Upma alankar अर्थालंकार का सबसे पहला और सबसे सरल भेद है। उपमा का अर्थ है तुलना। जब हम कहते हैं कि बच्चे का मुख चाँद जैसा सुंदर है, तो हम उपमा अलंकार का ही प्रयोग करते हैं।
उपमा अलंकार की परिभाषा
Upma alankar ki paribhasha: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना उसके रूप, रंग, गुण या स्वभाव के आधार पर किसी दूसरी अधिक प्रसिद्ध वस्तु से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। उपमा में दोनों वस्तुएँ अलग रहती हैं, केवल उनमें समानता बताई जाती है। यह अलंकार के अर्थालंकार भेद में आता है।
उपमा अलंकार के चार अंग
उदाहरण वाक्य "मुख चंद्रमा के समान सुंदर है" से चारों अंग समझिए।
| अंग | अर्थ | उदाहरण में |
|---|---|---|
| उपमेय | जिसकी तुलना की जाए | मुख |
| उपमान | जिससे तुलना की जाए | चंद्रमा |
| वाचक शब्द | समानता बताने वाला शब्द | के समान |
| साधारण धर्म | दोनों में मिलने वाला गुण | सुंदर |
उपमा अलंकार की पहचान
- वाक्य में सा, सी, से, सम, समान, सरिस, सदृश, तुल्य, जैसा, जैसी, ज्यों जैसे वाचक शब्द होते हैं।
- दो वस्तुएँ अलग अलग दिखाई देती हैं, एक को दूसरी मान नहीं लिया जाता।
- "थोड़ा सा", "बहुत सी" जैसे प्रयोग में सा, सी मात्रा बताते हैं, तुलना नहीं। वहाँ उपमा नहीं होती।
उपमा अलंकार के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| पूर्णोपमा | चारों अंग मौजूद हों | पीपर पात सरिस मन डोला |
| लुप्तोपमा | एक या अधिक अंग छिपे हों | कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा (साधारण धर्म "कठोर" छिपा है) |
| मालोपमा | एक उपमेय के लिए कई उपमान | दादी का स्नेह धूप सा गरम, चाँदनी सा शीतल और शहद सा मीठा है। |
उपमा अलंकार के उदाहरण
Upma alankar ke udaharan नीचे दिए गए हैं। हर उदाहरण में उपमेय, उपमान और वाचक शब्द बताया गया है।
- पीपर पात सरिस मन डोला। (तुलसीदास)
मन (उपमेय) की तुलना पीपल के पत्ते (उपमान) से सरिस (वाचक) द्वारा की गई है, डोलना साधारण धर्म है। यह पूर्णोपमा है। - कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा। (तुलसीदास)
वचन की तुलना करोड़ों वज्रों से सम शब्द द्वारा की गई है। कठोरता का गुण लिखा नहीं गया, इसलिए लुप्तोपमा है। - करि कर सरिस सुभग भुजदंडा। (तुलसीदास)
भुजाओं की तुलना हाथी की सूँड़ से सरिस शब्द द्वारा की गई है, सुभग (सुंदर) साधारण धर्म है। - पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात। देखत ही छिप जाएगा, ज्यों तारा परभात॥ (कबीर)
मनुष्य के जीवन की तुलना पानी के बुलबुले और सुबह के तारे से की गई है, अस और ज्यों वाचक शब्द हैं। - उदाहरण: बच्चे की हँसी फूल सी कोमल है। (स्वरचित उदाहरण)
हँसी उपमेय, फूल उपमान, सी वाचक और कोमल साधारण धर्म है। - उदाहरण: माँ का मन सागर सा गहरा होता है। (स्वरचित उदाहरण)
मन की तुलना सागर से सा वाचक द्वारा की गई है। - उदाहरण: झील का जल दर्पण के समान निर्मल था। (स्वरचित उदाहरण)
जल उपमेय, दर्पण उपमान, के समान वाचक, निर्मल साधारण धर्म। - उदाहरण: उसकी आवाज़ कोयल जैसी मीठी है। (स्वरचित उदाहरण)
आवाज़ की तुलना कोयल से जैसी शब्द द्वारा की गई है। - उदाहरण: दादी का स्नेह धूप सा गरम, चाँदनी सा शीतल और शहद सा मीठा है। (स्वरचित उदाहरण)
एक उपमेय (स्नेह) के तीन उपमान हैं, इसलिए यह मालोपमा है।
उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा में अंतर
ये तीनों अलंकार तुलना पर आधारित हैं, इसलिए परीक्षा में इनका अंतर बार बार पूछा जाता है।
| अलंकार | मूल भाव | वाचक शब्द | एक ही बात तीन ढंग से |
|---|---|---|---|
| उपमा | समानता (दोनों अलग, पर मिलते जुलते) | सा, सी, से, सम, समान, सरिस, जैसा | मुख चंद्रमा के समान सुंदर है। |
| रूपक | अभेद (दोनों एक ही मान लिए गए) | कोई वाचक नहीं, कभी रूपी या योजक चिह्न | मुख चंद्रमा है। / मुख-चंद्र चमक रहा है। |
| उत्प्रेक्षा | संभावना (ऐसा लगता है मानो) | मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ, जनहुँ | मुख मानो चंद्रमा है। |
सीधा नियम: समानता हो तो उपमा, एकरूपता हो तो रूपक, और संभावना हो तो उत्प्रेक्षा।
परीक्षा में उपमा का उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "पीपर पात सरिस मन डोला" में कौन सा अलंकार है? स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर: इस पंक्ति में उपमा अलंकार है। यहाँ मन उपमेय है, पीपल का पत्ता उपमान है, सरिस वाचक शब्द है और डोलना साधारण धर्म है। जैसे हल्की हवा में पीपल का पत्ता काँपता है, वैसे ही मन डोल उठा। चारों अंग मौजूद हैं, इसलिए यह पूर्णोपमा है।
इस ढाँचे में लिखा उत्तर छोटा भी है और पूरा भी। पहले अलंकार का नाम, फिर चारों अंग, फिर एक पंक्ति में भाव। यही क्रम हर उपमा वाले प्रश्न में अपनाइए।
रोज़ की बोलचाल में उपमा
हम रोज़ उपमा बोलते हैं, बस ध्यान नहीं देते। "बर्फ जैसा ठंडा पानी", "शेर जैसा बहादुर", "मक्खन सा मुलायम" सब उपमा के ही उदाहरण हैं। इन वाक्यों से अभ्यास करने पर कविता में उपमा पहचानना आसान हो जाता है।
याद रखने की ट्रिक
"सा, सी, से, सम, समान, उपमा की यही पहचान।" यह पंक्ति याद कर लीजिए। साथ में यह भी याद रखिए कि उपमा का उत्तर लिखते समय चारों अंग बताने से पूरे अंक मिलते हैं।
सामान्य गलतियाँ
- "छोटा सा घर" में सा देखकर उपमा लिख देना। यहाँ तुलना नहीं है।
- उपमेय और उपमान को उलट देना। जिसकी बात हो रही है वह उपमेय है, जिससे तुलना हो रही है वह उपमान है।
- "मानो" वाली पंक्ति को उपमा लिख देना। मानो, जनु संभावना बताते हैं, इसलिए वहाँ उत्प्रेक्षा होती है।
अन्य अर्थालंकार भी पढ़ें: अतिशयोक्ति अलंकार और मानवीकरण अलंकार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उपमा अलंकार किसे कहते हैं?
जहाँ किसी वस्तु की तुलना रूप, रंग या गुण के आधार पर किसी दूसरी प्रसिद्ध वस्तु से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। इसमें सा, सी, से, सम, समान जैसे वाचक शब्द आते हैं। यह अर्थालंकार है।
उपमा अलंकार के कितने अंग होते हैं?
उपमा के चार अंग होते हैं: उपमेय, उपमान, वाचक शब्द और साधारण धर्म। मुख चंद्रमा के समान सुंदर है में मुख उपमेय, चंद्रमा उपमान, के समान वाचक और सुंदर साधारण धर्म है।
उपमा अलंकार के 10 उदाहरण कहाँ से याद करें?
पीपर पात सरिस मन डोला, कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा, करि कर सरिस सुभग भुजदंडा और कबीर का पानी केरा बुदबुदा सबसे प्रचलित उदाहरण हैं। इनके साथ फूल सी कोमल हँसी, सागर सा गहरा मन जैसे सरल वाक्य भी उपमा के अच्छे उदाहरण हैं।
उपमा अलंकार के भेद कौन से हैं?
उपमा के मुख्य भेद पूर्णोपमा और लुप्तोपमा हैं। पूर्णोपमा में चारों अंग होते हैं, लुप्तोपमा में कोई अंग छिपा होता है। एक उपमेय के कई उपमान हों तो मालोपमा कहलाती है।
उपमा और रूपक में क्या अंतर है?
उपमा में उपमेय और उपमान की समानता बताई जाती है और वाचक शब्द रहता है। रूपक में उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है और वाचक शब्द नहीं रहता, जैसे मुख-चंद्र।