Atyadhik Ka Sandhi Vichchhed: अत्यधिक का संधि विच्छेद है अति + अधिक। इसमें यण स्वर संधि है, जिसका नियम है इ + अ = य। नीचे नियम, समझाने का तरीका और इसी नियम से बने दूसरे शब्द दिए गए हैं।
अत्यधिक का संधि विच्छेद
| शब्द | अत्यधिक (atyadhik) |
|---|---|
| संधि विच्छेद | अति + अधिक |
| संधि का नाम | यण स्वर संधि |
| नियम | इ + अ = य |
समझिए
अति के अंत का इ आगे भिन्न स्वर अ आने पर य् बन जाता है, इसलिए अति + अधिक = अत्यधिक।
संधि विच्छेद करते समय शब्द को उस जगह से तोड़ें जहाँ दो ध्वनियाँ मिली हैं, फिर देखें कि मिलने पर कौन सा बदलाव हुआ। यही बदलाव संधि का प्रकार बताता है।
इसी नियम से बने शब्द
| शब्द | संधि विच्छेद |
|---|---|
| इत्यादि | इति + आदि |
| अत्याचार | अति + आचार |
| यद्यपि | यदि + अपि |
| अत्यंत | अति + अंत |
और संधि विच्छेद
- उल्लास संधि विच्छेद
- पवित्र संधि विच्छेद
- अन्वेषण संधि विच्छेद
- नरेंद्र संधि विच्छेद
- हिमालय संधि विच्छेद
- मनोहर संधि विच्छेद
नियम विस्तार से: संधि और उसके भेद।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Atyadhik ka sandhi vichchhed kya hai?
अत्यधिक का संधि विच्छेद अति + अधिक है।
अत्यधिक में कौन सी संधि है?
अत्यधिक में यण स्वर संधि है। नियम: इ + अ = य।