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वीर रस (Veer Ras): परिभाषा, भेद, स्थायी भाव और उदाहरण

जहाँ युद्ध, दान, दया या धर्म के कार्य के लिए हृदय में उत्साह जागकर पुष्ट हो, वहाँ वीर रस होता है। इसका स्थायी भाव उत्साह है।

  • अलंकार, रस, छंद
  • अपडेट: 11 Oct 2026

Veer ras ka udaharan पढ़ते ही भुजाएँ फड़कने लगती हैं और मन में जोश भर जाता है। जब किसी कविता में युद्ध के लिए ललकार, देश की रक्षा का संकल्प, बड़ा दान देने का साहस या किसी दुखी की रक्षा का उत्साह वर्णित हो, तो वहाँ वीर रस होता है। वीर रस रस के नौ मूल भेदों में पाँचवाँ है और हिंदी की वीर गाथाओं तथा देशभक्ति कविताओं का प्रमुख रस है।

वीर रस की परिभाषा (Veer ras ki paribhasha)

शत्रु के उत्कर्ष को मिटाने, दीन दुखियों की रक्षा करने, दान देने या धर्म की स्थापना के लिए हृदय में जो उत्साह नामक स्थायी भाव जागता है, वह विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होकर वीर रस कहलाता है।

वीर रस का स्थायी भाव क्या है? वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है।

वीर रस के अंग

अंगवीर रस में
स्थायी भावउत्साह
आलंबनशत्रु, याचक (दान माँगने वाला), दुखी व्यक्ति, धर्म का संकट
उद्दीपनशत्रु की ललकार, रणभेरी, नगाड़े, सेना का शोर, देश पर संकट
अनुभावभुजाएँ फड़कना, हथियार उठाना, ललकारना, आगे बढ़ना, गर्जन
संचारी भावगर्व, धृति (धैर्य), हर्ष, आवेग, उग्रता, स्मृति

वीर रस के भेद

आचार्यों ने उत्साह के कारण के आधार पर वीर रस के चार भेद बताए हैं:

भेदउत्साह किसके लिएउदाहरण की स्थिति
युद्धवीरयुद्ध में विजय के लिएसेनापति का रण में कूदना
दानवीरदान देने के लिएराजा का अपना सब कुछ दान कर देना
दयावीरदुखी पर दया के लिएडूबते बच्चे को बचाने नदी में कूदना
धर्मवीरधर्म या कर्तव्य पालन के लिएसत्य के लिए कष्ट सहना

वीर रस की पहचान

  • पंक्ति में रण, समर, शत्रु, ललकार, तलवार, भुजा, विजय, बलिदान जैसे शब्द हों।
  • पढ़ते समय मन में डर या गुस्से की जगह जोश और साहस जागे।
  • पात्र पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ने की बात करे।
  • कई मुहावरे वीर भाव बताते हैं, जैसे कमर कसना, हिम्मत न हारना, लोहे के चने चबाना।

वीर रस के उदाहरण (Veer ras ke udaharan)

उदाहरण 1: भूषण (युद्धवीर)

साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि,
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के,
नदी नद मद गैबरन के रलत हैं॥

व्याख्या: रीतिकाल के वीर कवि भूषण लिखते हैं कि चतुरंगिणी सेना सजाकर, अंग अंग में उमंग भरकर सरजा शिवाजी युद्ध जीतने चल पड़े हैं। नगाड़ों का अपार नाद गूँज रहा है और हाथियों के मद से नदी नाले बह रहे हैं। "उमंग" उत्साह का सूचक है, नगाड़ों का नाद उद्दीपन है। यह सबसे प्रसिद्ध veer ras ki kavita मानी जाती है।

उदाहरण 2: तुलसीदास (दोहा)

सूर समर करनी करहिं, कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाइ रिपु, कायर कथहिं प्रतापु॥

व्याख्या: शूरवीर युद्ध में अपनी करनी (वीरता) दिखाते हैं, अपने मुँह से बड़ाई नहीं करते। युद्ध में शत्रु को सामने पाकर केवल कायर अपनी बड़ाई करते हैं। यह कक्षा 10 के प्रसंग से है और वीरता के आदर्श से उत्साह जगाता है।

उदाहरण 3: मौलिक उदाहरण (युद्धवीर)

उदाहरण:
बजी रणभेरी, उठे जवान, थाम लिए हथियार।
सीमा पर डट गए सिपाही, सुन शत्रु की ललकार॥
पीछे हटना सीखा नहीं, आगे बढ़ना काम।
मातृभूमि की रक्षा में, अर्पित सुबह शाम॥

व्याख्या: रणभेरी और शत्रु की ललकार उद्दीपन हैं, हथियार थामना और डट जाना अनुभाव हैं, गर्व और धृति संचारी भाव हैं।

उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (दानवीर)

उदाहरण:
द्वार पे आया याचक जो, खाली हाथ न जाए।
अपना अन्न, अपना वस्त्र, हँसकर राजा लुटाए॥

व्याख्या: याचक आलंबन है। हँसते हुए सब कुछ दान कर देने का उत्साह दानवीर का लक्षण है।

उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (दयावीर)

उदाहरण:
उफनी नदी, पुकारा बच्चा, सबके छूटे प्रान।
कूद पड़ा मछुआरा झट से, बचा लिया नादान॥

व्याख्या: डूबते बच्चे की पुकार उद्दीपन है। अपनी जान की परवाह किए बिना कूद पड़ना दया से उपजा उत्साह है, इसलिए दयावीर।

उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (धर्मवीर)

उदाहरण:
सच कहने पर कष्ट मिले तो, सह लूँगा हर बार।
झूठ के आगे झुकना मुझको, कभी नहीं स्वीकार॥

व्याख्या: सत्य के पालन के लिए हर कष्ट सहने का उत्साह धर्मवीर का उदाहरण है।

परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें

प्रश्न: "साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि" में कौन सा रस है? उत्तर: वीर रस (युद्धवीर)। स्थायी भाव: उत्साह। आश्रय: शिवाजी। आलंबन: शत्रु सेना। उद्दीपन: नगाड़ों का नाद, सजी हुई सेना। अनुभाव: युद्ध के लिए चल पड़ना। संचारी भाव: गर्व, हर्ष, धृति।

अभ्यास: रस पहचानिए

  1. "मातृभूमि पर आँच न आए, चाहे जाए प्राण।" उत्तर: वीर रस (युद्धवीर), क्योंकि देश की रक्षा का उत्साह है।
  2. "भूखे को अपनी रोटी दी, आप रहा उपवास।" उत्तर: वीर रस (दयावीर या दानवीर), क्योंकि दया और दान का उत्साह है।
  3. "शत्रु देख काँपे सब सैनिक, छोड़ भागे मैदान।" उत्तर: भयानक रस, क्योंकि यहाँ उत्साह नहीं, भय है।

याद रखने की ट्रिक

"वीर में जोश, रौद्र में रोष।" वीर रस के चार भेद याद रखने के लिए "यु दा द ध" बोलिए: युद्ध, दान, दया, धर्म। वीर का विलोम कायर है, और कायरता वाले वर्णन में वीर रस नहीं होता।

सामान्य गलतियाँ

  • स्थायी भाव "वीरता" या "साहस" नहीं, उत्साह लिखें।
  • क्रोध से भरा बदला रौद्र रस है, वीर नहीं।
  • युद्ध के बाद लाशों के ढेर का घिनौना वर्णन वीभत्स रस होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर रस की परिभाषा क्या है?

युद्ध, दान, दया या धर्म के कार्य के लिए हृदय में जागा उत्साह जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो वीर रस बनता है।

वीर रस का स्थायी भाव क्या है?

वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है। इसके अनुभाव हैं: भुजाएँ फड़कना, ललकारना, हथियार उठाना और आगे बढ़ना।

वीर रस के कितने भेद होते हैं?

वीर रस के चार भेद होते हैं: युद्धवीर, दानवीर, दयावीर और धर्मवीर। भेद इस आधार पर बनते हैं कि उत्साह किस कार्य के लिए है।

वीर रस की प्रसिद्ध कविता कौन सी है?

भूषण का छंद "साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि, सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं" वीर रस की सबसे प्रसिद्ध पुरानी कविता है। भूषण को रीतिकाल का प्रमुख वीर कवि माना जाता है।

वीर रस किसे कहते हैं, उदाहरण सहित बताइए।

जहाँ उत्साह स्थायी भाव पुष्ट होकर रस बने, वहाँ वीर रस होता है। उदाहरण: "सूर समर करनी करहिं, कहि न जनावहिं आपु" (तुलसीदास), जिसमें शूरवीरों की वीरता का आदर्श है।