Vikari aur avikari shabd: रूप परिवर्तन के आधार पर हिंदी के शब्द दो प्रकार के होते हैं। जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण बदल जाता है, वे विकारी शब्द हैं, और जिनका रूप कभी नहीं बदलता, वे avikari shabd (अविकारी शब्द या अव्यय) कहलाते हैं। "विकार" का अर्थ है बदलाव, इसलिए विकारी यानी बदलने वाला और अविकारी यानी न बदलने वाला।
विकारी शब्द किसे कहते हैं (Vikari shabd)
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के अनुसार बदल जाता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। जैसे: लड़का से लड़के, लड़की, लड़कों। विकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं:
| भेद | परिभाषा | रूप परिवर्तन के उदाहरण |
|---|---|---|
| संज्ञा | किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम | लड़का, लड़के, लड़की, लड़कियाँ |
| सर्वनाम | संज्ञा के स्थान पर आने वाला शब्द | मैं, मुझे, मेरा, मुझसे |
| विशेषण | संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला | अच्छा, अच्छी, अच्छे |
| क्रिया | काम का करना या होना बताने वाला | जाता, जाती, जाते, गया, जाएगा |
ध्यान दें: "सुंदर", "लाल" जैसे कुछ विशेषणों का रूप नहीं बदलता (सुंदर लड़का, सुंदर लड़की), फिर भी विशेषण वर्ग को विकारी ही माना जाता है, क्योंकि आकारांत विशेषण (अच्छा, बड़ा, काला) बदलते हैं।
विकारी शब्दों में बदलाव के कारण
- लिंग से: घोड़ा दौड़ता है, घोड़ी दौड़ती है।
- वचन से: कमरा, कमरे। (देखें वचन)
- कारक से: मैं, मुझको, मेरा।
- काल से: खाता है, खाया, खाएगा।
अविकारी शब्द किसे कहते हैं (Avikari shabd kise kahate hain)
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कभी नहीं बदलता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं। जैसे: आज, यहाँ, धीरे, और, लेकिन, के पास, वाह। "अव्यय" का अर्थ है जिसका व्यय (खर्च या बदलाव) न हो।
- लड़का धीरे चलता है। लड़की धीरे चलती है। लड़के धीरे चलते हैं।
तीनों वाक्यों में संज्ञा और क्रिया बदल गई, पर "धीरे" वैसा ही रहा। यही अविकारी शब्द की पहचान है।
अविकारी शब्द के भेद (Avikari shabd ke bhed)
अविकारी शब्द (अव्यय) के चार मुख्य भेद हैं। कुछ पुस्तकों में "निपात" (ही, भी, तो, तक, मात्र) को पाँचवाँ भेद माना गया है।
| भेद | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्रियाविशेषण | क्रिया की विशेषता बताता है | आज, यहाँ, बहुत, धीरे |
| संबंधबोधक | संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध बताता है | के पास, के ऊपर, के बिना, की ओर |
| समुच्चयबोधक | दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ता है | और, या, लेकिन, क्योंकि, कि |
| विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा जैसे भाव प्रकट करता है | वाह, अरे, हाय, छि, शाबाश |
1. क्रियाविशेषण
जो अव्यय क्रिया की विशेषता बताएँ, वे क्रिया विशेषण कहलाते हैं। इसके चार भेद हैं:
| भेद | प्रश्न | उदाहरण |
|---|---|---|
| कालवाचक | कब | आज, कल, अभी, रोज़, सदा |
| स्थानवाचक | कहाँ | यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, अंदर |
| परिमाणवाचक | कितना | बहुत, थोड़ा, ज़्यादा, खूब |
| रीतिवाचक | कैसे | धीरे, जल्दी, ध्यान से, अचानक |
उदाहरण: बच्चे रोज़ खेलते हैं। बिल्ली ऊपर बैठी है। वह बहुत हँसा। कछुआ धीरे चलता है।
2. संबंधबोधक
जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से जोड़ें, उन्हें संबंधबोधक कहते हैं। जैसे: विद्यालय के सामने बगीचा है। पानी के बिना जीवन नहीं। चिड़िया पेड़ के ऊपर बैठी है। ध्यान रहे, यही शब्द संज्ञा के बिना आएँ तो क्रियाविशेषण बन जाते हैं: "ऊपर देखो" में ऊपर क्रियाविशेषण है।
3. समुच्चयबोधक
जो अव्यय दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ें, उन्हें समुच्चयबोधक या योजक कहते हैं। इसके दो भेद हैं:
- समानाधिकरण: बराबर के वाक्यों को जोड़ते हैं: और, तथा, या, अथवा, पर, लेकिन, इसलिए। जैसे: रीना और मीना बहनें हैं।
- व्यधिकरण: प्रधान और आश्रित वाक्य को जोड़ते हैं: कि, क्योंकि, यदि, ताकि, जिससे। जैसे: वह नहीं आया क्योंकि वह बीमार था।
इन्हीं योजकों से संयुक्त और मिश्र वाक्य बनते हैं, विस्तार से वाक्य के भेद पर पढ़ें।
4. विस्मयादिबोधक
जो अव्यय मन के अचानक उठे भाव (हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा) प्रकट करें, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं। लिखते समय इनके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न लगाया जाता है।
| भाव | शब्द | वाक्य |
|---|---|---|
| हर्ष | वाह, अहा, शाबाश | वाह, क्या सुंदर चित्र है |
| शोक | हाय, ओह, आह | हाय, उसका पैर टूट गया |
| आश्चर्य | अरे, ओहो, क्या | अरे, तुम कब आए |
| घृणा | छि, धिक्, थू | छि, कितनी गंदगी है |
| संबोधन | अरे, ओ, अजी | अजी, सुनिए तो |
| स्वीकृति | हाँ, अच्छा, ठीक | अच्छा, मैं आता हूँ |
ऊपर के वाक्यों में भाव वाले शब्द के बाद या वाक्य के अंत में विस्मयादिबोधक चिह्न लगेगा।
विकारी और अविकारी शब्द में अंतर (Avikari shabd chart)
| आधार | विकारी शब्द | अविकारी शब्द |
|---|---|---|
| रूप | लिंग, वचन, कारक, काल से बदलता है | कभी नहीं बदलता |
| भेद | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया | क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
| दूसरा नाम | कोई नहीं | अव्यय |
| उदाहरण | लड़का, वह, काला, खेलना | आज, के पास, और, वाह |
याद रखने की ट्रिक
- विकारी के चार भेद का क्रम याद रखें: "सं सर्व वि क्रि" (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)।
- अविकारी के चार भेद: "क्रि सं स वि" (क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक)।
- जाँच का आसान तरीका: वाक्य का लिंग या वचन बदलकर देखें। जो शब्द न बदले, वह अविकारी है।
सामान्य गलतियाँ
- "अच्छा" को हर जगह विशेषण मानना। "अच्छा लड़का" में विशेषण (विकारी) है, पर "अच्छा, मैं चलता हूँ" में स्वीकृति वाला अव्यय है।
- संबंधबोधक और क्रियाविशेषण को मिलाना। संज्ञा के साथ "के" लगा हो तो संबंधबोधक, अकेला हो तो क्रियाविशेषण।
अभ्यास (Avikari shabd worksheet)
रेखांकित करने योग्य शब्द पहचानिए कि वे विकारी हैं या अविकारी:
- माँ कल आएँगी। (अविकारी, कालवाचक क्रियाविशेषण)
- मोटा कुत्ता सो रहा है। (विकारी, विशेषण)
- घर के पीछे तालाब है। (अविकारी, संबंधबोधक)
- मैं गया पर वह नहीं मिला। (अविकारी, समुच्चयबोधक)
- उसने गीत गाया। (विकारी, सर्वनाम)
- शाबाश, तुमने अच्छा किया। (अविकारी, विस्मयादिबोधक)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अविकारी शब्द किसे कहते हैं?
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कभी नहीं बदलता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं। जैसे: आज, यहाँ, धीरे, और, के पास, वाह।
विकारी शब्द कितने प्रकार के होते हैं?
विकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। इन सबका रूप लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार बदल सकता है।
अविकारी शब्द के कितने भेद होते हैं?
अविकारी शब्द के चार भेद होते हैं: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक। कुछ पुस्तकें निपात (ही, भी, तो) को पाँचवाँ भेद मानती हैं।
अविकारी शब्दों को अव्यय क्यों कहते हैं?
अव्यय का अर्थ है जिसका व्यय या बदलाव न हो। अविकारी शब्दों का रूप किसी भी स्थिति में नहीं बदलता, इसलिए इन्हें अव्यय कहा जाता है।
विकारी शब्द के उदाहरण क्या हैं?
लड़का (लड़के, लड़की), मैं (मुझे, मेरा), अच्छा (अच्छी, अच्छे), खाना (खाता, खाया, खाएगा) विकारी शब्दों के उदाहरण हैं।