Lokoktiyan (लोकोक्तियाँ) वे प्रचलित कथन हैं जिनमें लोगों के लंबे अनुभव का सार छिपा होता है। आम बोलचाल में इन्हें कहावतें कहते हैं। जैसे "जैसी करनी वैसी भरनी" बताती है कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल मिलता है। इस पेज पर lokoktiyan in hindi की परिभाषा, विशेषताएँ, प्रयोग का तरीका और 60 लोकोक्तियों की अर्थ सहित सूची दी गई है।
Lokokti kise kahate hain: परिभाषा
परिभाषा: लोक में प्रचलित ऐसा कथन, जो किसी अनुभव, सीख या सच्चाई को संक्षेप में प्रकट करता है, लोकोक्ति कहलाता है।
"लोकोक्ति" शब्द लोक और उक्ति से मिलकर बना है। लोक का अर्थ है जन साधारण और उक्ति का अर्थ है कथन। यानी लोगों के बीच प्रचलित कथन। लोकोक्तियाँ किसी एक लेखक ने नहीं बनाईं। ये गाँव, खेत, बाज़ार और घर के अनुभवों से धीरे धीरे बनीं और पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहीं। कुछ लोकोक्तियाँ कवियों की पंक्तियों से भी बनी हैं, जैसे तुलसीदास की पंक्ति "का बरखा जब कृषी सुखाने" और कवि वृंद की पंक्ति "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान"।
लोकोक्ति का प्रयोग प्रायः अपनी बात के समर्थन में या किसी स्थिति पर टिप्पणी के रूप में किया जाता है।
लोकोक्ति के उदाहरण
| लोकोक्ति | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| अधजल गगरी छलकत जाय | कम ज्ञान वाला अधिक दिखावा करता है | थोड़ा सा पढ़कर वह सबको सिखाने लगा, अधजल गगरी छलकत जाय। |
| अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत | समय निकल जाने पर पछताना बेकार है | साल भर नहीं पढ़े, अब रोने से क्या, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। |
| एक अनार सौ बीमार | वस्तु एक, चाहने वाले बहुत | एक नौकरी के लिए पाँच सौ आवेदन आए, एक अनार सौ बीमार। |
| अंत भला तो सब भला | परिणाम अच्छा हो तो सब अच्छा | रास्ते में बहुत परेशानी हुई, पर सब समय पर घर पहुँच गए, अंत भला तो सब भला। |
| दूध का दूध, पानी का पानी | ठीक ठीक न्याय होना | पंचायत ने दोनों पक्षों को सुनकर दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | काम न आने पर दूसरों को दोष देना | खुद गाना नहीं आता और कहता है माइक खराब है, नाच न जाने आँगन टेढ़ा। |
| ऊँची दुकान फीका पकवान | नाम बड़ा पर गुण कम | इतने बड़े होटल का खाना बेस्वाद निकला, ऊँची दुकान फीका पकवान। |
| जहाँ चाह वहाँ राह | इच्छा हो तो रास्ता मिल ही जाता है | गरीबी में भी उसने पढ़ाई पूरी की, सच है जहाँ चाह वहाँ राह। |
लोकोक्ति की विशेषताएँ
- पूर्ण वाक्य: लोकोक्ति अपने आप में पूरा वाक्य होती है। इसका अर्थ समझने के लिए किसी दूसरे वाक्य की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- स्वतंत्र प्रयोग: इसका प्रयोग वाक्य के अंत में या अलग से अपनी बात के समर्थन में होता है।
- रूप नहीं बदलता: लोकोक्ति के शब्द और क्रिया प्रायः ज्यों के त्यों रहते हैं। लिंग, वचन या काल के अनुसार इनमें बदलाव नहीं होता।
- अनुभव का सार: हर लोकोक्ति के पीछे कोई जीवन अनुभव, सीख या सच्चाई होती है।
- संक्षिप्त और लयबद्ध: अधिकतर लोकोक्तियाँ छोटी होती हैं और इनमें तुक या लय होती है, जैसे "थोथा चना बाजे घना", इसलिए ये जल्दी याद हो जाती हैं।
- बोलियों का रंग: कई लोकोक्तियों में अवधी, ब्रज या दूसरी बोलियों के शब्द मिलते हैं, जैसे "छलकत", "होत", "जाय"।
Kahavat in English: लोकोक्तियाँ और अंग्रेज़ी proverbs
कहावत को अंग्रेज़ी में proverb या saying कहते हैं। बहुत सी हिंदी लोकोक्तियों के मिलते-जुलते अंग्रेज़ी proverb भी हैं।
| हिंदी लोकोक्ति | मिलता-जुलता English proverb |
|---|---|
| जैसी करनी वैसी भरनी | As you sow, so shall you reap. |
| थोथा चना बाजे घना | Empty vessels make the most noise. |
| अंत भला तो सब भला | All is well that ends well. |
| दूर के ढोल सुहावने | Distance lends enchantment to the view. |
| जहाँ चाह वहाँ राह | Where there is a will, there is a way. |
| बूँद बूँद से घड़ा भरता है | Little drops of water make the mighty ocean. |
| एक पंथ दो काज | To kill two birds with one stone. |
लोकोक्ति का वाक्य में प्रयोग
लोकोक्ति का प्रयोग करते समय पहले पूरी स्थिति बताएँ और फिर लोकोक्ति को उस स्थिति के निष्कर्ष के रूप में रखें। उदाहरण: "रीना ने रोज़ थोड़ी थोड़ी बचत करके साइकिल खरीद ली। बूँद बूँद से घड़ा भरता है।" यहाँ लोकोक्ति पूरी बात का सार बता रही है।
लोकोक्ति के शब्द न बदलें। "जैसी करनी वैसी भरनी" को "जैसा किया वैसा भरा" लिखना गलत है।
सामान्य गलतियाँ
- लोकोक्ति को मुहावरा समझना: "एक अनार सौ बीमार" पूरा कथन है, इसलिए यह लोकोक्ति है। पूरा अंतर मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर पेज पर पढ़ें।
- बोली के शब्द बदल देना: "अधजल गगरी छलकत जाय" को "अधजल गगरी छलकती जाती है" लिखना ठीक नहीं।
- केवल शब्दार्थ लिखना: "ऊँट के मुँह में जीरा" का अर्थ ऊँट को जीरा खिलाना नहीं, बल्कि आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना है।
याद रखने की ट्रिक
- पशु पक्षियों वाली लोकोक्तियाँ एक साथ याद करें: ऊँट के मुँह में जीरा, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद, भैंस के आगे बीन बजाए।
- भोजन वाली लोकोक्तियाँ साथ रखें: आम के आम गुठलियों के दाम, ऊँची दुकान फीका पकवान, घर की मुर्गी दाल बराबर।
- हर लोकोक्ति के लिए अपने जीवन की कोई घटना सोचें जिसमें वह ठीक बैठती हो।
Muhavare aur lokoktiyan: साथ में पढ़ें
परीक्षा में मुहावरे और लोकोक्तियाँ प्रायः एक ही प्रश्न में पूछी जाती हैं। मुहावरों की परिभाषा और सूची के लिए मुहावरे पेज देखें, और अभ्यास के लिए मुहावरे रिक्त स्थान अभ्यास करें। छोटी सूची चाहिए तो 10 मुहावरे और 20 मुहावरे पढ़ें।
60 lokoktiyan in hindi: अर्थ और वाक्य सहित
नीचे 60 प्रचलित लोकोक्तियाँ उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग के साथ दी गई हैं। पहली 10 और 20 लोकोक्तियाँ छोटी कक्षाओं के लिए सबसे उपयोगी हैं।
| क्रम | लोकोक्ति | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अधजल गगरी छलकत जाय | कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है | थोड़ा सा पढ़कर वह सबको भाषण देता है, अधजल गगरी छलकत जाय। |
| 2 | अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत | समय निकल जाने पर पछताना बेकार है | साल भर नहीं पढ़े तो अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। |
| 3 | आम के आम गुठलियों के दाम | एक काम से दोहरा लाभ | पुरानी किताबें बेचीं, पैसे मिले और जगह बनी, आम के आम गुठलियों के दाम। |
| 4 | ऊँट के मुँह में जीरा | अधिक आवश्यकता के आगे बहुत थोड़ी वस्तु | पहलवान को एक केला देना ऊँट के मुँह में जीरा है। |
| 5 | एक अनार सौ बीमार | एक वस्तु के अनेक चाहने वाले | एक ही झूला और बीस बच्चे, यह तो एक अनार सौ बीमार है। |
| 6 | एक पंथ दो काज | एक काम से दो काम बन जाना | बाज़ार जाकर सब्ज़ी भी ली और बिल भी भरा, एक पंथ दो काज। |
| 7 | उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे | दोषी ही निर्दोष पर दोष लगाए | गलती उसकी थी, पर वह मुझ पर चिल्लाया, उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे। |
| 8 | ऊँची दुकान फीका पकवान | दिखावा अधिक, गुण कम | इतनी सजी दुकान की मिठाई बेस्वाद निकली, ऊँची दुकान फीका पकवान। |
| 9 | का बरखा जब कृषि सुखाने | अवसर बीत जाने पर सहायता बेकार है | परीक्षा बीत जाने पर किताब मिली तो क्या लाभ, का बरखा जब कृषि सुखाने। |
| 10 | खोदा पहाड़ निकली चुहिया | बहुत परिश्रम पर बहुत कम लाभ | पूरा दिन ढूँढ़ने पर बक्से में बस पुराने कागज़ मिले, खोदा पहाड़ निकली चुहिया। |
| 11 | घर का भेदी लंका ढाए | आपसी भेद खोलने वाला बड़ा नुकसान करता है | अपने ही नौकर ने चोरों को रास्ता बताया, घर का भेदी लंका ढाए। |
| 12 | घर की मुर्गी दाल बराबर | घर की वस्तु या व्यक्ति का आदर नहीं होता | बाहर सब उसकी कला सराहते हैं, पर घर की मुर्गी दाल बराबर। |
| 13 | चोर की दाढ़ी में तिनका | दोषी व्यक्ति स्वयं डरा रहता है | चोरी की बात छिड़ते ही वह घबरा गया, चोर की दाढ़ी में तिनका। |
| 14 | जल में रहकर मगर से बैर | जिसके आश्रय में रहें उसी से शत्रुता करना | मालिक के घर रहकर उसी से झगड़ना, जल में रहकर मगर से बैर है। |
| 15 | जिसकी लाठी उसकी भैंस | शक्तिशाली की ही जीत होती है | बड़े लड़कों ने मैदान छीन लिया, जिसकी लाठी उसकी भैंस। |
| 16 | जैसी करनी वैसी भरनी | जैसा काम वैसा फल | दूसरों को सताने वाला आज खुद अकेला है, जैसी करनी वैसी भरनी। |
| 17 | जितनी चादर हो उतने पैर पसारो | आय के अनुसार ही खर्च करना चाहिए | कर्ज़ लेकर दिखावा मत करो, जितनी चादर हो उतने पैर पसारो। |
| 18 | थोथा चना बाजे घना | गुणहीन व्यक्ति अधिक बोलता है | जो कुछ नहीं जानता, वही सबसे ज़्यादा बोलता है, थोथा चना बाजे घना। |
| 19 | दूर के ढोल सुहावने | दूर से चीज़ें अच्छी लगती हैं | शहर का जीवन कठिन निकला, सच है दूर के ढोल सुहावने होते हैं। |
| 20 | नाच न जाने आँगन टेढ़ा | अपनी कमी का दोष दूसरों पर डालना | गाना नहीं आता तो माइक को खराब बता दिया, नाच न जाने आँगन टेढ़ा। |
| 21 | नौ नकद न तेरह उधार | उधार के अधिक लाभ से नकद का थोड़ा लाभ अच्छा | दुकानदार ने कम दाम में नकद बेचना ठीक समझा, नौ नकद न तेरह उधार। |
| 22 | बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद | मूर्ख गुणवान वस्तु का महत्व नहीं जानता | उसने पुरानी कीमती किताब रद्दी में दे दी, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। |
| 23 | भैंस के आगे बीन बजाए भैंस खड़ी पगुराय | मूर्ख को समझाना बेकार है | उसे कितना भी समझाओ, भैंस के आगे बीन बजाए भैंस खड़ी पगुराय। |
| 24 | होनहार बिरवान के होत चिकने पात | होनहार के लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं | नन्ही रीता अभी से सुंदर चित्र बनाती है, होनहार बिरवान के होत चिकने पात। |
| 25 | हाथ कंगन को आरसी क्या | प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं | शक है तो खुद चलकर देख लो, हाथ कंगन को आरसी क्या। |
| 26 | हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और | कहना कुछ और करना कुछ और | वह कहता कुछ, करता कुछ, हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और। |
| 27 | अंधों में काना राजा | मूर्खों के बीच थोड़ा जानने वाला भी श्रेष्ठ माना जाता है | गाँव में थोड़ी अंग्रेज़ी जानने वाला विद्वान कहलाता है, अंधों में काना राजा। |
| 28 | अंधा क्या चाहे दो आँखें | मनचाही वस्तु अपने आप मिल जाना | बच्चों को मेले जाना था, पिताजी खुद ले चले, अंधा क्या चाहे दो आँखें। |
| 29 | आ बैल मुझे मार | जान बूझकर मुसीबत मोल लेना | सोते कुत्ते को छेड़ना तो आ बैल मुझे मार वाली बात है। |
| 30 | आसमान से गिरा खजूर में अटका | एक संकट से निकलकर दूसरे में फँस जाना | बारिश से बचा तो मधुमक्खियों में फँसा, आसमान से गिरा खजूर में अटका। |
| 31 | एक और एक ग्यारह होते हैं | मिलकर काम करने में बड़ी शक्ति होती है | दोनों भाइयों ने मिलकर दुकान चमका दी, एक और एक ग्यारह होते हैं। |
| 32 | एक तो करेला दूजा नीम चढ़ा | एक बुराई के साथ दूसरी बुराई भी होना | आलसी तो था ही, अब झूठा भी है, एक तो करेला दूजा नीम चढ़ा। |
| 33 | एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है | एक बुरा व्यक्ति पूरे समूह को बदनाम कर देता है | एक शरारती से कक्षा बदनाम हुई, एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है। |
| 34 | काला अक्षर भैंस बराबर | बिलकुल अनपढ़ होना | दादाजी के समय गाँव के कई लोगों के लिए काला अक्षर भैंस बराबर था। |
| 35 | खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे | लज्जित होकर अपना गुस्सा दूसरों पर निकालना | हारकर वह अपने छोटे भाई पर चिल्लाने लगा, खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। |
| 36 | गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है | दोषी के साथ निर्दोष भी दंड पाता है | शरारत दो ने की, सज़ा सबको मिली, गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है। |
| 37 | चिराग तले अँधेरा | पास की बुराई दिखाई न देना | अध्यापक का अपना बेटा ही पढ़ाई में कमज़ोर है, चिराग तले अँधेरा। |
| 38 | चोर चोर मौसेरे भाई | बुरे लोग आपस में मिले रहते हैं | दोनों बेईमान दुकानदार एक दूसरे का साथ देते हैं, चोर चोर मौसेरे भाई। |
| 39 | जहाँ चाह वहाँ राह | इच्छा हो तो रास्ता निकल ही आता है | बिना कोचिंग के भी उसने परीक्षा पास कर ली, जहाँ चाह वहाँ राह। |
| 40 | जान है तो जहान है | जीवन सबसे मूल्यवान है | काम बाद में होता रहेगा, पहले सेहत संभालो, जान है तो जहान है। |
| 41 | जैसा देश वैसा भेष | जहाँ रहें वहाँ के अनुसार व्यवहार करें | पहाड़ पर जाकर उसने भी ऊनी कपड़े पहन लिए, जैसा देश वैसा भेष। |
| 42 | डूबते को तिनके का सहारा | संकट में थोड़ी सी मदद भी बड़ी लगती है | मुसीबत में मिले थोड़े पैसे भी डूबते को तिनके का सहारा बने। |
| 43 | तू डाल डाल मैं पात पात | एक से बढ़कर एक चालाक होना | चोर नई चाल चलता, सिपाही आगे रहता, तू डाल डाल मैं पात पात। |
| 44 | दाल भात में मूसलचंद | किसी के काम में बेवजह दखल देने वाला | हम बात कर रहे थे कि वह दाल भात में मूसलचंद बनकर आ गया। |
| 45 | दूध का जला छाछ भी फूँक फूँककर पीता है | एक बार धोखा खाने वाला बहुत सावधान हो जाता है | एक बार ठगा गया, अब दूध का जला छाछ भी फूँक फूँककर पीता है। |
| 46 | नेकी कर दरिया में डाल | भलाई करके उसे भूल जाना चाहिए | मदद करके बार बार जताना ठीक नहीं, नेकी कर दरिया में डाल। |
| 47 | बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा | संयोग से मनचाही बात हो जाना | मेले जाना था और चाचाजी साथ ले गए, बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा। |
| 48 | बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय | बुरे काम का अच्छा फल नहीं मिलता | साल भर खेलते रहे, बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय। |
| 49 | साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे | बिना हानि के काम बन जाना | ऐसा उपाय सोचो कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। |
| 50 | सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना | काम शुरू करते ही बाधा आ जाना | नई दुकान खोलते ही बाढ़ आ गई, सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ गए। |
| 51 | हथेली पर सरसों नहीं जमती | हर काम में समय लगता है | एक दिन में अंग्रेज़ी नहीं आएगी, हथेली पर सरसों नहीं जमती। |
| 52 | अपनी अपनी डफली अपना अपना राग | सबकी अलग अलग राय होना | बैठक में सब अपनी अपनी डफली अपना अपना राग अलाप रहे थे। |
| 53 | अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता | अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता | पूरे मोहल्ले की सफ़ाई सबको मिलकर करनी होगी, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। |
| 54 | दीवारों के भी कान होते हैं | गुप्त बात सावधानी से करनी चाहिए | धीरे बोलो, दीवारों के भी कान होते हैं। |
| 55 | बूँद बूँद से घड़ा भरता है | थोड़ा थोड़ा जोड़ने से बहुत हो जाता है | रोज़ दस रुपये बचाकर उसने साइकिल खरीद ली, बूँद बूँद से घड़ा भरता है। |
| 56 | रस्सी जल गई पर बल न गया | सब कुछ नष्ट होने पर भी घमंड न जाना | धन चला गया, अकड़ वही है, रस्सी जल गई पर बल न गया। |
| 57 | आगे कुआँ पीछे खाई | दोनों ओर संकट होना | सच बोले तो दोस्त नाराज़, झूठ बोले तो माँ, आगे कुआँ पीछे खाई। |
| 58 | अक्ल बड़ी या भैंस | बुद्धि शारीरिक बल से बड़ी होती है | छोटे खरगोश ने चतुराई से शेर को हरा दिया, आखिर अक्ल बड़ी या भैंस। |
| 59 | करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान | लगातार अभ्यास से साधारण व्यक्ति भी कुशल बन जाता है | रोज़ अभ्यास से कमज़ोर छात्र अव्वल आया, करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। |
| 60 | नया नौ दिन पुराना सौ दिन | पुरानी चीज़ अधिक टिकाऊ और भरोसेमंद होती है | नई चप्पल टूट गई, पुरानी चल रही है, नया नौ दिन पुराना सौ दिन। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Lokokti kise kahate hain?
लोक में प्रचलित ऐसा कथन जो किसी अनुभव या सीख को संक्षेप में प्रकट करे, लोकोक्ति कहलाता है। इसे कहावत भी कहते हैं। जैसे: जैसी करनी वैसी भरनी।
लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
लोकोक्ति शब्द लोक और उक्ति से बना है। लोक का अर्थ है जन साधारण और उक्ति का अर्थ है कथन, यानी लोगों में प्रचलित कथन।
लोकोक्ति के 5 उदाहरण अर्थ सहित लिखिए।
अधजल गगरी छलकत जाय: कम ज्ञानी अधिक दिखावा करता है। एक अनार सौ बीमार: वस्तु एक, चाहने वाले बहुत। नाच न जाने आँगन टेढ़ा: काम न आने पर दूसरों को दोष देना। जहाँ चाह वहाँ राह: इच्छा हो तो रास्ता मिलता है। ऊँची दुकान फीका पकवान: नाम बड़ा गुण कम।
Kahavat in English को क्या कहते हैं?
कहावत को अंग्रेज़ी में proverb या saying कहते हैं। जैसे जहाँ चाह वहाँ राह के लिए अंग्रेज़ी proverb है: Where there is a will, there is a way.
मुहावरे और लोकोक्तियाँ में मुख्य अंतर क्या है?
मुहावरा वाक्यांश होता है और वाक्य का भाग बनकर आता है, जबकि लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है और स्वतंत्र रूप से प्रयोग होती है। मुहावरे की क्रिया बदलती है, लोकोक्ति प्रायः ज्यों की त्यों रहती है।