Prernarthak kriya यानी प्रेरणार्थक क्रिया वह क्रिया है जिसमें कर्ता स्वयं काम नहीं करता, बल्कि किसी दूसरे को काम करने की प्रेरणा देता है या उससे काम करवाता है। प्रेरणार्थक शब्द "प्रेरणा + अर्थक" से बना है, यानी प्रेरणा का अर्थ देने वाली। जैसे माँ बच्चे को खाना खिलाती है। यहाँ खाने का काम बच्चा कर रहा है, पर प्रेरणा माँ दे रही है।
प्रेरणार्थक क्रिया, रचना के आधार पर क्रिया का एक भेद है। प्रेरणार्थक क्रियाएँ प्रायः सकर्मक होती हैं।
प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं
जिन क्रियाओं से यह बोध हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है, उन्हें प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
रोज़ की भाषा में हम प्रेरणार्थक क्रियाओं का बहुत प्रयोग करते हैं। जब हम कहते हैं कि हमने नाई से बाल कटवाए, दर्ज़ी से कपड़े सिलवाए या मिस्त्री से घर बनवाया, तो काम हम नहीं करते, बल्कि करवाते हैं। यही करवाने का भाव प्रेरणार्थक क्रिया की पहचान है। साधारण क्रिया में कर्ता खुद काम करता है, जबकि प्रेरणार्थक में काम का करने वाला कोई और होता है।
प्रेरणार्थक वाक्य में दो कर्ता होते हैं:
- प्रेरक कर्ता: जो प्रेरणा देता है या काम करवाता है।
- प्रेरित कर्ता: जो प्रेरणा पाकर वास्तव में काम करता है।
उदाहरण: मालिक ने नौकर से गाड़ी धुलवाई। यहाँ मालिक प्रेरक कर्ता है और नौकर प्रेरित कर्ता।
प्रेरणार्थक क्रिया के रूप (भेद)
प्रेरणार्थक क्रिया के दो रूप होते हैं:
1. प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया
मूल धातु में प्रायः "आ" या "आना" जोड़कर बनती है। इसमें कर्ता काम में स्वयं भी शामिल रहता है या सीधे दूसरे पर काम का प्रभाव डालता है। जैसे पढ़ना से पढ़ाना: अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं।
2. द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया
मूल धातु में "वा" या "वाना" जोड़कर बनती है। इसमें कर्ता खुद काम नहीं करता, बल्कि किसी तीसरे से काम करवाता है। जैसे पढ़ना से पढ़वाना: प्रधानाचार्य ने अध्यापक से बच्चों को पाठ पढ़वाया।
प्रेरणार्थक क्रिया की तालिका
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक | द्वितीय प्रेरणार्थक |
|---|---|---|
| पढ़ना | पढ़ाना | पढ़वाना |
| लिखना | लिखाना | लिखवाना |
| करना | कराना | करवाना |
| चलना | चलाना | चलवाना |
| सुनना | सुनाना | सुनवाना |
| बनना | बनाना | बनवाना |
| हँसना | हँसाना | हँसवाना |
| उठना | उठाना | उठवाना |
| गिरना | गिराना | गिरवाना |
| खाना | खिलाना | खिलवाना |
| पीना | पिलाना | पिलवाना |
| सोना | सुलाना | सुलवाना |
| देना | दिलाना | दिलवाना |
| सीना | सिलाना | सिलवाना |
| धोना | धुलाना | धुलवाना |
| रोना | रुलाना | रुलवाना |
| देखना | दिखाना | दिखवाना |
| सीखना | सिखाना | सिखवाना |
| बैठना | बिठाना | बिठवाना |
| जागना | जगाना | जगवाना |
| बोलना | बुलाना | बुलवाना |
| कटना / काटना | कटाना | कटवाना |
| दौड़ना | दौड़ाना | दौड़वाना |
| नाचना | नचाना | नचवाना |
| मिलना | मिलाना | मिलवाना |
प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के नियम
- सामान्य नियम: धातु + आ = प्रथम प्रेरणार्थक, धातु + वा = द्वितीय प्रेरणार्थक (चल, चला, चलवा)।
- दो अक्षरों वाली धातु में पहला दीर्घ स्वर प्रायः ह्रस्व हो जाता है: जागना से जगाना, भागना से भगाना, नाचना से नचाना।
- एक अक्षर वाली धातु में "ला" और "लवा" जुड़ता है और स्वर ह्रस्व होता है: पी से पिला, पिलवा। सो से सुला, सुलवा। खा से खिला, खिलवा।
- कुछ धातुओं के रूप विशेष होते हैं, जिन्हें याद करना पड़ता है: बोलना से बुलाना, बैठना से बिठाना।
प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण वाक्य
- माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।
- दादी ने कहानी सुनाई।
- पिताजी ने दर्ज़ी से कुर्ता सिलवाया।
- जोकर ने सबको हँसाया।
- मैंने भाई से चिट्ठी लिखवाई।
- दीदी ने छोटी बहन को सुलाया।
- हमने मिस्त्री से नया कमरा बनवाया।
- दुकानदार ने ग्राहक को कपड़े दिखाए।
- अध्यापिका ने बच्चों को कविता याद करवाई।
- मैंने नाई से बाल कटवाए।
मूल, प्रथम और द्वितीय रूप का वाक्यों में अंतर
| रूप | वाक्य | काम कौन कर रहा है |
|---|---|---|
| मूल क्रिया | बच्चा खाना खाता है। | बच्चा स्वयं |
| प्रथम प्रेरणार्थक | माँ बच्चे को खाना खिलाती है। | माँ, बच्चे से सीधे |
| द्वितीय प्रेरणार्थक | माँ दीदी से बच्चे को खाना खिलवाती है। | दीदी, माँ के कहने पर |
दूसरा उदाहरण: मैं पत्र लिखता हूँ (मूल), मैं भाई को पत्र लिखाता हूँ (प्रथम, यानी बोलकर लिखाना), मैं भाई से पत्र लिखवाता हूँ (द्वितीय)। द्वितीय प्रेरणार्थक में प्रेरित कर्ता के साथ प्रायः "से" लगता है।
अभ्यास प्रश्न
नीचे दी गई क्रियाओं के दोनों प्रेरणार्थक रूप लिखिए: 1. जलना, 2. सूखना, 3. लेटना, 4. घूमना, 5. पकना।
उत्तर: 1. जलाना, जलवाना। 2. सुखाना, सुखवाना। 3. लिटाना, लिटवाना। 4. घुमाना, घुमवाना। 5. पकाना, पकवाना।
कौन सी क्रियाएँ प्रेरणार्थक नहीं बनतीं
कुछ क्रियाओं के प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते, जैसे आना, जाना, होना, सकना, पाना, चाहिए। वह आता है का प्रेरणार्थक रूप हिंदी में प्रचलित नहीं है। ऐसी जगह "बुलाना" या "भेजना" जैसी दूसरी क्रिया का प्रयोग करते हैं।
याद रखने की ट्रिक
- खुद किया = मूल (पढ़ना)।
- सामने वाले से सीधे कराया = "आ" (पढ़ाना)।
- बीच में किसी तीसरे से कराया = "वा" (पढ़वाना)।
सामान्य गलतियाँ
- "सिखलाना, दिखलाना" भी सही रूप हैं, पर स्कूल परीक्षा में सिखाना, दिखाना अधिक मान्य हैं।
- अकर्मक क्रिया (सोना, हँसना) प्रेरणार्थक बनकर सकर्मक हो जाती है। इसका अंतर अकर्मक क्रिया पेज पर देखें।
- प्रेरणार्थक प्रत्यय "आ, वा" का विषय प्रत्यय से भी जुड़ा है।
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्दों के लिए क्रिया विशेषण पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं?
जिस क्रिया से पता चले कि कर्ता स्वयं काम न करके किसी दूसरे को काम करने की प्रेरणा दे रहा है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे माँ बच्चे को खाना खिलाती है, मैंने दर्ज़ी से कपड़े सिलवाए।
प्रेरणार्थक क्रिया के कितने रूप होते हैं?
प्रेरणार्थक क्रिया के दो रूप होते हैं: प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक। प्रथम में धातु के साथ आ जुड़ता है, जैसे पढ़ाना। द्वितीय में वा जुड़ता है, जैसे पढ़वाना।
प्रेरणार्थक क्रिया के 5 उदाहरण बताइए।
पढ़ना से पढ़ाना, पढ़वाना। लिखना से लिखाना, लिखवाना। सोना से सुलाना, सुलवाना। खाना से खिलाना, खिलवाना। पीना से पिलाना, पिलवाना।
प्रेरक कर्ता और प्रेरित कर्ता क्या होते हैं?
जो कर्ता प्रेरणा देता है, उसे प्रेरक कर्ता कहते हैं। जो प्रेरणा पाकर काम करता है, उसे प्रेरित कर्ता कहते हैं। मालिक ने नौकर से गाड़ी धुलवाई में मालिक प्रेरक और नौकर प्रेरित कर्ता है।
किन क्रियाओं के प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते?
आना, जाना, होना, सकना, पाना जैसी क्रियाओं के प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते। ऐसे में अर्थ के अनुसार बुलाना या भेजना जैसी दूसरी क्रिया का प्रयोग किया जाता है।