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कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas): परिभाषा, पहचान और उदाहरण

जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा विशेष्य हो, या उपमान और उपमेय का संबंध हो, वह कर्मधारय समास है; जैसे नीलकमल = नीला है जो कमल।

  • समास
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Karmadharaya samas वह समास है जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, या एक पद उपमान और दूसरा उपमेय होता है। इसमें उत्तरपद प्रधान रहता है। जैसे: नीला है जो कमल = नीलकमल, कमल के समान चरण = चरणकमल।

कर्मधारय समास की परिभाषा (Karmadharaya samas kise kahate hain)

जिस समस्त पद के दोनों पदों में विशेषण और विशेष्य का संबंध हो, या उपमान और उपमेय (तुलना) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और पहला पद उसकी विशेषता बताता है।

  • विशेषण: जो शब्द किसी की विशेषता बताए, जैसे नीला, महान, काला। (देखें विशेषण)
  • विशेष्य: जिसकी विशेषता बताई जाए, जैसे कमल, पुरुष, मिर्च।
  • उपमान: जिससे तुलना की जाए, जैसे चंद्रमा, कमल।
  • उपमेय: जिसकी तुलना की जाए, जैसे मुख, चरण।

उपमान और उपमेय की यही जोड़ी उपमा अलंकार में भी पढ़ाई जाती है, इसलिए दोनों विषय साथ में दोहराना आसान रहता है।

पहचान की ट्रिक

कर्मधारय का विग्रह करते समय प्रायः ये शब्द लगते हैं:

संबंधविग्रह में लगने वाले शब्दउदाहरण
विशेषण और विशेष्यहै जो, हैं जोमहापुरुष = महान है जो पुरुष
उपमेय और उपमानके समानचंद्रमुख = चंद्र के समान मुख
रूपक (एक को दूसरा मान लेना)रूपीविद्याधन = विद्या रूपी धन

दूसरी बात: अर्थ उसी वस्तु पर रुकना चाहिए जिसका नाम दूसरे पद में है। नीलकमल अंत में कमल ही है। यदि अर्थ किसी तीसरे पर चला जाए, तो वह बहुव्रीहि समास बन जाता है।

कर्मधारय समास के भेद

स्कूली पुस्तकों में कर्मधारय के दो मुख्य रूप पढ़ाए जाते हैं:

  1. विशेषता वाचक (विशेषण पूर्वपद): पहला पद विशेषण होता है। जैसे नीलगगन, सज्जन, महात्मा, कालीमिर्च।
  2. उपमान वाचक: एक पद की तुलना दूसरे से होती है। जैसे चरणकमल, मृगनयन, चंद्रमुखी, कमलनयन।

बड़ी कक्षाओं की कुछ व्याकरण पुस्तकें इसके चार भेद भी बताती हैं (विशेषणपूर्वपद, विशेष्यपूर्वपद, विशेषणोभयपद, विशेष्योभयपद), पर कक्षा 10 तक ऊपर के दो रूप पर्याप्त हैं।

कर्मधारय समास के उदाहरण (Karmadharaya samas ke udaharan)

समस्त पदसमास विग्रहसंबंध
नीलकमलनीला है जो कमलविशेषण-विशेष्य
महात्मामहान है जो आत्माविशेषण-विशेष्य
महापुरुषमहान है जो पुरुषविशेषण-विशेष्य
कृष्णसर्पकृष्ण (काला) है जो सर्पविशेषण-विशेष्य
नीलगायनीली है जो गायविशेषण-विशेष्य
कालीमिर्चकाली है जो मिर्चविशेषण-विशेष्य
नीलगगननीला है जो गगनविशेषण-विशेष्य
सज्जनसत् (अच्छा) है जो जनविशेषण-विशेष्य
परमानंदपरम है जो आनंदविशेषण-विशेष्य
अधमराआधा है जो मराविशेषण-विशेष्य
महाराजामहान है जो राजाविशेषण-विशेष्य
पीतांबरपीला है जो अंबरविशेषण-विशेष्य
चरणकमलकमल के समान चरणउपमेय-उपमान
चंद्रमुखीचंद्रमा के समान मुख वालीउपमेय-उपमान
मृगनयनमृग के समान नयनउपमेय-उपमान
कमलनयनकमल के समान नयनउपमेय-उपमान
देहलतादेह रूपी लतारूपक
क्रोधाग्निक्रोध रूपी अग्निरूपक
विद्याधनविद्या रूपी धनरूपक
भवसागरभव (संसार) रूपी सागररूपक

वाक्यों में कर्मधारय समास

समस्त पद को वाक्य में पहचानना भी अभ्यास का हिस्सा है। नीचे के वाक्यों में मोटे अक्षरों वाले शब्द कर्मधारय समास हैं:

  • तालाब में नीलकमल खिले हुए हैं। (नीला है जो कमल)
  • दादी सब्ज़ी में कालीमिर्च डालती हैं। (काली है जो मिर्च)
  • खेत के पास एक नीलगाय दिखाई दी। (नीली है जो गाय)
  • शिक्षक ने कहा कि विद्याधन सबसे बड़ा धन है। (विद्या रूपी धन)
  • गुस्से में व्यक्ति क्रोधाग्नि में जलता रहता है। (क्रोध रूपी अग्नि)
  • बच्चे की आँखें कमलनयन जैसी सुंदर हैं। (कमल के समान नयन)

अभ्यास के लिए कोई भी समस्त पद लीजिए और पूछिए: क्या पहला शब्द दूसरे का गुण बता रहा है, या उसकी तुलना किसी से हो रही है? यदि हाँ, और अर्थ उसी वस्तु पर रुकता है, तो उत्तर कर्मधारय है। यदि पहला शब्द कोई गिनती है, तो द्विगु की ओर देखिए, और यदि अर्थ किसी और व्यक्ति या जीव की ओर जाता है, तो बहुव्रीहि की ओर।

कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर

यह प्रश्न परीक्षा में बार-बार आता है। एक ही शब्द दोनों समासों में आ सकता है, फैसला अर्थ से होता है।

कर्मधारयबहुव्रीहि
उत्तरपद प्रधान होता है।कोई पद प्रधान नहीं, तीसरा अर्थ प्रधान होता है।
विग्रह में "है जो" या "के समान" लगता है।विग्रह में "जिसका, जिसके, जिसकी" और "अर्थात्" लगता है।
महात्मा = महान है जो आत्मामहात्मा = महान है आत्मा जिसकी, अर्थात् कोई श्रेष्ठ व्यक्ति
नीलकंठ = नीला है जो कंठनीलकंठ = नीला है कंठ जिसका, अर्थात् एक पक्षी

इसी तरह पीतांबर का अर्थ केवल पीला वस्त्र हो तो कर्मधारय है, और यदि शब्द किसी विशेष व्यक्ति के नाम के रूप में प्रयोग हो तो बहुव्रीहि।

कर्मधारय और द्विगु में अंतर

दोनों में पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है। अंतर यह है कि द्विगु समास में पहला पद हमेशा संख्या होता है और अर्थ समूह का होता है (सप्ताह = सात दिनों का समूह)। कर्मधारय में पहला पद संख्या नहीं, गुण बताता है (नीला, महान, काला)। इसलिए कहा जाता है कि हर द्विगु एक तरह से कर्मधारय भी है, पर हर कर्मधारय द्विगु नहीं होता।

सामान्य गलतियाँ

  • "commerdhariy" या "karmdharay" वर्तनी: सही हिंदी वर्तनी है कर्मधारय। रोमन में karmadharaya लिखा जाता है।
  • उपमान वाले शब्द को संबंध तत्पुरुष मान लेना: चरणकमल का विग्रह "चरण का कमल" नहीं, "कमल के समान चरण" है।
  • विग्रह में "अर्थात्" जोड़ देना: अर्थात् लगते ही वह बहुव्रीहि हो जाता है।

पूरे विषय की तस्वीर के लिए समास के सभी भेद एक साथ पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्मधारय समास किसे कहते हैं?

जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा विशेष्य हो, या दोनों में उपमान और उपमेय का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें उत्तरपद प्रधान होता है। जैसे नीलकमल और चरणकमल।

कर्मधारय समास के 10 उदाहरण बताइए।

नीलकमल, महात्मा, महापुरुष, कृष्णसर्प, नीलगाय, कालीमिर्च, सज्जन, चरणकमल, चंद्रमुखी और विद्याधन कर्मधारय समास के उदाहरण हैं। इनके विग्रह ऊपर की तालिका में दिए गए हैं।

कर्मधारय समास की पहचान कैसे करें?

विग्रह करते समय यदि बीच में है जो, के समान या रूपी लगाना पड़े और अर्थ दूसरे पद पर ही रुके, तो कर्मधारय समास है। अर्थ किसी तीसरे पर जाए तो बहुव्रीहि होगा।

चरणकमल में कौन सा समास है?

चरणकमल में कर्मधारय समास है। इसका विग्रह है: कमल के समान चरण। यहाँ चरण उपमेय और कमल उपमान है, इसलिए यह उपमान वाचक कर्मधारय है।

कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में क्या अंतर है?

कर्मधारय में उत्तरपद प्रधान होता है और विग्रह में है जो या के समान लगता है। बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं और विग्रह में जिसका तथा अर्थात् लगता है।