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वात्सल्य रस (Vatsalya Ras): परिभाषा, स्थायी भाव और उदाहरण

जहाँ माता पिता या बड़ों का अपनी संतान अथवा छोटे बच्चों के प्रति स्नेह और ममता का वर्णन हो, वहाँ वात्सल्य रस होता है। इसका स्थायी भाव वत्सलता (वात्सल्य) है।

  • अलंकार, रस, छंद
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Vatsalya ras ka udaharan पढ़ते ही माँ की ममता याद आ जाती है। जब किसी कविता में माँ का बच्चे को लोरी सुनाना, उसके तुतलाते बोलों पर रीझना, उसके घुटनों के बल चलने पर खुश होना या उसके दूर जाने पर व्याकुल होना वर्णित हो, तो वहाँ वात्सल्य रस होता है। "वत्स" का अर्थ है बच्चा या बछड़ा, और वत्स के प्रति प्रेम को वात्सल्य कहते हैं। यह रस के ग्यारह प्रकारों में दसवाँ है।

वात्सल्य रस की परिभाषा (Vatsalya ras ki paribhasha)

माता पिता, गुरु या किसी बड़े का अपनी संतान, शिष्य या छोटे बच्चों के प्रति जो स्नेह होता है, वह वत्सलता नामक स्थायी भाव है। यही वत्सलता जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होती है, तो वात्सल्य रस कहलाती है।

वात्सल्य रस का स्थायी भाव: वत्सलता (संतान विषयक रति)। कुछ पुस्तकें इसे "वात्सल्य" ही लिखती हैं।

वात्सल्य को अलग रस क्यों माना गया

पहले आचार्य बच्चों के प्रति प्रेम को श्रृंगार रस के भीतर ही गिनते थे, क्योंकि दोनों का आधार रति (प्रेम) है। आचार्य विश्वनाथ ने साहित्य दर्पण में वात्सल्य को अलग रस का दर्जा दिया। हिंदी में सूरदास ने बाल लीला और माँ की ममता के इतने सुंदर पद लिखे कि उन्हें "वात्सल्य रस का सम्राट" कहा जाता है। तुलसीदास ने भी बालरूप के मनोहर चित्र खींचे हैं। इन कवियों के प्रसिद्ध पद पाठ्यपुस्तकों में पढ़े जा सकते हैं; यहाँ हम माँ और बच्चे पर आधारित सरल उदाहरणों से रस समझेंगे।

वात्सल्य रस के अंग

अंगवात्सल्य रस में
स्थायी भाववत्सलता
आश्रयमाता, पिता, दादी, नानी, गुरु
आलंबनबच्चा, संतान, शिष्य
उद्दीपनबच्चे की तोतली बोली, मुसकान, घुटनों के बल चलना, रूठना, शरारतें
अनुभावगोद में लेना, चूमना, लोरी गाना, बलैया लेना, पुचकारना, सिर सहलाना
संचारी भावहर्ष, गर्व, उत्सुकता, चिंता, शंका, स्मृति

वात्सल्य रस के भेद

  1. संयोग वात्सल्य: जब बच्चा पास हो और माता पिता उसकी बाल क्रीड़ाओं पर रीझें।
  2. वियोग वात्सल्य: जब बच्चा दूर चला जाए और माता पिता उसकी याद में व्याकुल हों।

वात्सल्य रस की पहचान

  • पंक्ति में माँ, मैया, लल्ला, मुन्ना, लाल, गोद, लोरी, पालना, आँचल जैसे शब्द हों।
  • प्रेम बड़े का छोटे के प्रति हो, बराबर वालों में नहीं।
  • बच्चे की भोली बातों या शरारतों पर लाड़ उमड़े।

वात्सल्य रस के उदाहरण (Vatsalya ras ke udaharan)

उदाहरण 1: लोकगीत (लोरी)

चंदा मामा दूर के, पुए पकाएँ बूर के।
आप खाएँ थाली में, मुन्ने को दें प्याली में॥

व्याख्या: यह पीढ़ियों से गाई जा रही लोकप्रिय लोरी है। माँ बच्चे को बहलाने के लिए चंदा मामा की कहानी सुनाती है। माँ आश्रय है, मुन्ना आलंबन है, लोरी गाना अनुभाव है, हर्ष संचारी भाव है।

उदाहरण 2: मौलिक उदाहरण (संयोग वात्सल्य)

उदाहरण:
घुटनों के बल सरके लल्ला, किलक किलक मुसकाए।
माँ ने दौड़ उठाया गोदी, चूम चूम बलि जाए॥

व्याख्या: बच्चे का घुटनों के बल चलना और किलकना उद्दीपन है। माँ का दौड़कर गोद में उठाना और चूमना अनुभाव हैं। यह सबसे सरल vatsalya ras ka udaharan है।

उदाहरण 3: मौलिक उदाहरण (तोतली बोली)

उदाहरण:
"माँ, मुझको चंदा ला दो" तुतलाकर जब बोला।
हँसकर माँ ने थाली में जल भर, चाँद दिखाया भोला॥

व्याख्या: बच्चे की चाँद पाने की ज़िद और तोतली बोली उद्दीपन हैं। माँ का प्यार से थाली के पानी में चाँद दिखाना अनुभाव है।

उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (पहला कदम)

उदाहरण:
डगमग डगमग पहला पग, पापा ने बाँहें खोलीं।
गिरता उठता आ पहुँचा तो, खुशियों की भर दी झोली॥

व्याख्या: यहाँ आश्रय पिता हैं। बच्चे का पहला कदम उद्दीपन है, बाँहें खोलना अनुभाव है, हर्ष और गर्व संचारी भाव हैं।

उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (वियोग वात्सल्य)

उदाहरण:
बेटा गया शहर पढ़ने को, सूनी हो गई खाट।
हर शाम बैठ देहरी पर, माँ जोहे उसकी बाट॥

व्याख्या: संतान के दूर जाने से माँ का मन व्याकुल है। सूनी खाट उद्दीपन है, देहरी पर बैठकर राह देखना अनुभाव है, स्मृति और चिंता संचारी भाव हैं। यह वियोग वात्सल्य है।

उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (दादी)

उदाहरण:
दादी ने पल्लू से पोंछा, मिट्टी सना वह गाल।
"कितना खेलेगा रे पगले," कहकर चूमा भाल॥

व्याख्या: वात्सल्य केवल माँ तक सीमित नहीं। दादी का पोते से लाड़ भी वात्सल्य रस है। मिट्टी सना चेहरा उद्दीपन है, पोंछना और माथा चूमना अनुभाव हैं।

वात्सल्य रस और श्रृंगार रस में अंतर

वात्सल्य रसश्रृंगार रस
प्रेम बड़े का छोटे के प्रतिप्रेम नायक और नायिका के बीच
स्थायी भाव वत्सलतास्थायी भाव रति
लोरी, गोद, लाड़, बलैयामिलन, विरह, लज्जा, नैन

परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें

किसी पद में माँ और बच्चे का प्रेम दिखे, तो इस क्रम में लिखें: रस: वात्सल्य रस। स्थायी भाव: वत्सलता। आश्रय: माँ। आलंबन: बच्चा। उद्दीपन: बच्चे की बाल क्रीड़ा या भोली बातें। अनुभाव: गोद में लेना, चूमना, लोरी गाना। संचारी भाव: हर्ष, गर्व।

याद रखने की ट्रिक

"वत्स (बच्चा) से वात्सल्य।" जहाँ गोद, लोरी और लाड़ हो, वहाँ वात्सल्य। माँ के पर्यायवाची (माता, जननी, अम्मा, मैया) और पुत्र के पर्यायवाची (सुत, तनय, लाल) पंक्ति में दिखें, तो वात्सल्य रस की संभावना देखें।

सामान्य गलतियाँ

  • माँ बच्चे के प्रेम को श्रृंगार रस न लिखें।
  • बच्चे की मृत्यु पर माँ का विलाप वात्सल्य नहीं, करुण रस है।
  • कुछ पुरानी पुस्तकें केवल नौ रस मानती हैं और वात्सल्य को उनमें नहीं गिनतीं; अपनी पाठ्यपुस्तक देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वात्सल्य रस की परिभाषा क्या है?

माता पिता या बड़ों का संतान और छोटे बच्चों के प्रति स्नेह जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो वात्सल्य रस बनता है।

वात्सल्य रस का स्थायी भाव क्या है?

वात्सल्य रस का स्थायी भाव वत्सलता है, जिसे संतान विषयक रति भी कहा जाता है।

वात्सल्य रस का सम्राट किसे कहा जाता है?

सूरदास को वात्सल्य रस का सम्राट कहा जाता है। उन्होंने बाल लीला और माँ की ममता पर सबसे सुंदर और सबसे अधिक पद लिखे हैं।

वात्सल्य रस के कितने भेद हैं?

वात्सल्य रस के दो भेद हैं: संयोग वात्सल्य, जिसमें बच्चा पास होता है, और वियोग वात्सल्य, जिसमें बच्चे के दूर होने पर माता पिता व्याकुल होते हैं।

वात्सल्य रस का आसान उदाहरण क्या है?

उदाहरण: "घुटनों के बल सरके लल्ला, किलक किलक मुसकाए। माँ ने दौड़ उठाया गोदी, चूम चूम बलि जाए॥" इसमें बच्चे की क्रीड़ा पर माँ का लाड़ उमड़ रहा है।