Bhav vachak sangya यानी भाववाचक संज्ञा वह संज्ञा है जो किसी गुण, दोष, भाव, दशा या अवस्था का नाम बताती है। ऐसी चीज़ों को हम आँखों से देख या हाथ से छू नहीं सकते, केवल अनुभव कर सकते हैं। जैसे प्रेम, क्रोध, खुशी, बचपन, मिठास।
यह संज्ञा का तीसरा भेद है। परीक्षा में "भाववाचक संज्ञा बनाइए" वाला प्रश्न लगभग हर कक्षा में आता है, इसलिए इस पाठ में बनाने के नियम विस्तार से दिए गए हैं।
भाववाचक संज्ञा की परिभाषा
परिभाषा: जिस संज्ञा शब्द से किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, दोष, धर्म, दशा, अवस्था या भाव का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
उदाहरण: आम मीठा होता है। यहाँ "मीठा" आम का गुण बताने वाला विशेषण है। पर "आम में बहुत मिठास है" में "मिठास" उस गुण का नाम है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है।
भाववाचक संज्ञा किसे कहते हैं: पाँच प्रकार के भाव
| किसका बोध | भाववाचक संज्ञा के उदाहरण |
|---|---|
| गुण | ईमानदारी, सच्चाई, वीरता, सुंदरता, दया |
| दोष | बुराई, आलस, झूठ, कायरता, लालच |
| भाव या मन की स्थिति | प्रेम, क्रोध, खुशी, दुख, डर, घृणा |
| दशा या अवस्था | बचपन, जवानी, बुढ़ापा, बीमारी, गरीबी, थकान |
| व्यापार या कार्य | पढ़ाई, लिखावट, दौड़, चढ़ाई, उड़ान |
भाववाचक संज्ञा कैसे बनती है
भाववाचक संज्ञा पाँच प्रकार के शब्दों से बनाई जाती है: जातिवाचक संज्ञा से, सर्वनाम से, विशेषण से, क्रिया से और अव्यय से। इनमें प्रायः ता, त्व, पन, आई, आस, आहट, आवट, आपा, इमा, ई जैसे प्रत्यय जुड़ते हैं।
1. जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा
| जातिवाचक | भाववाचक | जातिवाचक | भाववाचक |
|---|---|---|---|
| मित्र | मित्रता | बच्चा | बचपन |
| मनुष्य | मनुष्यता | लड़का | लड़कपन |
| पशु | पशुता | शिशु | शैशव |
| दास | दासता | नारी | नारीत्व |
| चोर | चोरी | पुरुष | पुरुषत्व |
2. सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा
| सर्वनाम | भाववाचक |
|---|---|
| अपना | अपनापन, अपनत्व |
| मम (मेरा) | ममता, ममत्व |
| निज | निजता, निजत्व |
| सर्व | सर्वस्व |
| पराया | परायापन |
3. विशेषण से भाववाचक संज्ञा
| विशेषण | भाववाचक | विशेषण | भाववाचक |
|---|---|---|---|
| सुंदर | सुंदरता | मीठा | मिठास |
| अच्छा | अच्छाई | बुरा | बुराई |
| लाल | लालिमा | गर्म | गर्मी |
| ऊँचा | ऊँचाई | मोटा | मोटापा |
| चतुर | चतुराई | वीर | वीरता |
| सरल | सरलता | खट्टा | खटास |
विशेषण के बारे में और जानने के लिए विशेषण पाठ देखें।
4. क्रिया से भाववाचक संज्ञा
| क्रिया | भाववाचक | क्रिया | भाववाचक |
|---|---|---|---|
| हँसना | हँसी | पढ़ना | पढ़ाई |
| लिखना | लिखावट | घबराना | घबराहट |
| सजाना | सजावट | थकना | थकान |
| उड़ना | उड़ान | बहना | बहाव |
| गिरना | गिरावट | चढ़ना | चढ़ाई |
क्रिया क्या होती है, यह क्रिया पाठ में पढ़ें।
5. अव्यय से भाववाचक संज्ञा
| अव्यय | भाववाचक |
|---|---|
| दूर | दूरी |
| निकट | निकटता |
| शीघ्र | शीघ्रता |
| समीप | समीपता |
| धिक् | धिक्कार |
भाववाचक संज्ञा के उदाहरण वाक्य
- बच्चों की हँसी सबको अच्छी लगती है।
- दादी ने अपना बचपन गाँव में बिताया।
- सैनिकों की वीरता पर हमें गर्व है।
- लंबी यात्रा के बाद सबको थकान हो गई।
- माँ की ममता का कोई मोल नहीं।
- नेहा की लिखावट बहुत सुंदर है।
- घर से विद्यालय की दूरी दो किलोमीटर है।
- ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।
विशेषण और भाववाचक संज्ञा का वाक्य में प्रयोग
एक ही मूल से बने विशेषण और भाववाचक संज्ञा को वाक्य में अलग-अलग तरह से प्रयोग किया जाता है। विशेषण किसी संज्ञा के साथ आकर उसकी विशेषता बताता है, जबकि भाववाचक संज्ञा अपने आप में उस गुण का नाम होती है। नीचे के जोड़े ध्यान से पढ़िए:
- यह पहाड़ ऊँचा है। (विशेषण) / इस पहाड़ की ऊँचाई बहुत है। (भाववाचक संज्ञा)
- अमन चतुर लड़का है। (विशेषण) / अमन की चतुराई सबको पसंद है। (भाववाचक संज्ञा)
- नींबू खट्टा होता है। (विशेषण) / नींबू की खटास दाँतों को लगती है। (भाववाचक संज्ञा)
- दादी का स्वभाव सरल है। (विशेषण) / दादी की सरलता मन मोह लेती है। (भाववाचक संज्ञा)
भाववाचक संज्ञा की विशेषताएँ
- यह किसी ठोस वस्तु का नहीं, बल्कि गुण, भाव या दशा का नाम है।
- इसे गिना, तौला या छुआ नहीं जा सकता।
- यह प्रायः एकवचन में आती है। इसका लिंग शब्द के अनुसार होता है, जैसे सुंदरता (स्त्रीलिंग), बचपन (पुल्लिंग)।
- यह बहुत बार किसी दूसरे शब्द में प्रत्यय जोड़कर बनती है, पर कुछ शब्द मूल रूप से ही भाववाचक होते हैं, जैसे प्रेम, क्रोध, दया, सुख, दुख।
याद रखने की ट्रिक
"छू न सको, बस महसूस करो।" अगर किसी शब्द को आप छू नहीं सकते, गिन नहीं सकते, केवल अनुभव कर सकते हैं, तो वह भाववाचक संज्ञा है। साथ ही शब्द के अंत में ता, त्व, पन, आई, आस, आहट, आवट दिखे, तो वह प्रायः भाववाचक संज्ञा ही होगा। जैसे मित्रता, गुरुत्व, बचपन, चतुराई, मिठास, घबराहट, सजावट।
सामान्य गलतियाँ
- विशेषण को भाववाचक लिखना: "सुंदर", "मीठा", "वीर" विशेषण हैं। इनकी भाववाचक संज्ञा "सुंदरता", "मिठास", "वीरता" है।
- "गरम" और "गरमी" में भ्रम: "चाय गरम है" में गरम विशेषण है, "आज बहुत गरमी है" में गरमी भाववाचक संज्ञा है।
- "शिशु" से "शिशुता" लिखना: मानक रूप "शैशव" है। इसी तरह "बच्चा" से "बचपन" बनता है, "बच्चापन" नहीं।
- बहुवचन में प्रयोग: "इस लड़की में कई अच्छाइयाँ हैं" में "अच्छाइयाँ" जातिवाचक की तरह प्रयोग हुई है। सामान्यतः भाववाचक संज्ञा एकवचन में रहती है।
अभ्यास: भाववाचक संज्ञा बनाइए
नीचे दिए शब्दों की भाववाचक संज्ञा बनाइए। उत्तर कोष्ठक में हैं।
बूढ़ा (बुढ़ापा), गरीब (गरीबी), मधुर (मधुरता, माधुर्य), कठोर (कठोरता), सच्चा (सच्चाई), मिलना (मिलन), जीना (जीवन), काला (कालिमा), मानव (मानवता), भूखा (भूख)।
संज्ञा के दूसरे भेद भी पढ़ें: जातिवाचक संज्ञा और व्यक्तिवाचक संज्ञा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाववाचक संज्ञा किसे कहते हैं?
जिस संज्ञा से किसी गुण, दोष, भाव, दशा या अवस्था का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे प्रेम, क्रोध, बचपन, मिठास और ईमानदारी। इन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है।
भाववाचक संज्ञा के उदाहरण क्या हैं?
मित्रता, बचपन, बुढ़ापा, सुंदरता, मिठास, अच्छाई, हँसी, पढ़ाई, लिखावट, थकान, ममता, अपनापन और दूरी भाववाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।
भाववाचक संज्ञा कितने प्रकार के शब्दों से बनती है?
भाववाचक संज्ञा पाँच प्रकार के शब्दों से बनती है: जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय। जैसे मित्र से मित्रता, अपना से अपनापन, मीठा से मिठास, हँसना से हँसी, दूर से दूरी।
भाववाचक संज्ञा बनाने में कौन-से प्रत्यय लगते हैं?
भाववाचक संज्ञा बनाने में प्रायः ता, त्व, पन, आई, आस, आहट, आवट, आपा, इमा और ई प्रत्यय लगते हैं। जैसे वीरता, नारीत्व, लड़कपन, चतुराई, खटास, घबराहट, सजावट, मोटापा, लालिमा, चोरी।
मीठा की भाववाचक संज्ञा क्या है?
मीठा विशेषण है और इसकी भाववाचक संज्ञा मिठास है। जैसे "इस खीर में बहुत मिठास है"। इसी तरह खट्टा से खटास बनता है।