Kriya kise kahate hain: जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे बच्चा दूध पीता है, पत्ते गिर रहे हैं, दीदी चित्र बनाती है। इन वाक्यों में पीता है, गिर रहे हैं और बनाती है क्रियाएँ हैं।
क्रिया के बिना वाक्य पूरा नहीं होता। मीना स्कूल अधूरा लगता है, पर मीना स्कूल जाती है पूरा वाक्य है। इसलिए क्रिया को वाक्य का प्राण कहा जाता है। क्रिया एक विकारी शब्द है, यानी लिंग, वचन, पुरुष और काल के अनुसार इसका रूप बदलता है।
क्रिया की परिभाषा (Kriya ki paribhasha)
जिन शब्दों से किसी काम का करना या होना प्रकट हो, उन्हें क्रिया कहते हैं। "करना" का अर्थ है कोई काम जो कर्ता करता है, जैसे लिखना, खेलना। "होना" का अर्थ है कोई स्थिति या घटना जो अपने आप होती है, जैसे बारिश होना, फूल खिलना, बर्फ़ पिघलना।
धातु किसे कहते हैं
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। धातु में "ना" जोड़ने से क्रिया का सामान्य रूप बनता है।
| धातु | सामान्य रूप | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| पढ़ | पढ़ना | वह किताब पढ़ रहा है। |
| लिख | लिखना | मैंने पत्र लिखा। |
| खा | खाना | बच्चे फल खाते हैं। |
| सो | सोना | भाई जल्दी सो गया। |
| दौड़ | दौड़ना | घोड़ा तेज़ दौड़ता है। |
धातु के दो प्रकार माने जाते हैं: मूल धातु (जो किसी दूसरे शब्द से न बनी हो, जैसे चल, खा) और यौगिक धातु (जो प्रत्यय या दूसरे शब्द जोड़कर बनी हो, जैसे चलवा, शरमा)।
क्रिया के भेद (Kriya ke bhed)
Kriya ke kitne bhed hote hain: क्रिया के भेद अलग अलग आधार पर किए जाते हैं। स्कूल की किताबों में मुख्य रूप से दो आधार पढ़ाए जाते हैं: कर्म के आधार पर और रचना के आधार पर। कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद हैं। रचना के आधार पर गिनती किताबों में अलग मिलती है (कहीं पाँच, कहीं छह), पर मुख्य भेद नीचे दिए गए हैं।
(क) कर्म के आधार पर क्रिया के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक क्रिया | कर्म होता है, फल कर्म पर पड़ता है | नीलम गाना गाती है। |
| अकर्मक क्रिया | कर्म नहीं होता, फल कर्ता पर पड़ता है | बच्चा हँसता है। |
1. सकर्मक क्रिया: जिस क्रिया के साथ कर्म हो, यानी क्रिया का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़े, वह सकर्मक है। जैसे माली पौधों को पानी देता है। सकर्मक के दो उपभेद हैं: एककर्मक (एक कर्म: मैं आम खाता हूँ) और द्विकर्मक (दो कर्म: अध्यापक ने छात्रों को हिंदी पढ़ाई)। विस्तार से पढ़ें: सकर्मक क्रिया।
2. अकर्मक क्रिया: जिस क्रिया के साथ कर्म न हो और फल सीधे कर्ता पर पड़े, वह अकर्मक है। जैसे चिड़िया उड़ती है, बच्चा रोता है। विस्तार से पढ़ें: अकर्मक क्रिया।
सकर्मक और अकर्मक की पहचान: क्या और किसे वाला प्रश्न
क्रिया से पहले क्या या किसे / किसको लगाकर प्रश्न करें।
- अगर उत्तर मिल जाए, तो क्रिया सकर्मक है। सीमा पत्र लिखती है। क्या लिखती है? पत्र। इसलिए सकर्मक।
- अगर उत्तर न मिले, तो क्रिया अकर्मक है। सीमा हँसती है। क्या हँसती है? कोई उत्तर नहीं। इसलिए अकर्मक।
(ख) रचना के आधार पर क्रिया के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य क्रिया | एक ही क्रिया | तुम चलो। वह आया। |
| संयुक्त क्रिया | दो या अधिक क्रियाएँ मिलकर | वह खाना खा चुका। बच्चा सो गया। |
| प्रेरणार्थक क्रिया | कर्ता खुद न करके दूसरे से करवाए | माँ ने बच्चे को दूध पिलाया। |
| पूर्वकालिक क्रिया | मुख्य क्रिया से पहले पूरी हुई क्रिया | वह नहाकर स्कूल गया। |
| नामधातु क्रिया | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी | बात से बतियाना, हाथ से हथियाना |
संयुक्त क्रिया (Sanyukt kriya kise kahate hain): जब दो या अधिक क्रियाएँ मिलकर एक पूरा अर्थ दें, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। इसमें पहली मुख्य क्रिया होती है और बाद वाली सहायक क्रिया, जैसे पढ़ने लगा, लिख सकता है, गिर पड़ा।
प्रेरणार्थक क्रिया: जब कर्ता स्वयं काम न करके किसी दूसरे को काम करने की प्रेरणा दे, जैसे पढ़ना से पढ़ाना, पढ़वाना। पूरी जानकारी: प्रेरणार्थक क्रिया।
पूर्वकालिक क्रिया: जब कर्ता एक क्रिया पूरी करके दूसरी क्रिया करे, तो पहली क्रिया पूर्वकालिक कहलाती है। इसमें धातु के साथ "कर" या "के" जुड़ता है, जैसे खाकर, उठकर, पढ़के।
नामधातु क्रिया: संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण शब्दों से बनी क्रिया नामधातु कहलाती है। जैसे बात से बतियाना, लाज से लजाना, चिकना से चिकनाना, अपना से अपनाना।
सहायक क्रिया (Sahayak kriya)
जो क्रिया मुख्य क्रिया के साथ आकर उसके काल, अर्थ या भाव को पूरा करती है, उसे सहायक क्रिया कहते हैं। जैसे वह खेल रहा है, मैं पढ़ चुका था। है, था, रहा, चुका, सकना सहायक क्रियाएँ हैं।
कुछ किताबें प्रयोग के आधार पर भी क्रिया के भेद (कर्तरि, कर्मणि, भावे) बताती हैं। यह विषय वाच्य से जुड़ा है।
क्रिया के 10 उदाहरण (Kriya ke udaharan)
- पिताजी अख़बार पढ़ रहे हैं।
- सूरज पूरब से निकलता है।
- दीदी ने केक बनाया।
- बच्चे मैदान में खेलते हैं।
- बारिश हो रही है।
- मैं कल नानी के घर जाऊँगा।
- कुत्ता रात भर भौंकता रहा।
- उसने हाथ धोकर खाना खाया।
- दर्ज़ी ने कपड़े सिलवाए।
- पेड़ से आम गिर पड़ा।
याद रखने की ट्रिक
- काम का करना या होना = क्रिया।
- क्या या किसे का उत्तर मिले = सकर्मक, न मिले = अकर्मक।
- "कर" लगा = पूर्वकालिक। "आना, वाना" लगा = प्रेरणार्थक।
सामान्य गलतियाँ
- क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द (तेज़, धीरे, कल) क्रिया नहीं, क्रिया विशेषण होते हैं।
- खाना शब्द संज्ञा भी हो सकता है (खाना स्वादिष्ट है) और क्रिया भी (मुझे खाना है)। वाक्य देखकर तय करें। संज्ञा के लिए संज्ञा पेज देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिया किसे कहते हैं? (kriya kise kahate hain)
जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे खाना, पीना, लिखना, सोना, होना। क्रिया के बिना वाक्य पूरा नहीं होता।
क्रिया के कितने भेद होते हैं? (kriya ke kitne bhed hote hain)
कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं: सकर्मक और अकर्मक। रचना के आधार पर इसके मुख्य भेद हैं: सामान्य, संयुक्त, प्रेरणार्थक, पूर्वकालिक और नामधातु क्रिया। अलग अलग किताबों में रचना वाले भेदों की गिनती थोड़ी अलग मिलती है।
रचना की दृष्टि से क्रिया के भेद कौन से हैं?
रचना के आधार पर क्रिया के भेद हैं: सामान्य क्रिया, संयुक्त क्रिया, प्रेरणार्थक क्रिया, पूर्वकालिक क्रिया और नामधातु क्रिया। कुछ किताबें इसमें कृदंत और सहायक क्रिया भी गिनती हैं।
संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?
जब दो या दो से अधिक क्रियाएँ मिलकर एक पूरी क्रिया का काम करें, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे वह पढ़ने लगा, बच्चा सो गया, मैं लिख सकता हूँ।
धातु किसे कहते हैं?
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। जैसे पढ़ना की धातु पढ़, खाना की धातु खा और चलना की धातु चल है। धातु में ना जोड़ने से क्रिया का सामान्य रूप बनता है।