ना बोला, "खाया।"
"किसने खाया?" "मेरी बकरी, उसको गणित भाया।"
व्याख्या: गृहकार्य न करने का अजीब बहाना सुनकर हँसी आती है। मुन्ना आलंबन है, उसका बहाना उद्दीपन है, सुनने वालों का ठहाका अनुभाव है।
उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (वेशभूषा)
उदाहरण:
सिर पर हाँडी, पाँव में जूते उलटे पहने लाला।
छाता ताने धूप ढूँढ़ते, निकले बाँध दुशाला॥
व्याख्या: सिर पर हाँडी, उलटे जूते और गर्मी में दुशाला ओढ़कर निकले लाला जी की विचित्र वेशभूषा हँसी जगाती है। विकृत वेश हास्य रस का सबसे सामान्य उद्दीपन है।
उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (पेटू)
उदाहरण:
दस लड्डू, बीस जलेबी खाकर बोले चाचा।
"आज ज़रा कम भूख लगी है, थोड़ा और बचा था?"
व्याख्या: इतना खाने के बाद भी कम भूख की बात करना अतिशयोक्ति भरा मज़ाक है। यहाँ हास के साथ अतिशयोक्ति अलंकार भी है।
उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (कंजूस)
उदाहरण:
कंजूस सेठ ने दीया बुझाया, बोले, "बातें अँधेरे में हों।"
"तेल बचेगा, कान तो खुले हैं, आँखों का क्या काम यहाँ?"
व्याख्या: तेल बचाने के लिए अँधेरे में बात करने की कंजूसी भरी सलाह हँसाती है। कंजूस सेठ आलंबन है, उसकी बात उद्दीपन है।
हास्य रस और व्यंग्य में अंतर
हास्य और व्यंग्य दोनों में हँसी आती है, पर दोनों का उद्देश्य अलग है। शुद्ध हास्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन है, जैसे पेटू चाचा या उलटे जूते वाले लाला जी। व्यंग्य में हँसी के पीछे किसी सामाजिक बुराई पर चोट छिपी रहती है, जैसे भारतेंदु के चूरन वाले छंद में रिश्वतखोरी पर चोट है। परीक्षा में दोनों को हास्य रस का उदाहरण माना जाता है, पर उत्तर में यह लिख देना अच्छा रहता है कि पंक्ति में व्यंग्य भी है।
| शुद्ध हास्य | व्यंग्य |
|---|---|
| उद्देश्य केवल हँसाना | हँसाते हुए सुधार की सीख देना |
| हल्का और मीठा | तीखा और चुभने वाला |
| उदाहरण: पेटू चाचा की भूख | उदाहरण: रिश्वत पचाने वाला चूरन |
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
मान लीजिए प्रश्न है: "अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा" में कौन सा रस है? उत्तर इस क्रम में लिखें: रस: हास्य रस। स्थायी भाव: हास। आलंबन: मूर्ख राजा और उसकी नगरी। उद्दीपन: सब चीज़ों का एक ही भाव। अनुभाव: पाठक का हँसना। इस तरह चारों अंग लिखने से उत्तर पूरा और प्रभावशाली बनता है।
हास्य रस के भेद
कुछ पुस्तकों में हँसी के स्तर के अनुसार हास्य के छह भेद बताए गए हैं: स्मित (हल्की मुसकान), हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित और अतिहसित (ठहाका)। कक्षा 10 की परीक्षा में प्रायः भेद नहीं, केवल परिभाषा, स्थायी भाव और उदाहरण पूछे जाते हैं।
याद रखने की ट्रिक
"हँसी से हास, हास से हास्य।" स्थायी भाव और रस के नाम लगभग एक जैसे हैं, बस "हास" में "य" जोड़ दीजिए, रस बन जाएगा। हास्य का विलोम रुदन है, और रुदन वाला रस करुण है।
सामान्य गलतियाँ
- स्थायी भाव "हास्य" नहीं, हास लिखें। हास्य तो रस का नाम है।
- हर व्यंग्य हास्य नहीं होता। अगर व्यंग्य पढ़कर गुस्सा आए, तो वहाँ रौद्र रस की छाया हो सकती है।
- किसी की विकलांगता या दुख पर हँसी वाले उदाहरण न लिखें, परीक्षक इन्हें अच्छा नहीं मानते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हास्य रस की परिभाषा क्या है?
किसी व्यक्ति की विचित्र वेशभूषा, आकृति, बातें या चेष्टाएँ देखकर मन में जो हँसी उत्पन्न होती है, वहाँ हास्य रस होता है। इसका स्थायी भाव हास है।
हास्य रस का स्थायी भाव क्या है?
हास्य रस का स्थायी भाव हास है। परीक्षा में इसे "हास्य" लिखना गलत माना जाता है, सही उत्तर हास है।
हास्य रस का सबसे आसान उदाहरण कौन सा है?
भारतेंदु की पंक्ति "अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा" सबसे आसान उदाहरण है। सब्ज़ी और मिठाई का एक ही भाव होना हँसी जगाता है।
हास्य रस की पहचान कैसे करें?
पंक्ति पढ़कर हँसी या मुसकान आए, किसी पात्र की मूर्खता, अजीब वेश या उलटी बातों का वर्णन हो, तो हास्य रस समझें। अनुभाव के रूप में ठहाका, मुसकान आदि दिखते हैं।
हास्य रस के कितने भेद हैं?
कुछ पुस्तकों में हँसी के स्तर के आधार पर छह भेद दिए गए हैं: स्मित, हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित और अतिहसित। स्कूली परीक्षा में मुख्य रूप से परिभाषा और उदाहरण पूछे जाते हैं।