Bhayanak ras ka udaharan वह पंक्ति है जिसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाएँ। जब किसी कविता में जंगली जानवर, भयंकर आग, बाढ़, आँधी, अँधेरी सुनसान जगह या किसी डरावने व्यक्ति का ऐसा वर्णन हो कि पात्र काँपने लगे, चीखे या भागे, तो वहाँ भयानक रस होता है। भयानक रस रस के नौ मूल भेदों में छठा है।
भयानक रस की परिभाषा (Bhayanak ras ki paribhasha)
किसी भयंकर वस्तु, प्राणी या परिस्थिति को देखने, सुनने या उसका स्मरण करने से हृदय में स्थित भय नामक स्थायी भाव जागता है। यही भय जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो भयानक रस कहलाता है।
भयानक रस का स्थायी भाव: भय (डर)। भय हर प्राणी में स्वाभाविक रूप से रहता है। जब कवि किसी भयंकर दृश्य का ऐसा सजीव चित्र खींचता है कि पाठक स्वयं को उस स्थिति में महसूस करे, तभी भयानक रस की पूरी अनुभूति होती है।
भयानक रस के अंग
| अंग | भयानक रस में |
|---|---|
| स्थायी भाव | भय |
| आलंबन | शेर, अजगर, साँप, भयंकर आग, बाढ़, डाकू, शत्रु की बड़ी सेना |
| उद्दीपन | दहाड़, फुफकार, सुनसान जंगल, अँधेरी रात, लपटें, असहाय स्थिति |
| अनुभाव | काँपना, पसीना आना, चीखना, भागना, रोंगटे खड़े होना, मुँह सूखना, बेहोश होना |
| संचारी भाव | त्रास, शंका, चिंता, आवेग, दैन्य, मूर्च्छा, ग्लानि |
भयानक रस की पहचान
- पंक्ति में डर, भय, थर थर, काँपना, चीख, भागना, बेहोश, रोंगटे जैसे शब्द हों।
- कोई पात्र किसी भयंकर चीज़ के सामने असहाय हो।
- पात्र लड़ने के बजाय बचने या भागने की कोशिश करे। अगर वह लड़ने को आगे बढ़े, तो वीर रस होगा।
- डर बताने वाले मुहावरे भी संकेत देते हैं, जैसे होश उड़ जाना, प्राण सूख जाना, पसीना पसीना होना।
भयानक रस के उदाहरण (Bhayanak ras ke udaharan)
उदाहरण 1: प्रचलित दोहा
एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय।
बिकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय॥
व्याख्या: एक ओर अजगर है और दूसरी ओर शेर (मृगराज)। बीच में फँसा यात्री व्याकुल होकर बेहोश हो गया। यात्री आश्रय है, अजगर और शेर आलंबन हैं, दोनों ओर से घिर जाना उद्दीपन है, व्याकुलता और मूर्च्छा अनुभाव हैं। यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला उदाहरण है।
उदाहरण 2: तुलसीदास (कवितावली, नगर में आग का वर्णन)
लागि लागि आगि, भागि भागि चले जहाँ तहाँ,
धीय को न माय, बाप पूत न सँभारहीं।
छूटे बार, बसन उघारे, धूम धुंध अंध,
कहैं बारे बूढ़े "बारि बारि" बार बारहीं॥
व्याख्या: नगर में जगह जगह आग लगी है और लोग इधर उधर भाग रहे हैं। डर के मारे माँ को बेटी की और पिता को पुत्र की सुध नहीं। बाल खुले हैं, कपड़े अस्त व्यस्त हैं, धुएँ से अंधे हुए बच्चे बूढ़े बार बार "पानी पानी" चिल्ला रहे हैं। भागना, चिल्लाना और सुध खो देना भय के अनुभाव हैं।
उदाहरण 3: मौलिक उदाहरण (जंगल)
उदाहरण:
सन्नाटा था, रात अँधेरी, झाड़ी में कुछ सरका।
दो जलती आँखें चमकीं, दिल धक धक धक धड़का॥
व्याख्या: अँधेरी सुनसान रात उद्दीपन है, झाड़ी में छिपा जानवर आलंबन है, दिल का धड़कना अनुभाव है, शंका संचारी भाव है।
उदाहरण 4: मौलिक उदाहरण (बाढ़)
उदाहरण:
उमड़ी नदी, गरजता पानी, बह गए छप्पर घर।
छत पर बैठे काँपें बच्चे, थर थर थर थर थर॥
व्याख्या: बाढ़ आलंबन है, गरजता पानी और बहते घर उद्दीपन हैं, बच्चों का काँपना अनुभाव है। bhayanak ras ka udaharan के रूप में यह छोटी कक्षाओं के लिए आसान है।
उदाहरण 5: मौलिक उदाहरण (साँप)
उदाहरण:
पाँव तले फुफकारा नाग, फन फैला काला।
मुँह सूखा, पग जम गए, निकला न कोई निवाला॥
व्याख्या: साँप आलंबन है, फुफकार उद्दीपन है, मुँह सूखना और पाँव जम जाना (स्तंभ) सात्त्विक अनुभाव हैं।
उदाहरण 6: मौलिक उदाहरण (आँधी)
उदाहरण:
काली आँधी, कड़की बिजली, टूट गिरा जब पेड़।
चीख पड़ा चरवाहा लड़का, भागी सारी भेड़॥
व्याख्या: आँधी और बिजली उद्दीपन हैं, चीखना और भागना अनुभाव हैं, त्रास संचारी भाव है।
भयानक रस और वीभत्स रस में अंतर
| भयानक रस | वीभत्स रस |
|---|---|
| स्थायी भाव भय | स्थायी भाव जुगुप्सा (घृणा) |
| डरावनी चीज़ से बचने का भाव | घिनौनी चीज़ से मुँह फेरने का भाव |
| काँपना, भागना, चीखना | नाक सिकोड़ना, थूकना, आँखें फेरना |
परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
प्रश्न: "एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय" में कौन सा रस है? उत्तर: भयानक रस। स्थायी भाव: भय। आश्रय: बटोही (यात्री)। आलंबन: अजगर और शेर। उद्दीपन: दोनों ओर से घिर जाना। अनुभाव: व्याकुल होना, मूर्च्छित होना। संचारी भाव: त्रास, मूर्च्छा।
अभ्यास: रस पहचानिए
- "दहाड़ा शेर, थर थर काँपा, गिरी हाथ से लाठी।" उत्तर: भयानक रस, क्योंकि शेर को देखकर भय जागा और काँपना उसका अनुभाव है।
- "लपटों में घिर गया मकान, भागे सब चिल्लाते।" उत्तर: भयानक रस, क्योंकि आग से डरकर लोग भाग रहे हैं।
- "शेर सामने देख शिकारी, बढ़ा तान कर भाला।" उत्तर: वीर रस, क्योंकि शिकारी डरने के बजाय उत्साह से आगे बढ़ा।
याद रखने की ट्रिक
"भय से भयानक, भागो तो भयानक।" जहाँ पात्र भागे, वहाँ भयानक; जहाँ आगे बढ़े, वहाँ वीर। निर्भय का विलोम भयभीत है, और भयभीत पात्र भयानक रस का आश्रय होता है।
सामान्य गलतियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भयानक रस की परिभाषा क्या है?
किसी भयंकर वस्तु, प्राणी या दृश्य को देखने या सुनने से हृदय में जागा भय जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तो भयानक रस बनता है।
भयानक रस का स्थायी भाव क्या है?
भयानक रस का स्थायी भाव भय है। इसके अनुभाव हैं: काँपना, पसीना आना, चीखना, भागना और बेहोश होना।
भयानक रस का सबसे आसान उदाहरण क्या है?
"एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय। बिकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय॥" इसमें अजगर और शेर के बीच फँसा यात्री डर से बेहोश हो जाता है।
भयानक रस की पहचान कैसे करें?
जहाँ कोई पात्र किसी भयंकर चीज़ के सामने असहाय होकर काँपे, चीखे या भागे, वहाँ भयानक रस समझें। पंक्ति पढ़कर पाठक के मन में भी डर जागता है।
भयानक रस और वीभत्स रस में क्या अंतर है?
भयानक रस में डर (भय) होता है और पात्र बचने के लिए भागता है। वीभत्स रस में घृणा (जुगुप्सा) होती है और पात्र घिनौनी चीज़ से मुँह फेरता है।