Dwand samas (द्वंद्व समास, dvandva samas) वह समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर उनके बीच "और", "या", "अथवा" या "आदि" जैसे योजक शब्द लगते हैं। समस्त पद लिखते समय दोनों पदों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) लगाया जाता है। जैसे: माता-पिता = माता और पिता।
द्वंद्व समास की परिभाषा (What is dwand samas in hindi)
"द्वंद्व" का अर्थ है जोड़ा या युग्म। जिस समास में दोनों पद समान रूप से महत्वपूर्ण हों, कोई पद दूसरे के अधीन न हो, और दोनों को जोड़ने वाला शब्द समस्त पद बनाते समय लुप्त हो जाए, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। तत्पुरुष में केवल दूसरा पद प्रधान होता है, पर द्वंद्व में दोनों पद बराबर होते हैं।
पहचान की ट्रिक
- समस्त पद के बीच योजक चिह्न (-) लगा हो: भाई-बहन, सुख-दुख।
- विग्रह में "और", "या", "अथवा" लगाने पर अर्थ पूरा हो जाए।
- दोनों पद प्रायः एक ही वर्ग के होते हैं: दोनों संज्ञा (दाल-रोटी), दोनों विशेषण (भला-बुरा) या दोनों क्रिया (आना-जाना)।
- कई जोड़े विलोम शब्द होते हैं (दिन-रात, पाप-पुण्य, लाभ-हानि) और कई पर्यायवाची या मिलते-जुलते शब्द (धन-दौलत, कपड़ा-लत्ता)।
द्वंद्व समास के भेद (Dwand samas ke prakar)
द्वंद्व समास के तीन भेद होते हैं:
| भेद | विग्रह में शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. इतरेतर द्वंद्व | और | माता-पिता = माता और पिता |
| 2. वैकल्पिक द्वंद्व | या, अथवा | पाप-पुण्य = पाप या पुण्य |
| 3. समाहार द्वंद्व | आदि, इत्यादि (समूह का भाव) | दाल-रोटी = दाल, रोटी आदि |
1. इतरेतर द्वंद्व
इसमें दोनों पद "और" से जुड़े होते हैं और दोनों का अलग-अलग अस्तित्व बना रहता है। समस्त पद प्रायः बहुवचन में प्रयोग होता है। जैसे: भाई-बहन, माता-पिता, गाय-बैल, देश-विदेश।
2. वैकल्पिक द्वंद्व
इसमें दोनों पदों के बीच "या" अथवा "अथवा" का भाव होता है, यानी दोनों में से एक का चुनाव। प्रायः दोनों पद विपरीत अर्थ वाले होते हैं। जैसे: पाप-पुण्य, भला-बुरा, लाभ-हानि, थोड़ा-बहुत।
3. समाहार द्वंद्व
इसमें दोनों पद मिलकर अपने जैसी और चीज़ों के पूरे समूह का अर्थ देते हैं। विग्रह में "आदि" लगता है। जैसे: दाल-रोटी (दाल, रोटी आदि भोजन), हाथ-पाँव (हाथ, पाँव आदि अंग), रुपया-पैसा (रुपया, पैसा आदि धन)। जब कोई कहता है "हाथ-पाँव ठंडे हो गए", तो उसका अर्थ केवल हाथ और पाँव नहीं, पूरा शरीर होता है।
द्वंद्व समास के 20 उदाहरण (Dwand samas ke udaharan)
| समस्त पद | समास विग्रह | भेद |
|---|---|---|
| माता-पिता | माता और पिता | इतरेतर |
| भाई-बहन | भाई और बहन | इतरेतर |
| गाय-बैल | गाय और बैल | इतरेतर |
| दिन-रात | दिन और रात | इतरेतर |
| सुख-दुख | सुख और दुख | इतरेतर |
| अन्न-जल | अन्न और जल | इतरेतर |
| देश-विदेश | देश और विदेश | इतरेतर |
| आना-जाना | आना और जाना | इतरेतर |
| नर-नारी | नर और नारी | इतरेतर |
| पाप-पुण्य | पाप या पुण्य | वैकल्पिक |
| भला-बुरा | भला या बुरा | वैकल्पिक |
| लाभ-हानि | लाभ या हानि | वैकल्पिक |
| थोड़ा-बहुत | थोड़ा या बहुत | वैकल्पिक |
| सच-झूठ | सच या झूठ | वैकल्पिक |
| ऊँच-नीच | ऊँच या नीच | वैकल्पिक |
| दाल-रोटी | दाल, रोटी आदि | समाहार |
| हाथ-पाँव | हाथ, पाँव आदि | समाहार |
| रुपया-पैसा | रुपया, पैसा आदि | समाहार |
| कपड़ा-लत्ता | कपड़ा, लत्ता आदि | समाहार |
| घर-आँगन | घर, आँगन आदि | समाहार |
ध्यान दें: एक ही शब्द को कुछ पुस्तकें इतरेतर और कुछ समाहार में रखती हैं (जैसे दाल-रोटी)। परीक्षा में विग्रह के अनुसार भेद लिखें: "और" लगाया हो तो इतरेतर, "आदि" लगाया हो तो समाहार।
द्वंद्व समास के और उदाहरण
अभ्यास के लिए कुछ और शब्द, जिनका विग्रह आप स्वयं "और", "या" या "आदि" लगाकर कर सकते हैं:
- और (इतरेतर): राजा-रानी, गुरु-शिष्य, पति-पत्नी, खेत-खलिहान, नदी-नाले, फल-फूल, दूध-दही, आटा-दाल, ठंडा-गरम, जल-वायु।
- या (वैकल्पिक): हार-जीत, जीवन-मरण, आगे-पीछे, छोटा-बड़ा, कम-ज़्यादा, सही-गलत।
- आदि (समाहार): बाल-बच्चे, नाते-रिश्तेदार, साग-सब्ज़ी, चाय-पानी, धन-दौलत।
इन शब्दों को देखकर एक बात समझ में आती है: द्वंद्व समास के अधिकतर शब्द जोड़े में बोले जाते हैं और हमारी रोज़ की भाषा का हिस्सा हैं। घर, बाज़ार और स्कूल की बातचीत में इन्हें पहचानने का अभ्यास कीजिए।
वाक्यों में द्वंद्व समास
- हमें अपने माता-पिता का आदर करना चाहिए।
- जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं।
- किसान दिन-रात खेत में मेहनत करता है।
- व्यापार में लाभ-हानि दोनों होते हैं।
- सर्दी में हाथ-पाँव ठंडे हो जाते हैं।
द्वंद्व समास और योजक चिह्न
द्वंद्व समास के समस्त पद में योजक चिह्न (-) लगाना सही लेखन माना जाता है। यह चिह्न बताता है कि बीच में "और" या "या" छिपा है। संस्कृत से आए कुछ शब्दों में योजक चिह्न नहीं लगता, क्योंकि वहाँ संधि भी हो जाती है: धर्माधर्म (धर्म या अधर्म) और शीतोष्ण (शीत और उष्ण)।
द्वंद्व और अव्ययीभाव के दोहराव में अंतर
धीरे-धीरे, घर-घर, दिन-दिन जैसे शब्दों में भी योजक चिह्न होता है, पर ये द्वंद्व नहीं हैं। इनमें एक ही शब्द दोहराया गया है और पूरा पद अव्यय की तरह काम करता है, इसलिए ये अव्ययीभाव समास में आते हैं। द्वंद्व में दो अलग शब्द होते हैं।
सामान्य गलतियाँ
- योजक चिह्न छोड़ देना: "मातापिता" नहीं, "माता-पिता" लिखें।
- पुनरुक्त शब्दों को द्वंद्व मान लेना: धीरे-धीरे द्वंद्व नहीं, अव्ययीभाव है।
- विग्रह में केवल + चिह्न लगाना: माता + पिता संधि जैसा लगता है। सही विग्रह "माता और पिता" है।
याद रखने की ट्रिक: "दो बराबर, बीच में और या या"। जहाँ दोनों पद बराबर हों और बीच में "और" या "या" छिपा हो, वहाँ द्वंद्व समास है। सभी छह भेदों की तुलना के लिए समास का मुख्य पेज देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
द्वंद्व समास किसे कहते हैं?
जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर उनके बीच और, या, अथवा अथवा आदि लगे, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। समस्त पद में प्रायः योजक चिह्न लगता है, जैसे माता-पिता और सुख-दुख।
द्वंद्व समास के कितने प्रकार होते हैं?
द्वंद्व समास के तीन प्रकार होते हैं: इतरेतर द्वंद्व (और), वैकल्पिक द्वंद्व (या) और समाहार द्वंद्व (आदि)। जैसे भाई-बहन इतरेतर, पाप-पुण्य वैकल्पिक और दाल-रोटी समाहार द्वंद्व है।
द्वंद्व समास के 5 उदाहरण बताइए।
माता-पिता (माता और पिता), दिन-रात (दिन और रात), पाप-पुण्य (पाप या पुण्य), लाभ-हानि (लाभ या हानि) और हाथ-पाँव (हाथ, पाँव आदि) द्वंद्व समास के उदाहरण हैं।
समाहार द्वंद्व समास क्या है?
जिस द्वंद्व समास में दोनों पद मिलकर अपने जैसी और चीज़ों के समूह का बोध कराएँ, उसे समाहार द्वंद्व कहते हैं। इसके विग्रह में आदि लगता है। जैसे दाल-रोटी = दाल, रोटी आदि।
द्वंद्व शब्द का अर्थ क्या है?
द्वंद्व शब्द का अर्थ है जोड़ा या युग्म। बोलचाल में इसका अर्थ संघर्ष या दुविधा भी होता है, जैसे मन का द्वंद्व। व्याकरण में यह उस समास का नाम है जिसमें दो बराबर पद जुड़ते हैं।