Billi ka bahuvachan "बिल्लियाँ" होता है। बिल्ली ईकारांत स्त्रीलिंग शब्द है, इसलिए अंत की "ई" को "इयाँ" में बदलकर बहुवचन बनता है। एक से अनेक बनाने के ऐसे नियमों को समझने के लिए हमें वचन का पाठ पढ़ना होगा। इस पेज पर वचन की परिभाषा, भेद, बहुवचन बनाने के सभी नियम और बहुत खोजे जाने वाले शब्दों की तालिका दी गई है।
वचन किसे कहते हैं
परिभाषा: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का, यानी एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं। "वचन" का शाब्दिक अर्थ है "संख्यावाचक"।
उदाहरण: बिल्ली दूध पी रही है। बिल्लियाँ दूध पी रही हैं। पहले वाक्य में एक बिल्ली है, दूसरे में अनेक। शब्द के साथ क्रिया भी बदल गई: "रही है" से "रही हैं"।
वचन के भेद
हिंदी में वचन के दो भेद होते हैं। संस्कृत में तीन वचन होते हैं (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन), पर हिंदी में द्विवचन नहीं होता।
| वचन | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकवचन | शब्द के जिस रूप से एक व्यक्ति या वस्तु का बोध हो | लड़का, बिल्ली, किताब, नदी |
| बहुवचन | शब्द के जिस रूप से एक से अधिक का बोध हो | लड़के, बिल्लियाँ, किताबें, नदियाँ |
एकवचन से बहुवचन: बहुत खोजे जाने वाले शब्द
| एकवचन | बहुवचन | नियम |
|---|---|---|
| बिल्ली | बिल्लियाँ | ई से इयाँ |
| रात | रातें | अकारांत स्त्रीलिंग, अ से एँ |
| मेज़ | मेज़ें | अकारांत स्त्रीलिंग, अ से एँ |
| बुढ़िया | बुढ़ियाँ | या से याँ |
| भैंस | भैंसें | अकारांत स्त्रीलिंग, अ से एँ |
| चाबी | चाबियाँ | ई से इयाँ |
| लड्डू | लड्डू | पुल्लिंग, रूप नहीं बदलता |
| फूल | फूल | अकारांत पुल्लिंग, रूप नहीं बदलता |
| पहाड़ी | पहाड़ियाँ | ई से इयाँ |
| झाड़ी | झाड़ियाँ | ई से इयाँ |
| राखी | राखियाँ | ई से इयाँ |
| शिक्षा | शिक्षाएँ | आकारांत स्त्रीलिंग, आ से आएँ |
| माला | मालाएँ | आकारांत स्त्रीलिंग, आ से आएँ |
| घड़ा | घड़े | आकारांत पुल्लिंग, आ से ए |
| मुहर | मुहरें | अकारांत स्त्रीलिंग, अ से एँ |
| चिड़िया | चिड़ियाँ | या से याँ |
| नदी | नदियाँ | ई से इयाँ |
| किताब | किताबें | अकारांत स्त्रीलिंग, अ से एँ |
| कपड़ा | कपड़े | आकारांत पुल्लिंग, आ से ए |
| वस्तु | वस्तुएँ | उकारांत स्त्रीलिंग, एँ जोड़ें |
| बहू | बहुएँ | ऊ को उ करके एँ जोड़ें |
एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम
नियम 1: आकारांत पुल्लिंग शब्द
पुल्लिंग शब्द के अंत के "आ" को "ए" कर देते हैं। जैसे लड़का से लड़के, घोड़ा से घोड़े, घड़ा से घड़े, कपड़ा से कपड़े, बेटा से बेटे। अपवाद: रिश्तों और आदर वाले शब्द नहीं बदलते, जैसे पिता, चाचा, मामा, दादा, नाना, राजा।
नियम 2: अकारांत स्त्रीलिंग शब्द
अंत के "अ" को "एँ" कर देते हैं। जैसे रात से रातें, मेज़ से मेज़ें, भैंस से भैंसें, बहन से बहनें, आँख से आँखें, किताब से किताबें, मुहर से मुहरें।
नियम 3: आकारांत स्त्रीलिंग शब्द
अंत में "एँ" जोड़ देते हैं। जैसे माला से मालाएँ, शिक्षा से शिक्षाएँ, कथा से कथाएँ, लता से लताएँ, कविता से कविताएँ।
नियम 4: इकारांत और ईकारांत स्त्रीलिंग शब्द
अंत की "इ" या "ई" को "इयाँ" कर देते हैं। जैसे बिल्ली से बिल्लियाँ, चाबी से चाबियाँ, लड़की से लड़कियाँ, नदी से नदियाँ, राखी से राखियाँ, तिथि से तिथियाँ, रीति से रीतियाँ।
नियम 5: "इया" वाले स्त्रीलिंग शब्द
अंत के "या" पर चंद्रबिंदु लगाकर "याँ" कर देते हैं। जैसे बुढ़िया से बुढ़ियाँ, चिड़िया से चिड़ियाँ, गुड़िया से गुड़ियाँ, डिबिया से डिबियाँ, बिटिया से बिटियाँ।
नियम 6: उकारांत और ऊकारांत स्त्रीलिंग शब्द
अंत में "एँ" जोड़ते हैं और "ऊ" को "उ" कर देते हैं। जैसे वस्तु से वस्तुएँ, धातु से धातुएँ, बहू से बहुएँ।
नियम 7: जो पुल्लिंग शब्द नहीं बदलते
आकारांत के अलावा बाकी पुल्लिंग शब्दों का बहुवचन में रूप वही रहता है। जैसे लड्डू, फूल, घर, बालक, आदमी, हाथी, साधु, पेड़। वचन क्रिया से पता चलता है: "पेड़ गिरा" (एकवचन), "पेड़ गिरे" (बहुवचन)।
नियम 8: गण, वर्ग, जन, लोग, वृंद जोड़कर
कुछ शब्दों के साथ ये शब्द जोड़कर बहुवचन बनाते हैं। जैसे छात्रगण, अध्यापकवर्ग, गुरुजन, मित्र लोग, भक्तवृंद।
नियम 9: कारक चिह्न के साथ बहुवचन
जब शब्द के बाद ने, को, से, का, में जैसे कारक चिह्न आते हैं, तब बहुवचन में "ओं" लगता है। जैसे बिल्लियों को दूध दो, लड़कों ने गाना गाया, रातों में ठंड है, लड्डुओं का डिब्बा, फूलों की माला।
वचन से जुड़ी विशेष बातें
- आदर के लिए बहुवचन: एक व्यक्ति के लिए भी आदर में बहुवचन क्रिया आती है। जैसे "पिताजी आ गए हैं", "दादी जी सो रही हैं"।
- सदा एकवचन वाले शब्द: पानी, दूध, घी, सोना, जनता, आकाश, सामान। जैसे "जनता जाग गई"।
- सदा बहुवचन वाले शब्द: प्राण, दर्शन, हस्ताक्षर, होश, आँसू, लोग। जैसे "उसके प्राण बच गए", "आपके दर्शन हुए"।
याद रखने की ट्रिक
- "पुल्लिंग में आ गया तो ए": लड़का से लड़के।
- "स्त्रीलिंग में ई गई तो इयाँ": बिल्ली से बिल्लियाँ।
- "स्त्रीलिंग में अ गया तो एँ": रात से रातें।
- पहले शब्द का लिंग पहचानिए, फिर अंत का स्वर देखिए। बहुवचन अपने आप बन जाएगा।
सामान्य गलतियाँ
- "बिल्लीयाँ" लिखना: सही है "बिल्लियाँ", छोटी इ की मात्रा के साथ।
- "बुढ़ियाएँ" लिखना: बुढ़िया का बहुवचन "बुढ़ियाँ" है।
- "लड्डुएँ" लिखना: लड्डू पुल्लिंग है, इसलिए बहुवचन "लड्डू" ही रहता है। कारक के साथ "लड्डुओं" बनता है।
- बिंदु या चंद्रबिंदु छोड़ देना: "बिल्लियाँ" की जगह "बिल्लिया" या "रातें" की जगह "राते" लिखना गलत है।
- सस्वर वाचन से भ्रम: "सस्वर वाचन" और "मौन वाचन" में "वाचन" का अर्थ पढ़ना है। सस्वर वाचन यानी आवाज़ के साथ पढ़ना और मौन वाचन यानी मन में पढ़ना। इनका व्याकरण के वचन से कोई संबंध नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिल्ली का बहुवचन क्या है?
बिल्ली का बहुवचन बिल्लियाँ है। बिल्ली ईकारांत स्त्रीलिंग शब्द है, इसलिए अंत की ई को इयाँ में बदल देते हैं। कारक चिह्न के साथ यह "बिल्लियों" बन जाता है, जैसे बिल्लियों को दूध दो।
रात का बहुवचन क्या है?
रात का बहुवचन रातें है। रात अकारांत स्त्रीलिंग शब्द है, इसलिए अंत में एँ लगता है। उदाहरण: सर्दियों की रातें लंबी होती हैं।
बुढ़िया का बहुवचन क्या है?
बुढ़िया का बहुवचन बुढ़ियाँ है। इया से अंत होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों में अंत के या पर चंद्रबिंदु लगाया जाता है, जैसे चिड़िया से चिड़ियाँ और गुड़िया से गुड़ियाँ।
मेज़, भैंस और चाबी का बहुवचन क्या है?
मेज़ का बहुवचन मेज़ें, भैंस का भैंसें और चाबी का चाबियाँ है। मेज़ और भैंस अकारांत स्त्रीलिंग हैं, इसलिए एँ लगता है। चाबी ईकारांत स्त्रीलिंग है, इसलिए इयाँ लगता है।
फूल और लड्डू का वचन कैसे बदलें?
फूल और लड्डू पुल्लिंग शब्द हैं जिनका अंत आ से नहीं होता, इसलिए बहुवचन में इनका रूप नहीं बदलता: फूल से फूल, लड्डू से लड्डू। वचन का पता क्रिया से चलता है, जैसे "फूल खिले हैं"। कारक चिह्न के साथ फूलों और लड्डुओं बनता है।